अगस्त 2017 के उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हुए ऑक्सीजन कांड में कथित आरोपी डॉ. कफील खान को मिले क्लीनचिट पर राज्य सरकार के प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दूबे ने कहा कि कफील खान को कोई क्लीनचिट नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि मीडिया में एवं सोशल मीडिया पर जांच रिपोर्ट्स के निष्कर्ष की स्वैच्छिक व भ्रामक खबरें प्रसारित की जा रही हैं।

बता दें कि अगस्त 2017 में गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के कारण कई मासूमों की जान चली गई थी, जिसमे बाल रोग विभाग के प्रवक्ता डॉ. कफील खान को लापरवाही करने के आरोप निलंबित कर उनके खिलाफ जांच बैठाई गयी थी। लगभग एक साल तक चली जांच प्रक्रिया में कुछ मामलों में उन्हें क्लीनचिट मिल गयी और इलाहाबाद उच्च न्यायालय से भी उन्हें जमानत मिल गयी।

कुछ मामलों में क्लीनचिट मिलने के बाद सोशल मीडिया पर एक धड़ा डॉ. कफील के समर्थन में गलत खबरें फैलाकर उन्हें निर्दोष साबित करने लगा और राज्य सरकार पर मुस्लिम होने की वजह से कारवाई करने का आरोप लगाया गया। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दूबे ने विभिन्न मीडिया संस्थानों एवं सोशल मीडिया में डॉ. कफील द्वारा खुद को जांच में दोषमुक्त बताए जाने के दावों को खारिज कर दिया है।

उन्होंने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में घटी घटना के बाद प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पल डॉ. कफील के विरुद्ध चार मामलों में विभागीय कारवाई की संस्तुति की गई थी और उन्हें दो में क्लीनचिट मिली है तथा दो मामलों में उनके के खिलाफ जांच के लिए शासन की तरफ से संस्तुति नहीं की गई है। डॉ. कफील पर सरकारी सेवा में सीनियर रेजीडेन्ट व नियमित प्रवक्ता के सरकारी पद पर रहते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस करने व निजी नर्सिंग होम का संचालन करने का आरोप साबित हो गया है, जिस पर आगे की कारवाई के लिए निर्णय लिया जाना बाकी है।

प्रमुख सचिव ने कहा कि निलंबन अवधि के दौरान डॉ. कफील ने 22 सितंबर 2018 को तीन-चार बाहरी व्यक्तियों के साथ जिला चिकित्सालय बहराइच के बाल रोग विभाग में जबरन प्रवेश कर मरीजों का उपचार करने का प्रयास किया गया, जिससे चिकित्सालय में अफरा-तफरी का माहौल बना। डॉ. कफील खान ने सरकारी सेवक के रूप में किया गया। यह कृत्य और मीडिया में प्रसारित की गई भ्रामक जानकारियां अत्यन्त गंभीर कदाचार की श्रेणी में आती हैं। इस कारण उन पर एक और विभागीय कार्रवाई संस्तुति की गई है, जिनमें उनके ऊपर अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार, कर्तव्य पालन में घोर लापरवाही करना शामिल है।

बता दें कि डॉ. कफील खान सरकारी सेवा के साथ साथ गोरखपुर के रुस्तमपुर में निजी नर्सिंग होम मेडिस्प्रिंग हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर, रुस्तमपुर, गोरखपुर में प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे थे।