लड़ाकू विमान राफेल सौदे पर सरकार और विपक्ष के बीच जारी घमासान थमने का नहीं ले रहा है। मंगलवार को एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक ईमेल दिखाते हुए कहा कि डील से पहले अनिल अंबानी फ्रांस के मंत्री से मिले थे। राहुल ने पीएम मोदी को अंबानी का बिचौलिया भी बताया।

उन्होंने कहा, “अनिल अंबानी को पहले से पता था कि उन्हें राफेल सौदा मिलने वाला है। प्रधानमंत्री ने जो किया वह देशद्रोह और सरकारी गोपनीयता कानून का उल्लंघन है।” उन्होंने आगे कहा, “पहले ये भ्रष्टाचार का मामला था, लेकिन अब ऑफिशियल सीक्रेट के उल्लंघन का मामला बन गया है, इसलिए इस पर कारवाई शुरू हो जानी चाहिए।”

ईमेल दिखाते हुए राहुल ने कहा, “एक ई-मेल है जिसमें लिखा है कि राफेल डील होने से पहले अनिल अंबानी फ्रांस के रक्षा मंत्री से मिले। इस बैठक में अनिल अंबानी ने कहा कि मोदी फ्रांस के दौरे पर आने वाले हैं और एक एमओयू साइन होने वाला है यानि राफेल डील होने वाला है। सवाल उठता है कि राफेल डील के बारे में रक्षा मंत्री को नहीं मालूम है, विदेश सचिव को नहीं मालूम है, लेकिन अनिल अंबानी को मालूम है?”

राहुल गांधी ने कहा, “प्रधानमंत्री सभी विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच करवानी हो करवा लें। लेकिन राफेल डील की भी जांच हो। आप क्यों नहीं जांच करा रहे हैं? जेपीसी जांच करा दी जाए। एक ही बात है कि वह इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं। इसलिए प्रधानमंत्री जेपीसी जांच नहीं करा रहे हैं।” उन्होंने CAG का पूरा नाम “चौकीदार ऑडिटर जनरल” बता दिया।

आपको बता दें कि राफेल लड़ाकू विमान की पूरी कहानी वर्ष 2007 में शुरू हुई। वायुसेना के प्रस्ताव पर तत्कालीन यूपीए सरकार ने 126 विमानों को खरीदने का टेंडर जारी किया। इसके बाद मुकेश अंबानी की RATL और फ्रांस की Dassault के बीच बातचीत हुई और ज्वाइंट वेंचर बनाने पर सहमति बन गई। 2014 तक विमान के खरीद को मंजूरी देने की प्रक्रिया चलती रही, लेकिन यूपीए शासनकाल के दौरान इस सौदे को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। 2014 में मोदी सरकार आने बाद दुबारा इसे खरीदने का टेंडर जारी किया गया। राहुल गांधी का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अनिल अंबानी की कंपनी को इसका ठेका दिया है, जिसने कभी जहाज नहीं बनाई।

इस डील की बात 2007 से चल रही है और उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। जब इसका टेंडर जारी किया गया, तो देश के हर नागरिक को पता था कि सरकार ने 126 विमान खरीदने के लिए टेंडर जारी किए हैं और 2008 में मुकेश अंबानी की रिलायंस तथा डसॉल्ट के बीच और दोनों सरकरों के बीच समझौता भी हुआ। ऐसे में अगर कोई जानकारी लीक होती है, तो ये क्यों ना समझा जाए कि जानकारी कांग्रेस ने ही लीक की थी।

वर्तमान सरकार के दौरान प्रक्रिया पूरी होने के बाद से लगातार कांग्रेस अध्यक्ष सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। नवंबर 2018 में कांग्रेस के सहयोगियों ने ही इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली, जिसपर कोर्ट ने फैसला देते हुए भ्रष्टाचार की बात से इंकार कर दिया। हालांकि, इसके बाद कांग्रेस बार बार कहती रही कि उसने यह याचिका नहीं डाली, वो सिर्फ जेपीसी की मांग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह बोफोर्स के खिलाफ आवाज़ उठा कर 1989 में प्रधान मंत्री बने थे। राहुल गांधी भी यही सोच रहे हैं कि वो राफेल के खिलाफ आवाज़ उठाकर वैसा ही जनसमर्थन हासिल कर दिल्ली की गद्दी तक का रास्ता तय कर लेंगे। पर उनको ये बात समझनी होगी कि बोफोर्स सौदे में घोटाले की बात कोर्ट में साबित हुई थी, पर राफेल के घोटाले से सुप्रीम कोर्ट पहले ही इनकार कर चुका है और अब कैग की रिपोर्ट भी यही दर्शा रही है।

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