पीएम नरेंद्र मोदी की नीतियों के विरोध का स्तर एक बार फिर गिरा है। फिर एक बार राजनीति अपने निचले स्तर पर पहुंची है। इस बार आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में तेलुगु देशम पार्टी के पोस्टरों ने विवाद खड़ा किया है।

एन. चंद्रबाबू नायडू आज दिल्ली में एपी भवन में आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ एक दिवसीय अनशन पर बैठे हैं। उनके अनशन के दौरान पार्टी कार्यकर्ता पोस्टर लहरा रहे हैं, जिसमे लिखा है, “जिसके हाथ में चाय का कप देना चाहिए था, जनता ने उसके हाथ में देश दे दिया।”

ऐसा करना सरासर जनादेश का अपमान है। केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करते करते विपक्ष दल इस कदर गिर चुके हैं कि वो मोदी विरोध में किसी हद तक जा रहे हैं।

हालांकि, टीडीपी सांसद जयदेव गल्ला ने इन पोस्टरों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम इसका समर्थन नहीं करते हैं। यह सही नहीं है और यह नहीं किया जाना चाहिए। इसे हमारी पार्टी के लोगों ने नहीं डाला होगा।”

चंद्रबाबू नायडू 12 फरवरी को भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को एक ज्ञापन भी सौंपेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू की केंद्र सरकार के खिलाफ एक दिन की भूख हड़ताल में शामिल हुए हैं।

हालांकि, विपक्षी पार्टियों का की ये आदत बहुत पुरानी है। जब उनके किसी नेता के बयान या पोस्टर पर पर विवाद बढ़ता है, तो वे उसे नेता की व्यक्तिगत राय बताकर कन्नी काट लेते हैं या कह देते हैं कि वो कार्यकर्ता उनकी पार्टी का नहीं है। लेकिन पीछे के दरवाजे से ऐसे नेताओं का खूब समर्थन किया जाता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ‘मणिशंकर अय्यर’ हैं। दिसंबर 2017 में उन्होंने पीएम मोदी के लिए अपमानजनक शब्द का प्रयोग किया था, जिसके बाद दिखावे के लिए राहुल गांधी ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था, लेकिन चुनाव बीतते ही उन्हें वापस पार्टी में शामिल कर लिया गया।

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