जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा जिले में एक तीन वर्षीय बच्ची से जुमे के दिन (10 मई) कथित रूप से बलात्कार करने का मामला सामने आया है। मानव और मानवता की धज्जियाँ उड़ाते हुए मोहम्मद ताहिर अशरफ मीर नाम के एक दरिंदे ने एक तीन वर्षीय मासूम को चॉकलेट दिखाकर उसका दुष्कर्म किया है। पुलिस ने एक विशेष जांच टीम बनाकर और मामला दर्ज कर केस की छानबीन शुरू कर दी है।

खबरों के मुताबिक, तीन साल की बच्ची अपने चाचा के साथ मस्जिद में चल रही रमज़ान में इफ़्तार की नमाज के लिए निकली थी। अकीदत के बाद, लड़की मस्जिद से घर की तरफ जाने लगी। जब वह अपने घर के पास पहुंची, तो उसके पड़ोसी ताहिर अशरफ मीर ने उसे चॉकलेट का लालच देकर अपने साथ बुला लिया। लगभग 15 मिनट बाद जब वह फिर से जाने लगा, तो जिस दुकानदार ने उसे चॉकलेट बेचा था, उसने लड़की को उसके साथ नहीं देखा।

देर होने पर बच्ची के माता पिता उसकी खोजबीन के लिए निकले, तो एक महिला ने उन्हें बताया कि सरकारी स्कूल में से एक लड़की के रोने की आवाज आ रही है। मां ने जाकर देखा तो पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची खून से लथपथ मिली। इसके बाद माता पिता बच्ची को लेकर उस दुकानदार के पास पहुंचे। बच्ची ने आरोपी को पहचान लिया और पिता ने तुरंत ताहिर को पुलिस के हवाले कर दिया।

घटना के बाद से एक तरफ जहां राज्य में तनाव की स्थिति बनी हुई है और स्थानीय जनता इंसाफ के लिए फिर एक बार सड़क पर उतरी है, वहीं दूसरी तरफ महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं को अपना एजेंडा चलाने का अवसर मिल गया है। महबूबा मुफ्ती ने घटना की आड़ में शरिया कानून की वकालत करते हुए cialis united health care कहा कि अगर शरिया कानून लागू हो जाएगा तो ऐसे वारदात नहीं होंगे और शरिया कानून के अनुसार, आरोपियों को पत्थर से मारकर मौत की सजा दी जाए।

कश्मीर ऑब्जर्वर के अनुसार, इस्लामिक संगठन मुत्ताहिदा मज़लिस उलेमा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं इसलिए हो रही हैं, क्योंकि कश्मीर में लोग सूफी संतों द्वारा दिखाए गए रास्ते को भूल चुके हैं। पाक परस्त अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने इस घटना को राज्य की विवादित स्थिति से जोड़ दिया।

अंग्रेजी अखबार द एशियन एज के अनुसार, पीड़िता और आरोपी ताहिर, दोनों इस्लाम के दो अलग अलग समुदायों से संबंध रखते हैं। ऐसे में पीड़िता के समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों ने सोमवार को सड़क पर उतरकर न्याय के लिए विरोध प्रदर्शन किया। विरोध कर रहे लोगों का गुस्सा तब बढ़ गया, जब स्थानीय स्कूल “इस्लामिक एजुकेशनल ट्रस्ट” ने 20 वर्ष के आरोपी को नाबालिग घोषित करने के लिए प्रमाणपत्र जारी कर दिया, ताकि आरोपी कम सजा पाकर बच सके।

तख्ती गैंग क्यों है चुप?

गत वर्ष कठुआ कांड के बाद भारत में सिने जगत से लेकर पत्रकारिता तथा अलग अलग क्षेत्रों से जुड़े कई बुध्दिजीवी खुलकर सड़क पर आए थे और उस घटना का विरोध किया था। सिर्फ इतना ही नहीं, बॉलीवुड की बेरोजगार अभिनेत्रियों ने हाथों में तख्ती लेकर उस कुकर्म को ‘देवीस्थान’ से जोड़ दिया और उन्हें हिंदूस्तानी होने पर शर्म आ रही थी। हिंदू विरोधी रूख रखने के लिए जानी जाने वाली वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने द वाशिंगटन पोस्ट में लेख लिखकर ‘हिंदू राष्ट्रवादियों’ पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया था। लेकिन 10 मई को हुए इस जघन्य अपराध के बाद इन बुध्दिजीवियों की चुप्पी बहुत कुछ कहती है।