कल पांच राज्यों में चुनावी परिणाम आने वाले हैं। अगर यह परिणाम मनमुताबिक नही आये तो सबसे ज्यादा सवालों के घेरें में होगी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) , इसके लिए कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने पहले से ही भूमिका तैयार कर ली हैं। उनके कुछ नेताओं ने मीडिया में  EVM को लेकर बयानबाजी करके अपना स्टैंड क्लियर कर दिया हैं अगर वह हारे तो ठीकरा कहाँ फोड़ना हैं।

लेकिन हम आपको यहाँ समझायेंगे की क्या हैं चुनावी प्रकिया और कितनी ईवीएम मशीने कितनी टेम्परप्रूफ होती हैं। हालांकि अपनी हार का दोष EVM को सिर्फ केजरीवाल या कांग्रेस ही नही देते हैं, बीजेपी भी ईवीएम पर सवाल उठा चुकी हैं। 2009 के चुनावों में भाजपा की करारी हार के बाद भाजपा ने भी EVM पर सवाल खड़े किए थे किंतु तब यही सारे राजनैतिक दल साथ नही आये थे तथा भाजपा को भी चुनाव आयोग की दलीलें सही लगी थी अतः भाजपा ने यह बात आगे नही बढ़ाई थी।

चुनाव प्रक्रिया

चुनाव आयोग ने प्रत्येक प्रत्याशी के लिए पोलिंग एजेंट का प्रावधान किया है। जो प्रत्याशी का खुद का चुना व्यक्ति होता है, और उससे अपेक्षा की जाती है कि प्रेसाइडिंग अफसर के सहयोग से वह पूरी सुगमता व बिना त्रुटि के मतदान सुनिश्चित करवाये। ये ज़बानी नही होता , हर कदम पर कागज़ होते हैं। पहले पढ़िए इस तस्वीर में की पोलिंग एजेंट की ज़िम्मेदारी क्या होती है।

Duties of polling Agent

चार बिंदु अपने में विस्तृत हैं और पोलिंग एजेंट यदि कोई गड़बड़ी देखे तो किसी समय भी अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। हर राजनीतिक दल के पोलिंग एजेंट से अपेक्षा की जाती है कि वे पोलिंग एजेंट हैंडबुक को ध्यान से पढ़ें व चुनाव आयोग के हर प्रशिक्षण में उपस्थित रहें व मॉक पोल में भाग लें।

चुनाव आयोग ने इसका भी पूरा ख्याल रखा है कि चुनाव हारने के बाद कोई उनपर उंगली न उठाए। ये वाला फॉरमैट सुबह पोलिंग शुरू होने से पहले भरते हैं। मशीन चेक कर के और इस पर पार्टी के अधिकृत पोलिंग एजेंट हस्ताक्षर करते हैं।

Election Process

अगर आप ध्यान से देखें तो पायेंगे कि अगर किसी पोलिंग एजेंट को गड़बड़ लगती है तो वो इस फॉरमेट को साइन करने से मना भी कर सकता है। लेकिन अगर साइन किया तो इसका मतलब सब ठीक है।

मतदान के दौरान का किसी और कारण से यदि वोटिंग मशीन बदली जाती है तो उसका उल्लेख भी होता है और इसको भी जांच कर पोलिंग एजेंट सहमति देकर साइन करते हैं। आपत्ति होने पर हस्ताक्षर करने से मना भी कर सकते हैं।

जो मॉक पोल करवाया जाता है उसका ये सर्टिफिकेट है, इसे भी प्रेसाइडिंग अफसर व पोलिंग एजेंट साइन करते हैं। सब कुछ ध्यान से जांच कर लेने के बाद, जब पोलिंग हो जाती है तो इसमें भी सभी के हस्ताक्षर लिए जाते हैं  और किसी प्रकार की भी आपात्ति दर्ज कराई जा सकती है।

इसके बाद कड़ी सुरक्षा में इन मशीन को स्ट्रांग रूम में ले जा कर रखा जाता है जिसके ताले पर राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि भी सील लगा सकते हैं। यहां भी कोई आपत्ति होने पर बता सकते हैं। वोटों की गिनती तक कड़ी सुरक्षा व निगरानी में EVM को रखा जाता है, उम्मीद हैं इतने सबूतों के बाद आपको चुनाव प्रक्रिया अच्छे से समझ आ गयी होगी और हाँ हर राजनैतिक दल को हर समय पूरी स्वतंत्रता होती है किसी प्रकार की भी आपत्ति दर्ज कराने की। अब इतनी सारी प्रक्रियाओं में कोई भी पार्टी अगर चूँ तक न करे, कुछ भी न कहे और जब नतीजे अपने विरुद्ध आएँ तो EVM को दोष दे तो इसको क्या कहेंगे। विशेषकर कोई ऐसी पार्टी ऐसा कहे जो 70 साल सत्ता में थी तो और अज़ीब लगता है।

EVM मशीन क्यों नही हो सकती हैक

हैकिंग सॉफ्टवेयर के साथ किया जाने वाला करतब है न ही हार्डवेयर के साथ ,EVM एक कैलकुलेटर की तरह मशीन है .जो किसी भी नेटवर्क से नहीं जुड़ी हुई होती, कहने का तात्पर्य अगर आपको चुनाव प्रभावित करना है तो आपको एक एक EVM की मदर बोर्ड की प्रोग्रामिंग को बदलना पड़ेगा।

चुनाव आयोग की साख

125 करोड़ का देश, जिसमे 82 करोड़ वोटर, एक लोक सभा, 29 राज्यो के विधानसभा, और हज़ारों  नगर निकाय चुनाव करवाना कोई हँसी खेल नहीं होता। भारतीय चुनाव आयोग की साख पूरी दुनिया में है, आये दिन दुनिया के कई मुल्क चुनाव आयोग के अधिकारियों को अपने देश में चुनाव सुधार को लेकर सेमिनार में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित करते है। लीबिया ,नामीबिया  ब्राज़ील जैसे देशों ने चुनाव आयोग से बकायदा MOU कर रखा हैं अपने देश मे चुनाव करवाने को लेकर, चुनाव आयोग स्वयं भी समय समय पर सेमिनार आयोजित कर दुनिया भर के मुल्कों को चुनाव सुधार से जुड़ी जानकारियों  से अवगत कराता रहा  हैं। दुनिया के अग्रणी देश रूस तक मे भारत निर्मित EVM का प्रयोग किया जाता हैं। पूरे विश्व मे जिस चुनाव आयोग की साख हैं, उस पर अपने देश के ही राजनैतिक दलों द्वारा हमले किया जाना चुनाव आयोग पर प्रश्नचिन्ह तो खड़ा करता ही हैं और देश की छवि भी धूमिल होती हैं।

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