2019 का लोकसभा चुनाव नजदीक देख मीडिया के एक धड़े में बेचैनी शुरू हो गई है। पत्रकारों ने अपना एजेंडा चलाने के लिए सनातन धर्म और एक जाति विशेष के खिलाफ जहर फैलाना शुरू कर दिया है।

इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राहुल कंवल ने ट्वीट करके अपने दर्शकों को सूचना दी कि गोरखनाथ मंदिर सहित देश के बड़े मंदिरों में दलितों के जाने की मनाही है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, “गोरखपुर के गोरखनाथ धाम समेत भारत के कुछ बड़े मंदिरों में दलितों के प्रवेश पर मनाही, देखिए पुजारी कैसे करते हैं SC समुदाय से बुरा व्यवहार”

राहुल कंवल के इस झूठ को बेनकाब करने के लिए हमे गौरव कुमार जो गोरखपुर से हैं उन्होंने गोरक्षनाथ मंदिर में कार्यरत दलित कर्माचारियों और पूजा करने जाने वाले दलित श्रद्धालुओं से बातचीत की वीडियो भेजी। बातचीत में इन लोगों ने बताया कि हम लोग इस मंदिर में सालों से काम कर रहे हैं और ऐसी कोई समस्या नहीं आई कि जाति के आधार पर किसी को रोका जाता हो। दलित श्रद्धालुओं और कर्मचारियों ने बातचीत में क्या कहा, नीचे सुनिए-

इस संदर्भ में गोरखपुर के रहने वाले यूपी भाजपा के प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि “गोरखनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी कमलनाथ जी ही दलित हैं, भंडारे के कु़ल 12 रसोइयों में 7 दलित हैं, गोरक्षपीठ के देवीपाटन मंदिर के मुख्यपुजारी महंथ मिथिलेश जी भी दलित हैं, गोरक्षपीठ दशकों से दलितों आदिवासियों के कल्याणार्थ वनवासी कल्याण आश्रम चलवाने के साथ ही सहभोज कराती है।”

शलभमणि त्रिपाठी ने आगे ट्वीट करके बताया

गोरक्षनाथ पीठाधीश्वर, क्षेत्र के पूर्व सांसद एवं वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर वर्ष दीवाली के दिन वनटांगिया समुदाय के बच्चों के बीच मिठाई, पटाखे, कपड़े आदि लेकर 1998 से ही जाते रहे हैं और जाते भी हैं। आदित्यनाथ के गुरु ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी ने ही वनटांगिया एवं भारतीय थारू जनजाति के लोगों के लिए विद्यालय और अस्पताल खोलने का काम किया।

सरकार बनाने के बाद सीएम योगी ने सबसे पहले गोरखपुर पहुंचकर 102 अनुसूचित जाति के लोगों के साथ जमीन पर सामूहिक भोजन किया था।

गोरखपुर में निषाद जाति के लोग भी भारी संख्या में हैं। यहाँ के लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों में हार जीत यही लोग तय करते हैं। निषाद जाति के लोग गोरक्षपीठ के पक्के अनुयायी हैं। आपको गोरक्षनाथ मंदिर में निषाद लोग काम करते भारी संख्या में मिल जाएंगे। यही कारण था कि योगी आदित्यनाथ 1998 से 2017 तक और उसके पहले उनके गुरु ब्रहमलीन महंत अवैद्यनाथ लगातार कई वर्ष तक गोरखपुर के सांसद रहे। इसी साल मार्च में हुए गोरखपुर लोकसभा के उपचुनाव में मंदिर के व्यक्ति को टिकट न मिलने पर भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़।

दलित ही नहीं मुस्लिम भी करते हैं देखभाल

गोरक्षनाथ मंदिर में सिर्फ दलित ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी सालों से काम कर रहे हैं और उन्हें कभी भी धर्म के आधार पर प्रताड़ना नहीं मिली। मंदिर प्रांगण में दुकानें हैं, जिनमे मुस्लिमों की दुकानें भी हैं, जो प्रसाद बेचते हैं। मंदिर की गौशालाओं की देखभाल ज्यादातर दलित और मुस्लिम समुदाय के लोग ही करते हैं।

मीडिया द्वारा ध्रुवीकरण करने की कोशिश

जब मंदिर में कार्यरत एवं रोजाना दर्शन कर रहे दलित वर्ग के लोगों का कहना है कि उनसे कभी जाति नहीं पूछी गयी, तो फिर इंडिया टुडे के पत्रकार राहुल कंवल ने किस आधार पर स्टिंग ऑपरेशन किया है कि गोरक्षनाथ मंदिर में दलितों के प्रवेश पर रोक है? इंडिया टुडे के रिपोर्टर्स को कहाँ से इस बात का स्रोत मिला? आम दलितों से इस संबंध में बात करके तो यही लगता है कि मीडिया द्वारा बीजेपी शासित राज्यों को निशाने पर लेने के लिए जानबूझकर ऐसी बिना सिर-पैर की खबरें चलाई जा रही हैं, जिनका कोई आधार नहीं है। इंडिया टुडे द्वारा किया गया स्टिंग ऑपरेशन पूरी तरह से फिक्स्ड है। एक वर्ग विशेष के लोगों को बदनाम करने के लिए पहले से ही कुछ गिने चुने दलितों को बहला फुसलाकर स्टिंग ऑपरेशन किया गया है।

दरअसल, कुछ पत्रकारों का बस एक ही काम है- दिन-रात बीजेपी तथा सवर्णों को किसी न किसी बात को लेकर गाली देना। भले ही वो फर्जी खबर हो। लेकिन अपना एजेंडा चलाने के लिए वे ऐसा करते रहते हैं। इनका हाल भूखे भेड़ियों की तरह हो गया है, जो मनमाफिक भोजन न मिलने पर बेचैन हो जाते हैं।

वैसे अब इंडिया टुडे के इस स्टिंग ऑपरेशन का पर्दाफाश हो चुका है और यह पता चल चुका है कि यह सुनियोजित स्टिंग है, जो बिल्कुल निराधार है। राहुल कंवल पूरी तरह एक्सपोज हो चुके हैं। अब सवाल यह है कि क्या सच सामने आने के बाद राहुल कंवल और इंडिया टुडे के मुखिया अपनी इस गलती के लिए सार्वजनिक रूप से बाबा गोरक्षनाथ के भक्तों के साथ साथ पूरे देश से माफी मांगेंगे?

Report By: @ShivangTiwari_

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