एक तरफ केंद्र सरकार मुस्लिम महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में पूरी मजबूती से लड़ रहीं है वहीं दूसरी ओर मौलवी केंद्र सरकार के मंत्री की बहन को धर्म से बेदखल कर रहे हैं।

ताज़ा मामला है बरेली के मुफ़्ती खुर्शीद आलम के विवादित फैसले का। शुक्रवार नमाज़ के बाद फतवा जारी करते हुए मुफ़्ती ने मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बहन फरहात नकवी और आला हजरत की बहू निदा खान को मज़हब से बेदखल कर दिया।

सोमवार को जारी फतवे में कहा गया है कि निदा की मदद करने वाले, उनसे मिलने-जुलने वाले मुसलमानों को भी इस्लाम से खारिज किया जाएगा। निदा अगर बीमार हो जाती हैं तो उनको दवा भी नहीं दी जाएगी। निदा की मौत पर जनाजे की नमाज पढ़ने पर भी रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं निदा के मरने पर उन्‍हें कब्रिस्तान में दफनाने पर भी रोक लगा दी गई है।

वहीं इस मामले में निदा खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पलटवार करते हुए कहा कि फतवा जारी करने वाले पाकिस्तान चले जाएं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान एक लोकतांत्रिक देश है, यहां दो कानून नहीं चलेंगे। उन्होंने कहा कि ये लोग सिर्फ राजनीति चमका रहे हैं। उन्‍होंने सवाल उठाया कि इस्लाम से खारिज करने वाले ये होते कौन हैं, शरीयत पहले वो अपने घर पर जाकर लागू करें फिर आवाम पर लागू करें, क्योंकि उनको शरीयत के नाम पर आवाम को भड़काना आता है। उनके खानदान में पहले से हराम काम हो रहा है। दारुल इफ्ता में मर्दों से पैसे लेकर उनके पक्ष में फैसला दे दिया जाता है, औरतों को इंसाफ नहीं मिलता।

फतवे के खिलाफ निडरता से बोलते हुए निदा खान ने मुफ़्ती से सवाल किया कि वो कहां थे जब महिला को मज़हब के नाम पर हलाला, ट्रिपल तलाक, मुताह जैसी चीज़े झेलनी पड़ रही थीं।

निदा ने कहा कि वो ऐसी धमकियों से बिलकुल डरने वाली नहीं है और अपनी लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि इस्लाम मे लोगों को दबाना और गुनाह को बर्दाश्त करना दोनो ही प्रतिबंधित हैं।

निदा ने कहा कि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का गठन अंग्रेज़ी हुकूमत के वक्त हुआ था और आज़ाद भारत में इसका कोई महत्व नहीं रह जाता।

उन्होंने कहा कि हम इस्लाम को मानते है न कि AIMPLB को। इन लोगो ने वर्षो तक महिला का शोषण किया पर अब समय बदल गया है। हम अपनी बेटियों के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे और किसी को धर्म की ठेकेदारी नहीं करने दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को दबाना एक फैशन हो गया है पर भारत के संविधान ने हमे समानता का अधिकार दिया हुआ है। निदा खान ट्रिपल तलाक की पीड़िता है, आला हजरत परिवार की बहू निदा ने कहा कि उनके ससुराल से उन्हें धमकियां मिल रही है , क्योंकि उनके परिवार पर ट्रिपल तलाक के 13 मुकदमे चल रहे हैं।

निदा खान और मुख्तार अब्बास नकवी की बहन फरहात महिला को न्याय दिलाने के लिए अलग अलग संस्था चलाती हैं। दोनो को इस्लामिक संगठनों की तरफ से दर्जनों धमकियां मिल चुकी हैं।

AIMPLB किस कदर तानाशाही और धर्म की ठेकेदारी करती है आप उसका अंदाज़ा इसी बात से लगा सकते है कि केंद्रीय मंत्री की बहन के खिलाफ तक इन्होंने फतवा जारी कर दिए। सोचिये आम मुस्लिम के साथ फिर ये क्या करते होंगे? समय आ गया है जब सभी बुद्धिजीवियों को बैठकर भारत के संविधान का पालन कराने के लिए प्रयास करना चाहिए और धार्मिक संगठनों पर कानून की चाबुक के जरिये लगाम लगाना चाहिए।