दिल्ली: भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने गुरूवार (11 जुलाई) को उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात कर उन्हें सरकारी जमीन पर बने 54 मस्जिदों और कब्रिस्तानों की सूची सौपी जो सरकारी जमीनों पर बने हुए है। प्रवेश वर्मा ने पिछले महीने भी बैजल को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सरकारी जमीनों, सड़क किनारे तथा खाली स्थानों पर मस्जिदों और कब्रिस्तानों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने इस संबंध में तुरंत कार्रवाई की मांग की थी। इस मुद्दे को उजागर करने के लिए उन्हें फोन पर एसएमएस भेजकर और सोशल मीडिया के जरिए जान से मारने की धमकियाँ भी दी जा चुकी हैं।

उपराज्यपाल अनिल बैजल को दी चिट्ठी में पश्चिम दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा ने बताया कि उन्होंने निजी तौर ऐसे इलाकों का मुआयना किया है जहां दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी), ग्राम सभा, बाढ़ विभाग, डीडीए, नगर निगमों की जमीनों पर कब्रिस्तान और मस्जिदें बनाई गई हैं। ये जमीनें पार्क, सार्वजनिक शौचालय आदि सामुदायिक सुविधाओं के लिए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे सर्वेक्षण में पश्चिमी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र और दिल्ली के अन्य हिस्सों में सरकारी जमीनों पर मस्जिदों और कब्रिस्तानों के अतिक्रमण के 54 मामलों की पहचान हुई है।’’

अवैध कब्जे की पहली लिस्ट
अवैध बनी मस्जिद कब्रिस्तान की दूसरी लिस्ट

सांसद प्रवेश वर्मा के मुताबिक, “जब चुनावों का वक्त आता है तो मस्जिद, कब्रिस्तान जैसे स्ट्रक्चर बनने शुरू हो जाते हैं। मुझे केवल उन जमीनों पर आपत्ति है, जो सरकारी हैं। कुल 54 ऐसी जगह हैं, जिन पर मस्जिद और कब्रिस्तान बने हैं। जिन मस्जिदों की लिस्ट उपराज्यपाल को दी गई है, वो दिल्ली के 4 लोकसभा क्षेत्रों में हैं। बाकी लोकसभा क्षेत्रों में भी ऐसी जमीनें चिन्हित की जा रही हैं।”

सांसद प्रवेश वर्मा ने कहा कि मस्जिदों के अवैध तरीके से बढ़ते निर्माण की जाँच होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने एलजी से एक कमिटी गठित करने की माँग की है। प्रवेश वर्मा ने कहा है कि इस कमिटी में एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, एनडीएमसी, पुलिस, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए और वो चाहते हैं कि इस मामले की जाँच इलाके के डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट करें।

सांसद प्रवेश वर्मा द्वारा उपराज्यपाल को दिये पत्र की कॉपी

सांसद वर्मा के आरोपो पर उपराज्यपाल ने भी पुरे मामले पर जांच का उन्हें भरोसा दिलाया है। दूसरी तरफ सांसद के आरोपो का संज्ञान लेकर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने भी उनके दावे की जांच करने के लिए एक तथ्यान्वेषण समिति गठित कर दी है। सामाजिक कार्यकर्ता औवेस सुल्तान खान की अध्यक्षता वाली पांच सदस्य समिति अपना सर्वेक्षण कर रही है। हालांकि अल्पसंख्यक आयोग की यह जांच महज खानापूर्ति ही साबित होगी। यह जांच उच्च स्तर के सरकारी अधिकारियों के द्वारा कराई जानी चाहिये।