आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपने कॉल सेंटर के जरिये दिल्ली के नागरिकों को फोन करके बता रही थी कि मतदाता सूची से आपका नाम नाम काट दिया गया है। जिसकी लोगो ने दिल्ली पुलिस से शिकायत की थी। जिसकी वजह से इस मामले में दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी द्वारा हायर किए गए कॉल सेंटर से जुड़े कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया था।

हमेशा की तरह आम आदमी पार्टी ने दिल्ली पुलिस की इस कारवाई को बीजेपी से प्रेरित बताया और संजय सिंह समेत कई नेता पुलिस थाने में धरने पर बैठ गए। हालांकि यह मामला सोशल मीडिया पर कई महीने से वायरल है, और जिन लोगो को भी इस तरह का फोन जा रहा है वह इसकी सोशल मीडिया और पुलिस दोनो जगह कर रहे है।

अब इस मामले में कपिल मिश्रा भी कूद पड़े है और दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। अपनी शिकायत में कपिल मिश्रा ने कहा है, ‘दिल्ली में पिछले कई दिनों से जनता के पास वोटर आईडी से संबंधित फेक फोन कॉल आ रही थी जिसके संबंध में कई लोगों ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी।’

आज जब चुनाव आयोग की शिकायत पर पुलिस ने कार्यवाही शुरू की तब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तुरंत उस कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश शुरू कर दी। मुख्यमंत्री ने ट्विटर के माध्यम से अपने विधायकों व कार्यकर्ताओं को थाने पहुंचने का निर्देश दिया, जिसके तुरंत बाद राज्यसभा सांसद संजय सिंह, कई विधायक व AAP के घोषित उम्मीदवार राघव चड्ढा सनलाइट थाने पहुंच गए।’

‘ये सीधे सीधे पुलिस जांच प्रभावित करने, पद का दुरुपयोग करने व जनता की भावनाओ को झूठ बोलकर भड़काने का मामला हैं। मुख्यमंत्री लगातार ट्विटर और भाषणों के माध्यमों से हिंदू मुसलमान व जातिसूचक शब्दों से लगातार चुनाव प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।’

‘आपसे निवेदन हैं कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मामला दर्ज करके तुरंत कार्यवाही की जाएं। दिल्ली में शांतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पर कार्यवाही आवश्यक हैं।’

मतदाता सूची से नाम कटने पर अरविंद केजरीवाल दिल्ली बीजेपी नेता विजेन्द्र गुप्ता से भी भिड़ चुके हैं, जो आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। अरविंद केजरीवाल के इस दावे को फर्जी बताते हुए बीजेपी ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से भी किया था।

इस मामले में पहले भी कुछ पीड़ित नागरिकों ने आम आदमी पार्टी के कॉल सेंटर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई हुई है। विश्वासनीय सूत्रों के अनुसार नागरिकों के फोन नम्बर की लिस्ट दिल्ली के सरकारी स्कूलो और बिजली विभाग से इकठ्ठी की गई है। जो प्रथम दृष्टया प्राइवेसी के मौलिक अधिकार का हनन बनता हैं।

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