सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक करार देने के बाद भी ऐसे मामलों में कमी नहीं आ रही है। गुरुवार को भी लोकसभा में गरमा-गरम बहस के बीच तीन तलाक बिल दुबारा पारित हुआ। इसी बीच फिर से एक तीन तलाक का मामला सामने आया है।

ताजा मामला उत्तराखंड का है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से सटे उत्तराखंड के सितारगंज के रहने वाले मौलवी सैयद सिराज़ अहमद ने अपनी बहु से संबंध बनाने पर मना करने से अपनी पत्नी को तलाक दे दिया है। इसके 11 बच्चे भी हैं।

दरअसल, सिराज ने 19 साल पहले अपनी पहली पत्नी की मृत्यु के बाद बरेली के बहेड़ी की अर्जुमंद ज़ाफरी से दूसरा निकाह किया था। सिराज ने दूसरा विवाह पहली पत्नी से जन्म लिए बच्चों को बिना बताए किया। पहली पत्नी से उसके 8 तथा दूसरी पत्नी से उसके 3 बच्चे हुए। बताया जाता है कि सिराज़ के विवाहेत्तर संबंधों के कारण परिवार में हमेशा लड़ाई झगड़ा होता था।

इसी बीच उसने अपनी एक बहु से शारिरीक संबंध बना लिया। घरवालों को यह बात मालूम पड़ने के बाद हंगामा शुरू हो गया। इसके बाद सिराज़ ने अपनी दूसरी पत्नी को भी ‘तलाक़-तलाक़-तलाक़’ बोलकर घर से बाहर कर दिया। मामला सामने आने के बाद मुस्लिम महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली निदा खान ने अर्जुमंद को थाने में ले जाकर मुकदमा दर्ज करवाई। उन्होंने कहा कि वह तीन तलाक पीड़िताओं की हर संभव सहायता करेंगी, क्योंकि वह खूद भी एक तीन तलाक पीड़ित हैं।

पीड़िता अर्जुमंद ज़ाफरी ने बताया, ” सिराज़ पहले से शादीशुदा था। यह बता उसने मेरे परिजनों से छिपाई थी। फिर भी मैंने उसके पहली पत्नी के बच्चों को सगी मां का प्यार दिया। निकाह के कुछ वर्षों बाद मुझे पता चला कि इसके दूसरी किसी महिला से संबंध हैं। इसी से हमारे बीच अनबन होने लगी। कुछ समय पहले बड़े बेटे का भी निकाह हो गया। फिर सिराज़ ने बड़े बेटे की पत्नी से भी संबंध बना लिए। जब मैंने इसका विरोध किया तो उसने मुझे बुरी तरह पीटा और तीन तलाक बोलकर घर से बाहर निकाल दिया।”

तीन तलाक बिल पर छिड़ा है घमासान!

गुरुवार को लोकसभा में विपक्षी दलों के भारी हंगामे के बीच तीन तलाक बिल पास तो हो गया, लेकिन अब सरकार के आगे अहम समस्या यह है कि राज्यसभा में यह बिल कैसे पास होगा? क्योंकि वहाँ तो बीजेपी के पास बहुमत नहीं है। विपक्षी दलों का कहना है कि मुस्लिम मर्दों को प्रताड़ित करने के लिए यह बिल लाया जा रहा है। वहीं, तमाम मौलानाओं का भी कहना है कि जब शौहर जेल चला जाएगा, तो बेगम का खर्च कौन चलाएगा? जब न्यायालय ने इसे असंवैधानिक करार दिया है तो फिर कानून की कोई आवश्यकता ही नहीं है।

ताज्जुब की बात है कि आज इन आरोपियों को सजा दिलाने के लिए कानून बन रहा है, तो कांग्रेस सहित विपक्षी दलों और तीन तलाक की आड़ में हलाला की दुकान चलाने वाले मौलानाओं को मुस्लिम महिलाओं के खर्च की फिक्र हो रही है। लेकिन ये फिक्र उस समय कहां थी, जब ‘तलाक-तलाक-तलाक’ बोलकर औरतों को घर से बाहर कर दिया जाता था? तब उनका खर्च कौन चलाता था? क्या इस बिल का विरोध करने वाले इन सारे सवालों का जवाब देंगे?

गौरतलब है कि 22 अगस्त, 2017 को सर्वोच्च अदालत की पांच जजों की पीठ ने 3-2 की बहुमत से ‘तलाक-ए-बिद्दत’ को असंवैधानिक करार दिया था। लेकिन आश्चर्य की बात है कि न्यायालय के इस फैसले के बाद सितंबर 2018 तक कुल 430 तीन तलाक के मामले सामने आ चुके हैं। अब इस बिल का विरोध करने वाले बताएंगे कि इन औरतों का खर्च कौन देखेगा? क्या इसे वे तलाक मानेंगे? अवश्य मानेंगे। क्योंकि उन्हें बस अपनी हलाला की दुकान चलाने से मतलब है, ना कि मुस्लिम महिलाओं को उनका हक़ दिलाने से।

Report By: @ShivangTiwari_