पुरानी दिल्ली में हौज़ काज़ी के लाल कुआं इलाके के स्थित दुर्गा मंदिर में मुसलमानों द्वारा की गई देवी प्रतिमाओं की तोड़फोड़ और दंगों के बाद हिन्दू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने 9 जुलाई की सुबह मन्दिर की पुनः प्राण प्रतिष्ठा की। प्राण प्रतिष्ठा से पहले इलाके में कड़ी पुलिस सुरक्षा में एक शोभा यात्रा भी निकाली गई जिसके लिए इलाके में खास तैयारी की गई थी।

माँ  की प्रतिमा की पुनर्स्थापना के लिए दुर्गा मंदिर में जोरदार तैयारी की गई थी। मंदिर को अच्छी तरह से सजाया-संवारा गया था। साथ ही सुरक्षा के भी सख्त इंतजाम किए गए थे। बिगड़े माहौल को देखते हुए मंदिर के अंदर और बाहर पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों की तैनाती की गई थी।

शोभायात्रा में नही आये स्थानीय विधायक इमरान हुसैन
मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा से पहले एक शोभा यात्रा भी निकाली गई। ये शोभा यात्रा चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन से दुर्गा मंदिर तक निकाली गई। इस मौके पर बेहद हैरानी भरी बात यह थी की साम्प्रदायिक सौहार्द की बात करने वाले स्थानीय विधायक और केजरीवाल सरकार में मंत्री इमरान हुसैन नही नजर आए।

आपको बता दें की इमरान हुसैन पर मन्दिर तोड़ने वाली जेहादी भीड़ में शामिल होने और उन्हें उकसाने का भी आरोप लग चुका हैं। इस संदर्भ की वीडियो कई मीडिया हाउस ने भी जारी की है और कुछ चश्मदीद गवाह भी सामने आए है जिन्होंने इमरान हुसैन को जेहादी भीड़ को मन्दिर तोड़ने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।

इन वीडियो और समाचारों पर इमरान हुसैन ने सफाई देते हुए कहा था कि वह उस रात वहाँ दोनो सम्प्रदायों के बीच शांति स्थापित कराने के लिए मौजूद थे।

ऐसे में यह हैरान कर देने वाली बात है कि दंगो की रात इमरान हुसैन मन्दिर तोड़ने वाली बेकाबू भीड़ को साम्प्रदायिक सौहार्द की शिक्षा देने के लिए मौजूद थे लेकिन जब उसी मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम रखा गया तो गायब थे। जबकि उन्हें इस मौके पर होना चाहिए था इससे जनता के बीच साम्प्रदायिक सौहार्द का अच्छा सन्देश जाता।

गौरतलब है कि लिबरल मीडिया हौजकाजी इलाके में मुस्लिमो द्वारा चलाये जा रहे भंडारे की फ़ोटो और खबरे लगातार शेयर कर रही है, ताकि गंगा-जमुनी तहजीब की दुहाई दी जा सके, लेकिन इन सबके बीच स्थानीय विधायक इमरान हुसैन के गायब होने पर कोई सवाल नही उठा रही। बहरहाल लिबरल मीडिया गिरोहों की यह पुरानी बीमारी है कि वह हमेशा महत्वपूर्ण सवाल भूल जाती है। जैसे शोभायात्रा के दौरान मुस्लिमो द्वारा दिए भंडारा की फ़ोटो शेयर करते यह महत्वपूर्ण तथ्य भुल गयी कि अगर उस इलाके में इतना भाईचारा रहा होता तो क्या मन्दिर में मूर्तियों को तोड़ने जैसा घृणित कृत्य किया जाता? क्या एक भंडारे से हिन्दुओ का यह दर्द और अपमान कम हो जाएगा जो उस रात मुस्लिमो की भीड़ जेहादी नारे लगाते हुए मन्दिर को अपवित्र कर रही थी?

 

बहरहाल, मंदिर में तोड़फोड़ के मामले में पुलिस अब तक सात मुस्लिमो को गिरफ्तार कर चुकी है और आठ नाबालिगों को पकड़ा है। और गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि संदिग्धों की तलाश जारी है। पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के कर्मी अब भी इलाके में तैनात हैं और मंगलवार को शुद्धीकरण के दौरान भी तैनात रहे।

बता दें कि बीते 30 जून की रात एक मामूली विवाद के बाद मुस्लिम समुदाय के 400 से 500 लोगो ने मंदिर परिसर में जबरदस्त हंगामा किया था और तोड़फोड़ की थी जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव पैदा हो गया था। हालांकि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी के कारण हंगामा तुरंत थम गया। घटना के दो दिन बाद मंदिर में दोबारा पूजा अर्चना शुरू कर दी गई थी और अब कल मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई।

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