राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में किसानो के लिए कर्ज माफ़ी की घोषणा की थी, लेकिन राजस्थान के आदिवासी जिले डुंगरपुर में जिन किसानो ने कर्ज नहीं लिया है उनका नाम भी कर्ज माफ़ी की सूची में पाया गया है। माना जा रहा है की यह कोई बड़ा घोटाला हो सकता हैं और जरूरतमंद किसानो को कर्ज माफ़ी के लाभ से वंचित रहना पड़ सकता है।

लोगो का कहना है कि लोनमाफी में ऐसा फर्जीवाडा चल रहा है इसकी जानकारी उन्हें तब हुई जब लाभार्थियों की यह सूची ऑनलाइन हुई। जरुरतमंदो का पैसा लूट लिया गया है और किसी ओर को दिया जा रहा है, कर्ज माफ़ी सिर्फ कुछ गिने चुने किसानो और कांग्रेस समर्थकों को ही मिली है। लोगो का कहना है कि, अशोक गहलोत सरकार ने वादा किया था की चुनाव के तुरंत बाद कर्जमाफी मिल जाएगी वो वादा गहलोत सरकार अभी तक पुरा नहीं कर पाई है।

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कर्ज-माफी की इस सूची में सिर्फ डुंगरपुर जिले से कम से कम 1700 लोग ऐसे है जिन्होंने कभी कर्ज लिया ही नहीं है। अगर पुरे राजस्थान की बात की जाए तो यह संख्या काफी बड़ी होगी। हालांकि इसमें किसी प्रकार की तकनीकी भूल की सम्भावनाये भी हो सकती है लेकिन ऐसा है नहीं। मीडिया हाउस टाइम्स नाऊ ने इस मामले में अपने सूत्रों से पूरी जांच पड़ताल करवाई है और संबंधित अधिकारियो ने भी इस बात की पुष्टि की है।

डुंगरपुर जिले में सागवाडा तहसील के गमडा गाँव में मिनी को-ओपरेटिव बेंक के अधिकारियो ने उन लोगो को भी कर्ज माफ़ी की सूची में रखा है जिन्होंने कभी कोई कर्ज लिया ही नहीं। गहलोत सरकार को यह देखना होगा की लोगो की मेहनत की कमाई जिसे वे कर्ज माफ़ी के तौर पर किसानो को दे रहे है वह अनुचित हाथो में न जाये।
किसानो की कर्ज माफ़ी के मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए राहुल गाँधी 9 जनवरी को जयपुर आने वाले है। पूरी सम्भावना यह भी हो सकती है की कांग्रेस  के कुछ नेता इस घोटाले में शामिल हो क्योंकि उन्हें पहले से ही कर्ज माफ़ी के बारे में पूरी जानकारी थी।

स्थानीय लोगो ने SDM को इस विषय में लिखित शिकायत दी है और इस मामले की जांच करने की मांग रखी है। हालांकि राज्य सरकार ने इस विषय में एक बैठक बुलाई थी लेकिन चिंता का विषय यह है की कर्ज माफ़ी के लिए करीब 18000 करोड़ की ज़रूरत है और राजस्थान सरकार के पास इतनी बड़ी राशि उपलब्ध नहीं है। बहरहाल अशोक गहलोत के तीसरे कार्यकाल का यह पहला घोटाला माना जा रहा है।

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