जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान पर नकेल कसने में जुटे भारत ने 72 साल बाद एक और बड़ा फैसला किया है। केंद्र की मोदी सरकार ने शत्रु संपत्तियों के सार्वजनिक उपयोग की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद इन संपत्तियों का उपयोग आम आदमी कर सकेगा। अभी तक इन संपत्तियों को आम आदमी उपयोग नहीं कर पाता था।

किसे कहते है शत्रु संपत्ति
बंटवारे के बाद पाकिस्तान में जा बसे लोगों और 1962 के युद्ध के बाद चीन चले गए लोगों की भारत में स्थित संपत्ति को शत्रु संपत्ति कहा जाता है। 1968 में संसद द्वारा पारित शत्रु संपत्ति अधिनियम के बाद इन संपत्तियों पर भारत संरकार का कब्जा हो गया था। तब से इन संपत्तियों की देखभाल गृह मंत्रालय कर रहा था। देश के कई राज्यों में शत्रु संपत्ति फैली हुई है। लंबे समय से कई संगठन इन संपत्तियों के सार्वजनिक इस्तेमाल की मांग कर रहे थे। केंद्र सरकार ने अब जाकर इन संपत्तियों के सार्वजनिक इस्तेमाल की अनुमति दी है। 2017 में सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम में बदलाव कर इन लोगों का संपत्ति से अधिकार खत्म कर दिया था।

भारत में 1 लाख करोड़ की हैं शत्रु संपत्ति
गृह मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 1 लाख करोड़ रुपए की शत्रु संपत्ति है। इनकी संख्या 9400 के करीब है। इसके अलावा तीन हजार करोड़ रुपए के शत्रु शेयर भी भारत सरकार के पास हैं। इन संपत्तियों में से सबसे ज्यादा 4991 उत्तर प्रदेश, 2735 पश्चिम बंगाल और 487 संपत्ति दिल्ली में स्थित हैं। इसके अलावा भारत छोड़कर चीन जाने वालों की 57 संपत्ति मेघालय, 29 पश्चिम बंगाल और 7 आसाम में स्थित हैं। केंद्र सरकार लंबे समय से इन संपत्तियों को बेचने की कोशिश कर रही है।

इसके अलावा, देश में करीब तीन हजार करोड़ रुपए मूल्य के शत्रु शेयर हैं। पिछले साल केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 996 कंपनियों में करीब 20 हजार लोगों के 6 करोड़ से ज्यादा शत्रु शेयर हैं। यह शेयर 588 सक्रिय, 139 सूचीबद्ध और बाकी गैरसूचीबद्ध कंपनियों में हैं। केंद्र सरकार ने इन शेयरों को बेचने के लिए पिछले महीने एक कमेटी का भी गठन किया था। यह कंपनी इन शेयरों की बिक्री का मूल्य निर्धारण का कार्य करेगी।