भारत विश्व की प्रमुख सैनिक ताक़तों में से एक है और सैन्य ताक़त के हिसाब से दुनिया में चौथी रैंकिंग भारत की है। फिर भी उच्च तकनीक के रक्षा उपकरण बनाने में भारत अभी अमेरिका रूस फ्रांस और जापान के पास नहीं पहुँच पाया है। रक्षा उपकरणों की ख़रीद को लेकर भारत अभी तक दूसरे देशों पर निर्भर रहा है। बहरहाल अब परिस्थितियों में बदलाव हो रहा है।

अब दुनिया के बहुत से देश रक्षा उपकरणों को लेकर भारत की तरफ केवल देख ही नहीं रहे बल्कि भारतीय मिसाइलों के लिए एक तरह से दुनिया के कुछ देश लाइन में लग रहे हैं। यूँ तो HAL को तेजस के आर्डर अब मिलने शुरू हो गए हैं पर उन देशों की ख़ास पसन्द है भारत में निर्मित ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलें। 

डिफ़ेंस न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब भारत को भारत-रूस सहयोग से निर्मित ब्रह्मोस (जो कि अब भारत ही में बन रही है) मिसाइल की ख़रीद के प्रस्ताव आसियान (ASEAN Countries : Association of SouthEast Asian Nations) देशों, दक्षिणी अमेरिका उपमहाद्वीप के देश चिली व दक्षिण अफ़्रीका से मिल रहे हैं। आसियान देशों में इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, फ़िलीपींस, वियतनाम, कंबोडिया, ब्रुनेई, बर्मा और लाओस आते हैं। ब्रह्मोस मिसाइल मिसाइल विश्व की अन्य मिसाइलों के मुक़ाबले बहुत कम लागत (300 मिलियन डॉलर) पर बेची जा सकती है। 

ब्रह्मोस की क्षमाताओं की बात करें तो लगभग 5000 किमी/प्रति घंटा की रफ़्तार, ज़मीन, पनडुब्बी, और समुद्री बेड़े से दागे की क्षमता इसमें है। हवा से हवा और हवा से ज़मीन पर मार करने के लिए परीक्षण चल रहे हैं और नतीजों के बहुत क़रीब हैं। क़रीबन 250-350 किमी तक की मारक क्षमता के साथ इतनी कम लागत इसे ख़रीदने योग्य उपयुक्त मिसाइल बनाती है। 

दूसरी तरफ आकाश मिसाइल की बात करें तो कम दूरी पर ज़मीन से हवा में मार करने वाली ये बहुत ही कम दाम पर उपलब्ध मिसाइल है। आकाश की मारक क्षमता 19-24 किमी तक की है जिसमें किसी भी 24000 फ़ुट की ऊँचाई तक उड़ रहे लड़ाकू विमान या फिर दुश्मन की तरफ से दाग़ी गई मिसाइल को हवा ही में नष्ट करने की क्षमता इस मिसाइल में है। आकाश मिसाइल DRDO: Defence Research And Development Organisation द्वारा विकसित की गई है। और देश में इसका निर्माण BDL और BEL द्वारा किया जा रहा है। विकसित होने से अबतक तीन हज़ार आकाश मिसाइलों का निर्माण किया जा चुका है। और 200 मिलियन जैसी कम लागत में इन्हीं क्षमताओं के साथ दुनिया की अन्य मिसाइलों से लगभग दस गुना कम भाव पर ये उपलब्ध है। 

आसियान देशों को छोडकर दक्षिण कोरिया, अल्जीरिया, ग्रीस, मिस्र, और बुल्गारिया ने भी इन मिसाइलों को खरीदने में काफी दिलचस्पी दिखाई है। सरकार के अनुसार भारत ने बहुत हल्के हथियारों को छोडकर किसी भी बड़े रक्षा उपकरण का निर्यात अब तक नहीं किया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार पहले भारत अपनी ज़रूरतें पूरी करेगा उसके बाद हथियारों का निर्यात किया जाएगा। ऐसा करके रक्षा क्षेत्र को लेकर भारत की दुनिया में गहरी पैठ तो बनेगी ही इसके साथ साथ भारत की अर्थव्यवस्था को भी बहुत लाभ होगा और देश सैन्य उपकरणों को लेकर आने वाले वर्षों में स्वावलम्बी हो जाएगा। 

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