महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रविवार को दो मुस्लिम लड़को आमेर शेख और नासिर शेख ने यह शिकायत दर्ज करवाई थी कि, उनसे ‘जय श्रीराम’ के जबरन नारे लगवाये गए और उनसे मारपीट की गई। शिकायत दर्ज कराने के एक दिन बाद ही आमेर ने अपना बयान से पलट गया। उसने अपना बयान वापस लेते हुए कहा कि उसने अपने समुदाय के सदस्यों के बीच अपना कद बढ़ाने और उससे झगड़ा करने वाले लोगों को सबक सिखाने के लिए मनगढ़ंत कहानी के आधर पर पुलिस से शिकायत की। जिसके बाद मुस्लिम सुमदाय के लोगों ने जमकर हंगामा किया।

बता दें, औरंगाबाद शहर में 3 दिनों के अंदर ही जबरन ‘जय श्री राम’ के नारे लगवाने की यह दूसरी झूठी घटना सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि मीडिया का एक वर्ग इन झूठी शिकायतो को तुरन्त हाथो-हाथ लेकर इसे प्रमोट करने लगता है, और जब यह शिकायत झूठी पाई जाती है तो इस पर कोई समाचार प्रकाशित नही करता। गौरतलब हैं कि अब तक इस तरह के सारी घटनाएं झूठी साबित हुई हैं, ऐसे में मीडिया को अब तो सावधान हो जाना चाहिए।

लोकमत समाचार में प्रकाशित स्टोरी

बहरहाल, यह घटना रविवार 21 जुलाई की हैं। कटकट गेट निवासी शेख आमेर अपने दोस्त आमेर के साथ जोमैटो कंपनी में डिलीवरी बॉय का काम करता है और दोनों रात तकरीबन साढ़े 10 बजे मोटरसाइकिल से आजाद चौक से बजरंग चौक की तरफ जा रहे थे कि तभी वहाँ के एक निजी दवाखाने के सामने से एक कार अचानक से मुड़ गई। इसी बात को लेकर आमेर और उसके दोस्त की कार में बैठे लोगों से मामूली सा विवाद हो गया।

जिसके बाद आमेर ने उन लोगों को सबक सिखाने का सोचा और कुछ ही दिन पहले शहर के हुडको कॉर्नर पर घटा घटना को याद करते हुए उसने जय श्री राम न बोलने पर पिटाई की झूठी कहानी बनाई और पुलिस में शिकायत कर दी। यह खबर शहर में फैलते ही बड़ी तादाद में एक समुदाय के लोग शहर के आजाद चौक में जमा हो गए और नारेबाजी की जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

मराठी अखबार सकाल में प्रकाशित खबर

बता दें, आमेर की शिकायत पर पुलिस ने जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, वो इंजीनियरिंग के छात्र हैं। पुलिस ने उनकी कार को भी जब्त कर लिया है और उन पर धारा 153A, धारा 295A और धारा 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि, गिरफ्तार किए गए सभी चार लोगों ने ये स्वीकार किया था कि उनका आमेर और उसके दोस्त के साथ मोड़ पर झगड़ा हुआ था, मगर उन्होंने इस बात से इनकार किया था कि उन लोगों ने उन दोनों से ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने के लिए कहा था।

इसके पहले औरंगाबाद में ही मदीना होटल में काम करने वाले इमरान इस्माइल ने भी जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने का झूठा आरोप कुछ लोगो पर लगाया था। जो पुलिस जांच में झूठा साबित हुआ और जिस चश्मदीद गवाह गणेश ने इस्माईल को पीटने से बचाया था उसने गवाही दी कि मारपीट आपसी रंजिश का नतीजा थी। इमरान जबरन ‘जय श्री राम’ का नारा लगवाने का झूठा आरोप लगा रहा हैं।

महाराष्ट्र: इमरान की आपसी रंजिश में हुई पिटाई, ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए नही किया था मजबूर

अब ऐसे में सवाल यह उठता हैं कि ये कब तक चलेगा? मामूली विवाद को साम्प्रदायिक रंग देने वाले कब तक नजरअंदाज किये जायेंगे। पुलिस ऐसे झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नही कर रही हैं? इन झूठे आरोपो की वजह से दिल्ली में मुस्लिमो ने 100 साल पुराने दुर्गा मंदिर को तोड़ दिया। बेहद मुश्किल के बाद दिल्ली में साम्प्रदायिक तनाव खत्म हुआ था। अगर पुलिस ने ऐसे झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नही की तो किसी दिन इन झूठे आरोपो की वजह से कोई शहर साम्प्रदायिक दंगो की भेंट चढ़ जाएगा।