पिछले पौने पांच वर्षों से राजनीतिक दलों ने भाषा की मर्यादा को इस स्तर तक पहुंचाया है, जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है। चाहें वो सत्ता पक्ष हो या विपक्ष। दोनों तरफ से एक दूसरे पर जमकर अमर्यादित और व्यक्तिगत ओछी टिप्पणियां की गई हैं। आरोप प्रत्यारोप के इस दौर में नेताओं ने एक दूसरे के माता-पिता, बेटी-बहन को भी नहीं छोड़ा।

बहरहाल, राजनेताओं के अनुसार, ये उनकी अभिव्यक्ति की आजादी है और लोकतंत्र में वो कुछ भी बोल सकते हैं। लेकिन विपक्ष तो इस स्तर तक चला गया कि उसने प्रधानमंत्री पद की गरिमा का भी ख्याल नहीं रखा। बीते सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए विपक्ष खासकर कांग्रेस की तरफ से ऐसी भाषा का प्रयोग किया गया है, जिसने पीएम पद की गरिमा को भी तार तार कर दिया है। आज इंडिया टीवी के डिबेट शो ‘वंदे मातरम् इंडिया’ में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जिस शब्द का प्रयोग किया, वो अगर कोई भी आम व्यक्ति सुनेगा, तो उसे निश्चित ही गुस्सा आएगा। पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना खूंखार और वांछित आतंकवादियों ‘मसूद अजहर’, ‘ओसामा’, ‘दाऊद इब्राहिम’ और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ‘ISI’ से कर डाली। सामने बैठी जनता के भारी विरोध के बाद पवन खेड़ा कहने लगे कि पीएम मोदी सवाल पूछने पर इन सब के पीछे छिप जाते हैं। हालांकि, वो अपने द्वारा कही गई बात पर अड़े रहे कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा है।

लेकिन इन सब के बावजूद भी कांग्रेस हमेशा यही कहती रही है कि उनके नेताओं ने पीएम पद को अपशब्द नहीं कहे हैं, बल्कि नरेंद्र मोदी को कहे हैं। चलिए ये मान लेते हैं कि आपने पीएम पद को नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी को कहा। तो इस समय प्रधानमंत्री के पद पर कौन बैठा है? जो व्यक्ति प्रधानमंत्री के पद पर आसीन है, क्या वो स्वयं उस पर आसीन हुआ या उसको जनता ने बैठाया है? वो व्यक्ति, सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर 136 करोड़ भारतीयों, जिसमे कांग्रेस भी है, का प्रतिनिधि है। क्या अपने देश के प्रतिनिधि के लिए ऐसी निचले स्तर की भाषा का प्रयोग करना उचित है? राजनीति में आरोप प्रत्यारोप चलता रहता है। अगर आपको बीजेपी या किसी अन्य दल से मतभेद-मनभेद हैं और आपको उनकी नीति अच्छी नहीं लगती है, तो आप अपने विरोधी को तथ्यों एवं आंकड़ों के साथ गलत साबित करेंगे या सीधा सीधा प्रधानमंत्री को ही गाली देंगे?

ये पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस के किसी नेता ने प्रधानमंत्री को गाली दी हो या अपशब्द कहा हो। कुछ दिन पहले पार्टी की स्टार प्रचारक एवं पूर्व सांसद ‘विजया शांति’ ने तेलंगाना के शमशाबाद में पीएम मोदी को आतंकी जैसा दिखने वाला बताया था। आश्चर्य की बात ये कि उन्होंने यह बात पार्टी मुखिया राहुल गांधी की मौजूदगी में कही और राहुल ने इस पर कोई आपत्ति भी नहीं जताई।

आखिरआपत्ति जताते भी कैसे और क्यों? वो स्वयं सार्वजनिक सभा में पीएम को ‘चोर’, ‘डरपोक’, ‘नरेंद्र मोदी आंख नहीं मिला पाता है’, ‘नरेंद्र मोदी भाग गया’ जैसे निचले स्तर के वाक्यों का प्रयोग कर चुके हैं। अगर आप इंटरनेट खंगालें, तो आप पाएंगे कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी के साथ साथ पार्टी के वरिष्ठ एवं पूर्व में केंद्रीय मंत्री रह चुके नेताओं ने अत्यंत घटिया शब्दों का प्रयोग किया है।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देश फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन ने भारत की तरफ से खूंखार आतंकवादी मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक साझा प्रस्ताव लाए थे। जिस पर चीन ने पाकिस्तान का साथ देते हुए ‘वीटो पॉवर’ लगा दिया था, जिसकी वजह से अजहर अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित नहीं हो पाया। मालूम हो कि चीन, सुरक्षा परिषद के उन पांच सदस्यों में शामिल है, जिनके पास ‘वीटो पॉवर’ है और अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा परिषद में किसी प्रस्ताव पर इन पांच में से कोई भी एक देश वीटो का प्रयोग कर दे, तो वो प्रस्ताव पारित नहीं हो पाता है।

इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक मीम बनाकर अपने ही देश के प्रधानमंत्री का अपमान किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीचा दिखाने की कोशिश की।

इसी तरह जब पीएम मोदी वर्ष 2015 में अमेरिका गये थे तो फेसबुक के मुख्यालय में शामिल हुए थे, जहां फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के एक सवाल पर प्रधानमंत्री अपनी मां को याद करते हुए रो पड़े थे। इसके बाद पूर्व केंद्रीय वाणिज्य मंत्री एवं कांग्रेस के सांसद आनंद शर्मा ने पीएम मोदी के इस आंसू को ‘घड़ियाली आंसू’ बताया था।

क्यों कांग्रेस बार बार करती है पीएम का अपमान?

अब सवाल ये है कि कांग्रेस बार बार क्यों प्रधानमंत्री मोदी का अपमान करती है? क्या नरेंद्र मोदी कांग्रेस पार्टी के प्रधानमंत्री नहीं हैं? कांग्रेस के नेता बार बार कहते हैं कि सरकार को घेरने के लिए उनके पास मुद्दों की कमी नहीं है, फिर भी वे बार बार प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत हमला क्यों बोलते हैं? आप बार बार हर टीवी डिबेट में या रैली में किसी पर व्यक्तिगत हमला क्यों बोलते हैं? आप दंभ भरते हैं कि देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री कांग्रेस पार्टी ने दिए हैं, फिर भी आप प्रधानमंत्री पद का सम्मान नहीं करते! अगर आप सच में जनता की आवाज बनना चाहते हैं और अपने विरोधियों को परास्त करना चाहते हैं, तो आपको तथ्यों और आंकडों को जनता के सामने प्रस्तुत करना होगा, जो जनता समझ सके। इस तरह आप प्रधानमंत्री पर ओछी टिप्पणी कर सत्ता पर काबिज नहीं हो सकते। एक पढ़ा लिखा आम आदमी सरकार को घेरने के लिए तमाम तरह के मुद्दे गिना सकता है, लेकिन अफसोस कि इन मुद्दों को कांग्रेस जानबूझकर नहीं उठाती है और बार बार अभद्र टिप्पणी करती रहती है, जो आगामी आम चुनाव में उसके लिए ‘सेल्फ गोल’ साबित हो सकता है।

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