बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष द्वारा राम जन्मभूमि का ऐतिहासिक नक्शा फाड़ने से नाराज हिंदू महासभा और हिंदू सेना ने सीजेआई और ‘बॉर काउंसिल ऑफ इंडिया’ से मुस्लिम पक्ष के वकील के खिलाफ अनुशासनात्मक कारवाई की मांग की है। हिंदू महासभा के वकील ने सेवानिवृत्त आईपीएस कुणाल किशोर द्वारा लिखित ‘अयोध्या रिविजिटेड’ नाम एक किताब पेश किया था।

बता दें कि बुधवार (16 अक्टूबर) को अयोध्या के राम जन्मभूमि विवाद का आखिरी दिन था। सुनवाई के दौरान हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह हिंदू पक्ष की तरफ से दलीलें रख रहे थे। जिरह के दौरान उन्होंने रामजन्मभूमि का एक ऐतिहासिक नक्शा पेश किया, जो 1810 में एक अंग्रेज इतिहासकार ने बनाया था। इस नक्शे के अनुसार, अयोध्या में विवादित ढांचे के तीनों गुंबद के नीचे राम मंदिर होने की बात साबित होती है। यह नक्शा एक ब्रिटिश लाइब्रेरी में संरक्षित था, जिसे हिंदू महासभा ने विशेष आग्रह कर निकलवाया था।

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने अपने पास रखे इस नक्शे को ये कहते हुए फाड़ दिया कि ये किताब एक नये सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है, जो मूल सबूत का हिस्सा नहीं है। राजीव धवन के इस हरकत से सीजेआई खासा नाराज हो गए और गुस्से में उन्होंने विवाद खत्म करने के लिए कहा राजीव धवन से कहा कि अगर वे चाहें तो नक्शे को फाड़ सकते हैं। सीजेआई ने आगे कहा कि अगर ऐसे ही सुनवाई चलती रही, तो वो तुरंत उठकर चले जाएंगे। मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर यह नक्शा हिंदू महासभा की तरफ से राजीव धवन और सुनवाई कर रही पीठ के पांचों न्यायाधीशों को देखने के लिए दिया गया था।

हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीपी जोशी ने कहा, “राजीव धवन ने यह नक्शा फाड़कर बहुत बड़ा अनैतिक कृत्य किया है, जिससे सुप्रीम कोर्ट बार में विवाद पैदा हो गया है। हम ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ से मांग करते हैं कि धवन के खिलाफ अतिशीघ्र उचित और कड़ी कारवाई की जाए। उन्होंने 100 करोड़ से ज्यादा हिंदुओं का अपमान किया है और धार्मिक भावनाएं आहत की हैं।” रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष रामविलास वेदांती ने कहा कि फैसला आने के बाद भावनाएँ आहत करने को लेकर वो राजीव धवन के खिलाफ केस दर्ज कराएंगे।