लगभग 70 वर्ष से खींचे चले रहे रामजन्मभूमि विवाद मामले में एक नया और बहुत बड़ा खुलासा हुआ है।आपने हमेशा मुस्लिम पक्षकारों या बड़े और स्वघोषित सेक्यूलर मुस्लिमों के मुंह से यह अवश्य सुना होगा कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का जो भी निर्णय होगा, वो कबूल कर लेंगे।

लेकिन इंडिया टुडे के रिपोर्टर ने अयोध्या विवाद के पक्षकारों का स्टिंग ऑपरेशन किया, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने आजतक के खुफिया कैमरे में यह बात कबूली कि 1992 में उन्होंने ही गोली और बम चलवाए थे। उन्होंने धमकी भी दी कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला खिलाफ आया तो वो नहीं मानेंगे और मंदिर नहीं बनने देंगे।

रिपोर्टर- अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आपके खिलाफ आए तो क्या आप मानेंगे?

हाजी महबूब- आज भी अगर मस्जिद मसले में अगर जजमेंट आ जाए तो क्या आप जानते हैं मियां, क्या आप वहां एक ईंट रख सकते हैं? मैंने तो चैलेंज भी किया था, मैंने कहा कि जब तक जिंदा हूं एक ईंट रख कर बताएं।

रिपोर्टर- जजमेंट के बाद भी?

हाजी महबूब- हां, हां, रख के बताएं.. इंशाअल्लाह मैं जिंदा हूं जब तक। साफ बात मैं कहता हूं, मैं तो बोलता हूं कि मेरी जिंदगी में वो एक ईंट भी नहीं रख सकते।

रिपोर्टर- चाहे सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट ही क्यों न हो?

हाजी महबूब- चाहे सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट हो या चाहे जहन्नुम में जजमेंट हो। वो मेरी जिन्दगी में ईंट नहीं रख सकते।

रिपोर्टर- आप कह रहे हैं कि हिंदूओं को राम मंदिर की एक भी ईंट नहीं लगाने देंगे।

हाजी महबूब- बिल्कुल नहीं लगाने दूंगा। आप मुसलमान हैं, इसलिए मैं आपसे कह रहा हूं। और कोई रहता तो मैं कहता कि कोर्ट के जजमेंट के बाद देखा जाएगा। यकीन मानिए, कोई भी मुसलमान अपने खिलाफ जजमेंट बर्दाश्त नहीं कर सकता।

रिपोर्टर- तो दंगे होंगे देश में?

हाजी महबूब- दंगे होंगे.. होना ही है। इसमे कोई दो राय नहीं है..

रिपोर्टर- 1992 में बम चलवाए थे आपने?

हाजी महबूब- बिल्कुल चलवाए थे। ख़ुदा के करम से यहां की प्रशासन भी डरती है मुझसे।

हाजी महबूब ने यह भी बताया कि केस लड़ने के लिए ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ के पास खाड़ी देशों जैसे लीबिया, ईरान से पैसे आते हैं।

इसके आगे रिपोर्टर ने दूसरे मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी से इस मामले पर सवाल किए। इकबाल ने भी खुफिया कैमरे के सामने कबूल किया उन्हें समाजवादी पार्टी का संरक्षण प्राप्त है। आगे उन्होंने भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला ना मानने की बात कही और इशारों इशारों में ही कुछ गलत करने की चेतावनी भी दे डाली।

बता दें कि राम मंदिर की सुनवाई 29 जनवरी को होने वाली थी, लेकिन पांच जजों की पीठ में से एक जज के अनुपस्थित होने के कारण मामले को आगे के लिए टाल दिया गया। खैर, इस स्टिंग ऑपरेशन को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को सतर्कता बरतनी चाहिए और हाजी महबूब जैसे दूसरे मुस्लिम पक्षकारों पर भी अपनी पैनी नजर बनाए रखनी चाहिए।

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