पूर्वी तट रेलवे (ECoR) के वाल्टएयर (विशाखापत्तनम) रेलवे डिवीजन ने चेन्नई-कोलकाता की मुख्य लाइन के कोट्टावलस-पेंडुरती खंड पर चार घंटे और 30 मिनट के रिकॉर्ड समय मे अंडरपास बनाया। इस तरह के अंडरपास बनाने के लिए मानक समय दो ट्रैक के लिए के लिए छह से आठ घंटे है। हालांकि, वाइलेयर डिवीजन ने इसे कम समय में समाप्त किया, जिसमें चार ट्रैक थे।

बेजोड़ मैनेजमेंट

अपनी सुस्त रफ्तार के लिए प्रसिद्ध भारतीय रेलवे के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। यहाँ सिर्फ 4:30 घंटे में अंडरपास न सिर्फ तैयार कर लिया गया बल्कि उस पर से ट्रेन भी दौड़ा दी गई। यह आश्चर्यजनक जरूर लगता हैं लेकिन ईस्ट कोस्ट रेलवे की विशाखपट्नम डिवीजन के अधिकारियों और इंजीनियर्स ने इसे हकीकत में बदल कर दिखाया।खास बात यह है कि रेलवे के अधिकारियों ने न तो इसके लिए किसी नई तकनीक का इस्तेमाल किया और न ही किसी नए फार्मूला का, बस बेजोड़ मैनेजमेंट से इस काम को संभव किया गया।

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रेलवे की आर्थिक बचत

ईसीओआर के अनुसार, अंडरपास को 2.6 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण किया गया हैं और इसमें 20 प्रीकास्ट कंक्रीट बॉक्स और 15 बेस स्लैब शामिल है।इसके निर्माण में 300 मजदूर शामिल थे जिसमें छः एक्स्कवेटर, तीन क्रेन, पांच टिपर्स, चार हाइड्रा मशीन और दस भारी जैक शामिल थे।

सबसे पहले रेलवे ट्रैक को हटाकर जेसीबी की मदद से मिट्टी काटी गई, फिर पहले से तैयार स्लैब को रखा गया। इसके बाद RCC के बने 6 बॉक्स को रख कर उन पर मिट्टी भर दी गई। उसके बाद सिग्नल को दुरुस्त करके ट्रेन चला दी गई। इतने कम समय में अंडरपास बनाने से ना सिर्फ ट्रेनों को लेट होने से रोका गया बल्कि रेलवे की मोटी आर्थिक बचत भी हुई।

लेकिन अफसोस कि बात हैं किसी मुख्यधारा की मीडिया ने यह उपलब्धि नोटिस नही की, यह समाचार मात्र एक स्थानीय समाचार चैनल V6 ने दिखाया। हमारी मिडिया के लिए इस समाचार का कोई महत्व नहीं है शायद, लेकिन हम तो अपनी रेलवे और इंजीनियर्स पर गर्व करते हुए उन्हें धन्यवाद कह ही सकते है ना?