साल 2014 में पश्चिम बंगाल के बर्दमान में हुए बम धमाकों का आरोपी अब्दुल मतीन पुलिस के हत्थे चढ गया है। पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ और केरल पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर इस आतंकी को केरल के मल्लपुरम से गिरफ्तार किया है।

असम का रहने वाला अब्दुर जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश से संबंध रखता है। 2 अक्टूबर, 2014 को बर्धमान में बम धमाके में कई लोगों की जानें गई थीं। पुलिस के मुताबिक, अब्दुल धमाकों के बाद से ही संदिग्ध था और मस्जिद में इमाम बनकर रहता था।

बता दें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने घटना के संबंध में जुलाई 2016 में 30 लोगों के खिलाफ आरोप दर्ज किए थे। पुलिस का कहना है कि मतीन इडावन्ना के नजदीक मंजेरी में स्थानीय मस्जिद में इमाम के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस अधिकारी प्रथीश कुमार ने बताया कि बंगाल और केरल की संयुक्त पुलिस टीम को इडावन्ना के मंजरी इलाके में मतीन के होने की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। संयुक्त प्रयासों के कारण मस्जिद के पास एक घर से उसकी गिरफ्तारी हुई।

ममता बनर्जी ने ‘रॉ’ पर लगाए थे आरोप?

2 अक्टूबर, 2014 को हुई इस घटना को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ पर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि ये सब रॉ ने किया है। उन्होंने कहा था कि वो केंद्र में 23 साल तक एक नेता के रूप में काम की हैं और उन्हें पता है कि ऐसा कौन करा सकता है। अगर आप यहां ध्यान दें, तो आपको पाकिस्तान और ममता बनर्जी की बातों में थोड़ा सा अंतर भी दिखाई नहीं पड़ेगा। पाकिस्तान में भी कोई बम विस्फोट होता है, तो वहां की सरकार और सेना भी रॉ पर आरोप लगाते हैं। इससे बड़ा शर्मनाक और क्या हो सकता है? बनर्जी ने अगर भाजपा पर इल्जाम लगाया होता, तो समझ में आता कि शायद उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए उन्होंने यह आरोप लगाया है, लेकिन मोदी विरोध में देश की सबसे कामयाब एजेंसी का विरोध करना, कहां तक उचित है? इससे क्या हासिल होगा? खैर, अब जब अब्दुल पकड़ा गया है, तो ममता बनर्जी देश से ना सही, लेकिन क्या अपने राज्य के लोगों से सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करेंगी? उन्हें अवश्य अतिशीघ्र माफी मांगनी चाहिए। अन्यथा आगामी लोकसभा चुनाव में इसका बहुत बड़ा असर पड़ सकता है और इसका फायदा राज्य में बीजेपी को व्यापक स्तर पर होगा।