आम चुनाव को लेकर सारी राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर तरह तरह के आरोप लगाकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के सबसे बड़े चुनाव में उस देश के हरेक नागरिक की जिम्मेदारी अहम होती है। लेकिन इस लोकसभा चुनाव के लिए समुदाय विशेष के ठेकेदारों ने भी एक पार्टी विशेष के खिलाफ अपनी कमर कस ली है।

‘जमात-ए-इस्लामी-हिंद’ ने एक नोटिस जारी कर इस्लाम को मानने वालों को निर्देशित किया है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सभी मुसलमान अपने अपने क्षेत्र में महाठगबंधन (सपा-बसपा-रालोद) के प्रत्याशी को वोट दें। इस इस्लामिक संगठन का यह निर्देश इसके जोनल ऑफिस मुरादाबाद से जारी किया गया है। ज्ञात हो कि गत दिनों बसपा प्रमुख मायावती ने सहारनपुर के देवबंद में एक रैली में खुलेआम मुस्लिमों से महागठबंधन को वोट देने की अपील की थी। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से भी कहा था कि सभी कार्यकर्ता इस बात पर विशेष ध्यान दें कि मुस्लिम समाज का वोट महागठबंधन के अलावा कहीं और ना जाए। इसके तत्काल बाद उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग ने इस बयान को संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी और आगे का कारवाई के लिए निर्देशित किया।

इसके अलावा ‘इंडियन मुस्लिम वोटर डॉट कॉम’ नामक एक इस्लामिक वेबसाइट ने भी विभिन्न राज्यों के मुस्लिमों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वोट देने के लिए कहा है। इस वेबसाइट ने एक पूरा डाटा तैयार किया है, जिसमे यह बताया गया है कि बीजेपी के वोटर से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं और अगर सभी मुस्लिम एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ वोट करें, तो बीजेपी को जीतने से रोका जा सकता है। आपको बता दें कि यह वेबसाइट कुछ दिनों पहले ही ‘गोडैडी डॉट कॉम’ और ‘एलएलसी’ की सहायता से पंजीकृत की गई है।

वेबसाइट का दावा है कि इसका उद्देश्य मुसलमानों को धार्मिक आधार एक वोटबैंक के रूट में अलग करना और सियासी ताकत बनाना है। इसके लिए वेबसाइट के कुरआन की एक आयत का भी हवाला दिया गया है। इसमे लिखा है, “अल्लाह की बनाई रस्सी को सभी एक साथ दृढता से पकड़े रहो। विभाजित मत बनो। जब तुम उनके दुश्मन थे, तो अल्लाह ने तुम्हें बचाया। उसके एहसानों को मत भूलो। जब तुम आपस में एक दूसरे के खिलाफ नफरत का भाव रखते थे, तो अल्लाह ने तुम्हें मोहब्बत करना सिखाया।” [कुरआन- 3:103]

वेबसाइट के मानें तो जो मुसलमान बीजेपी को वोट देता है, वो इस्लाम को मानने वाला नहीं है। अर्थात वेबसाइट के मुताबिक, बीजेपी को मुसलमानों का एक भी वोट नहीं मिलता है। वेबसाइट जिस बेशर्मी से मुसलमानों को धार्मिक आधार पर वोट करने की बात कर रही है, वो न सिर्फ शर्मनाक है, अपितु भारतीय लोकतंत्र को भी सीधे तौर पर चुनौती देती है। ताज्जुब की बात ये कि दिन रात लोकतंत्र बचाने की ढपली पीटने वाले सारे महानुभाव शांत हैं। प्रेम और सौहार्द की बात करने वाले बुध्दिजीवियों को वेबसाइट का यह शर्मनाक कृत्य कहीं से भी नफरत नहीं दिख रहा है।

मालूम हो कि एक तरफ जहां विपक्ष पहले से ही मुस्लिमों को बीजेपी के खिलाफ भड़काने में लगा है, तो वहीं दूसरी तरफ यह वेबसाइट विपक्ष के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है, जो सरासर चुनाव अचार संहिता का उल्लंघन है। चुनाव आयोग को स्वतः संज्ञान लेते हुए इस वेबसाइट और इसके मालिकों के खिलाफ धार्मिक आधार पर मुसलमानों को लामबंद करने और अचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप में कठोर दंडात्मक कारवाई करनी चाहिए और वेबसाइट को बंद करना चाहिए।