कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस और JDS एक मंच पर आए थे लेकिन सरकार बनने के बाद से ही लगातार दोनों ही दलों के बीच तनातनी की खबरें सामने आ रही है। मीडिया खबरों की माने तो अब ये सरकार कुमारस्वामी की गले की फांस बनता जा रहा है। कुमारस्वामी और कांग्रेसी नेताओं के बीच दरार बढ़ने से कुमारस्वामी खुलकर गठबंधन की सरकार नहीं चला पा रहे हैं। खबर हैं कि कांग्रेस के कुछ बड़े नेता उनपर लगातार दबाव बना रहे हैं।

जिसकी पुष्टि इस बार खुद मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने गठबंधन की सरकार में अपनी पीड़ा को व्यक्त करते हुआ किया। दरअसल कुमारस्वामी बेंगलुरू में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित कर रहे थे, इसी दौरान वह भावुक हो गए और रोने लगे। कुमारस्वामी ने कहा गठबंधन की सरकार का क्या दर्द होता है यह मैं जानता हूं।

कांग्रेस और कुमार स्वामी के बीच रार की वजह

कांग्रेस और जेडीएस के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं।जिसमें मंत्री पद के बंटवारों, किसान कर्जमाफी, पेट्रोल-डीजल की कीमत जैसे मामले शामिल हैं।

सरकार में कांग्रेस नेताओं का बढ़ता दखल

खबर हैं कि कुछ दिनों पहले सिद्धारमैया ने एचडी कुमारस्वामी को एक चिट्ठी लिखकर कहा था कि ”अन्न भाग्य स्कीम के तहत गरीबों के लिए प्रति किलो चावल पर 1 रुपए दाम कम करके पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए जाएं।”

वहीं सिद्धारमैया ने कुमारस्वामी को लिखी एक अन्य चिट्ठी में कहा था कि ‘सीएम (कुमारस्वामी) को 34,000 करोड़ रुपए के कृषि ऋण माफी के लिए फंड इकट्ठा करने के लिए चावल की मात्रा प्रति व्यक्ति 7 किलो से 5 किलो नहीं करनी चाहिए।” इससे साफतौर पर देखा जा सकता है कि सरकार को चलाने में कांग्रेस दखलअंदाजी कर रही है। जिससे कुमारस्वामी नाखुश थे।

कुमारस्वामी सार्वजनिक मंच पर रोने लगे

बेंगलुरू में किसानों के कर्ज माफी के बाद लोगों के बीच भाषण देते हुए मुख्यमंत्री कुमारस्वामी स्टेज पर ही रोने लगे और कहने लगे कि  ”अगर मैं चाहूं तो 2 घंटे के भीतर CM पद छोड़ दूँ।”

कुमारस्वामी ने आगे कहा कि आप मेरे लिए हाथ में फूलों का गुलदस्ता लेकर खड़े हैं, बधाई दे रहे हैं कि आपका भाई प्रदेश का मुख्यमंत्री बन गया है, आप सभी लोग खुश हैं, लेकिन मैं खुश नहीं हूं। मैं जानता हूं कि गठबंधन की सरकार का दुख क्या होता है, मैं विषकंठ बन गया हूं और सरकार की पीड़ा को निगल गया हूं। गौरतलब है कि कर्नाटक में किसी भी दल को बहुमत नहीं हासिल हुआ था, जिसके बाद कांग्रेस के साथ मिलकर जेडीएस ने सरकार का गठन किया था।