पिछले कुछ दिनों से सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है, जिसमे दावा किया जा रहा है कि देश में सरकार के रवैए से किसानों को उनके फसल का अच्छा दाम नहीं मिल रहा है और वे आत्महत्या करने पर मजबूर हैं। इस तस्वीर में लहसुन दिखाया जा रहा है। हालांकि, देखने में यह प्याज की बोरी लग रही है।

24 दिसंबर को ट्विटर पर ‘उजियारे लाल दोहरे’ नाम के यूजर ने इन बोरियों कि फोटो शेयर करते हुए लिखा, “मैंने 1500 किलोग्राम लहसुन सिर्फ 3000 रुपये में बेच दिया। माल भाड़े के अलावा मेरे पास सिर्फ 2000 रुपये बचे। उत्पादन का कुल खर्च 40 हजार रुपये था। मैं यह नुकसान झेल सकता हूं, उन गरीब किसानों के बारे में सोचिए जिनके पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं। भारतीय किसानों की यही किस्मत है।”

इसके बाद 25 दिसंबर को ‘एन्थनी सलदान्हा’ नाम के यूजर ने राहुल गांधी के आधिकारिक हैंडल से किए गए ट्वीट पर ठीक इसी तस्वीर के साथ ऊपर वाला कैप्शन ही लिखा। यही नहीं, इन्होंने यह भी लिखा “मोदी, बीजेपी और किसानों के बारे में बात करें।”

26 दिसंबर को ‘आदिल मंसूरी’ नाम के यूजर ने भी पहले वाले कैप्शन के साथ इसी तस्वीर को शेयर किया।

इसके बाद बहुत लोगों ने भी एक ही कैप्शन के साथ यह तस्वीर शेयर किया और जी भरकर केंद्र सरकार को कोसा।

पड़ताल में क्या पता चला?

जब हमने सबसे पहले वाले यूजर @ujiyareD का नाम ‘उजियारे लाल दोहरे’ गूगल पर सर्च किया। सर्च करने पर हमे पता चला का यह शख्स ‘आम आदमी पार्टी’ का नेता है और 2014 के लोकसभा चुनाव में
इटावा सीट से चुनाव भी लड़ चुका है। ‘आप’ के यह नेता मूलरूप से औरैया जिले के रहने वाले हैं और इनके पास खेती वाली जमीन भी ज्यादे है।

यही नहीं, ट्विटर हैंडल उन्हीं का है या किसी और का, यह जानने के लिए हमने दोहरे से भी संपर्क किया। दोहरे ने बताया कि यह ट्विटर हैंडल उन्हीं का है और इटावा में उन्होंने 1500 किग्रा. लहसुन बेचा है। लोकसभा चुनाव में दोहरे ने अपनी ₹9,280,2808 की संपत्ति भी घोषित की थी।

बाकी दो ट्विटर हैंडल्स के बॉयो से पता चला कि एक USA और दूसरा इंदौर का रहने वाला हैं। इन दोनों ने दोहरे के ट्वीट को कॉपी-पेस्ट किया था।

लहशून का दाम क्या है इटावा में?

हमने इटावा के भरथना बाजार (जिस बाजार में दोहरे ने लहसुन बेचा था) में लहसुन का दाम पता किया। यहाँ 22 से 27 दिसंबर के बीच लहसुन की न्यूनतम ₹1100 और अधिकतम ₹1200 प्रति क्विंटल थी। यानी न्यूनतम कीमत भी दोहरे द्वारा ट्वीट करके बताए गए कीमत से 5 गुना से (ट्वीट में ₹200 प्रति क्विंटल बताया गया है) भी ज्यादा थी।

हमें जांच में जो सबसे महत्वपूर्ण बात पता चली, वो ये कि ये लहसुन इटावा के बाजार की नहीं, बल्कि कनाडा के बाजार की है। इससे साफ पता चलता है कि ऐसे लोगों को सिर्फ सरकार के कामों पर प्रश्नचिन्ह लगाने से मतलब है। भले ही इसके लिए फर्जी तथ्यों का ही सहारा क्यों न लेना पड़े।

Report By: @ShivangTiwari_