दिल्ली के चावड़ी बाजार हौज़ काज़ी में स्थित दुर्गा मंदिर में मुस्लिम समुदाय द्वारा की गई तोड़फोड़ ने पूरे देश की अंतरात्मा को हिला दिया था। दिल्ली के दिल में स्थित इस दुर्गा मंदिर को उजाड़ दिया गया था, मूर्तियों को तोड़ दिया गया था, और स्थानीय हिंदुओं के अनुसार, मुस्लिम भीड़ ने मंदिर को अपवित्र करने के लिए मन्दिर में पेशाब तक किया था। सांप्रदायिक तनाव के बाद, कल 9 जुलाई को, विश्व हिंदू परिषद ने मूर्तियों के ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया और स्थानीय लोगों के लिए एक भोज का भी आयोजन किया (भंडारा)।

अब इस भंडारे की एक फोटो जिसमें मुस्लिम हिंदुओं को भोजन परोस रहे है, इसे लेकर लिबरल मीडिया समूह ने हिन्दू मुस्लिम एकता का दावा करते हुऐ लिखा था कि, मुस्लिम समुदाय ने गंगा जमुनी तहजीब का परिचय देते हुए दिल्ली का दिल जीत लिया, हिन्दुओ की शोभायात्रा और दुर्गा मंदिर की पुनः प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय ने भंडारा का आयोजन किया।

हिन्दू संगठनो ने किया था कार्यक्रम का आयोजन

आपको बता दे, मन्दिर में पुनः प्राण प्रतिष्ठा और शोभायात्रा का आयोजन विश्व हिंदू परिषद द्वारा किया गया था और यह भंडारा जिसे मीडिया समूह मुस्लिमो द्वारा आयोजित बता रहा है यह भी विश्व हिंदू परिषद के हिन्दु कार्यकर्ताओ द्वारा आयोजित किया गया था। यह जानकारी हिन्दू कार्यकर्ता अविरल शर्मा ने ट्विटर पर दी।

गौरतलब है कि बिना प्राण प्रतिष्ठा की मूर्ति की पूजा नही की जाती है, प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही यह माना जाता है कि उस मूर्ति में अब भगवान वास कर रहे है। हिंदू एक्टिविस्ट अविरल शर्मा के अनुसार, यह पूरा आयोजन वीएचपी द्वारा आयोजित किया गया था और न केवल हौज़ काज़ी के स्थानीय हिंदुओं बल्कि पूरे दिल्ली के हिंदुओं द्वारा दान किये पैसे से किया गया था, जो दुर्गा मंदिर को मुस्लिमो द्वारा तोड़े जाने से नाराज थे। इसी कार्यक्रम में यह भंडारा भी था जो कि हौज़ काज़ी क्षेत्र के स्थानीय लोगों के लिए वीएचपी द्वारा आयोजित किया गया था।

मीडिया ने भंडारे को मुस्लिमो द्वारा आयोजित बताया

हौज काजी में मां दुर्गा की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान बहुत सारी फ़ोटो और वीडियो सोशल साइट पर वायरल हुई थीं, विशेष रूप से यह एक तस्वीर, जिसे लुटियंस मीडिया ने ‘गंगा जमुनी तहजीब’ की जीवंत उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। यह तस्वीर 2-3 मुस्लिम पुरुषों की है जो अनुष्ठान के दौरान क्षेत्रों के हिंदुओं को भोजन परोस रहे थे।

इस तस्वीर ने लुटियन मीडिया को मंत्रमुग्ध कर दिया गया, और वह इसे ‘गंगा जमुनी तहजीब’ का उदाहरण बना कर पाठकों के सामने परोसने लगे।

हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा मुस्लिमो ने मूर्ति स्थापित करने में सहयोग किया

NDTV ने लिखा ‘शोभायात्रा में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने फूल बरसाये और भंडारे में शामिल होकर लोगों को खाना भी खिलाया’

बीबीसी हिंदी की ट्वीट

लुटियन्स मीडिया के लोग इस फोटो पर बलिहारी नजर आए और इसे शांति और भाई चारे का प्रतीक बताया और यह स्थापित करने का प्रयास किया मुस्लिमो की “अमन कमेटी” ने इस कार्यक्रम में शामिल होकर भाईचारे की नई इबारत लिखी है।

वहाँ मौजूद हिन्दू कार्यकर्ताओ का क्या है कहना?

वही हौज काज़ी में जो हिंदू कार्यकर्ता इस समारोह में उपस्थित थे और इस कार्यक्रम के आयोजन का हिस्सा थे, उन्होंने इन सभी मीडिया रिपोर्ट का स्पष्ट रूप से खंडन किया है।

हिन्दू ऐक्टिवेस्ट अविरल शर्मा जो हौज़ काज़ी में मौजूद थे और इस कार्यक्रम में कार्यकर्ता के तौर पर जुड़े थे उन्होंने ट्विटर पर जानकारी देते हुए कहा कि कार्यक्रम का आयोजन वीएचपी द्वारा किया गया था और इस आयोजन के लिए धन हिंदुओं द्वारा दिए दान से आया था। हौज़ काज़ी के मुसलमानों ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए कोई धनराशि नहीं दी, इसलिये मीडिया की यह रिपोर्ट दुर्गा मंदिर में ‘नई मूर्तियाँ स्थापित करने में मुस्लिमो ने मदद की’ पूरी तरह से झूठ का पुलिंदा है।

हौज काज़ी के मुसलमानों को भंडारे में खाना परोसते हुए वायरल तसवीर के बारे मे अविरल ने कहा कि एक टेबल पर फतेहपुर मस्जिद का इमाम खड़ा था और पानी बांट रहा था। क्षेत्र के हिंदू इन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस मेज पर मुसलमानों को खड़े और भोजन परोसते देखा जा रहा है वह दुर्गा मंदिर के ठीक सामने है और भंडारे का यह स्टॉल विहिप ने ही वहाँ लगाया था।

हौज़ काज़ी में मौजूद एक अन्य हिंदू कार्यकर्ता आयुष गुप्ता ने अविरल द्वारा कही गई बातों को सच बताते हुए कहा कि इस आयोजन में मुसलमानों का कोई योगदान नहीं है।

वहाँ मौजूद VHP के और कार्यकर्ता विशाल शर्मा ने कहा, “मुस्लिम प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भी वहाँ नहीं थे। मीडिया सिर्फ उनके पक्ष को कवर करने गया था ना कि हिंदुओं की दुर्दशा ”।

जबकि अविरल शर्मा ने दावा किया कि अमन कमेटी के सदस्य केवल फोटो-ऑप्स के लिए टेबल पर आए और कुछ तस्वीरों के क्लिक करने के तुरंत बाद गायब हो गए।

No, Muslims neither distributed food nor helped in reinstalling The idols at Lal Kuan

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