“ईलू” की कहानी पढ़कर आपको कभी हँसाना आएगा और कभी रोना आएगा। किताब एक फिल्म की तरह आपके सामने से गुजरती जाती है। किताब को फिल्मों की तरह ही “थ्री एक्ट स्ट्रक्चर” के हिसाब से लिखा गया है। जिसमें पहले एक्ट में हमें सभी किरदारों के बारे में पता चलता है। जिसमें ईलू, चीनो और मार्लो प्रमुख हैं।

किताब के दूसरे एक्ट में हम पढ़ते हैं कि किस तरह ईलू के लापता होने के बाद चीनो और मार्लो उसे ढूंढने के लिए दर बदर भटकते हैं। और तीसरे एक्ट में हम ईलू और चीनो के प्यार और साहस की कहानी को करीब से देखतें हैं।

किताब का अंत दिलचस्प है और कमल उपाध्याय ने इस बात का क्लू भी दिया है कि श्रृंखला की अगली किताब में ईलू की माँ टीनू का जिक्र विस्तार से होगा।

मार्लो के किरदार का चयन बहुत अच्छा लगा। कमल उपाध्याय ने किताब को एक स्क्रीन प्ले की तरह लिखा है इसलिए जगह की बनावट और किरदारों का हुलिया पढ़नेवाले के ऊपर छोड़ दिया गया है। अगली किताब में लेखक को इसका ध्यान देना चाहिए।

आप किताब अमेज़ॉन से प्राप्त कर सकतें हैं।