कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने की कोशिश कर रहे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को एक बार फिर से निराशा हाथ लगी है। इमरान खान ने मंगलवार को कहा कि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रवैए से वो बेहद निराश हैं।

दरअसल, इमरान खान संयुक्त राष्ट्र आमसभा की 74वीं बैठक सहित कई सम्मेलनों में शामिल होने के लिए इन दिनों अमेरिका में हैं। बार बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेईज्ज़त होने के बाद भी इमरान खान फिर से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन परिणाम उनके प्रतिकूल ही आ रहे हैं। दुनिया के सारे मुल्क जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने पर भारत का समर्थन कर रहे हैं।

मंगलवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रवैए से वह बेहद निराश हैं। अगर 8 मिलियन यूरोपियन या यहूदी अथवा अमेरिकन कर्फ्यू में रहते तो भी क्या अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की यही प्रतिक्रिया होती? उन्होंने कहा, “कर्फ्यू हटाने के लिए अभी तक पीएम मोदी पर कोई दबाव नहीं दिख रहा है। हम मोदी पर दबाव बनाने की हर कोशिश करते रहेंगे। एक बार कर्फ्यू हट जाए, तो फिर पता चल जाएगा कि कश्मीर में क्या हो रहा है।”

इमरान खान ने एक बार फिर दुष्प्रचार करते हुए कश्मीर में 9 लाख भारतीय फौज तैनात होने की बात कही। सिर्फ इतना ही नहीं, पत्रकार वार्ता के माध्यम से उन्होंने कश्मीरियों को भड़काने का भी प्रयास किया। उधर सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात में भी इमरान खान ने कश्मीर पर अमेरिका से मध्यस्थता की बात उठाई थी, जिस पर ट्रंप ने दोनों पक्षों के राजी होने पर आगे बढ़ने की बात कही। वहीं भारत सरकार ने इसे द्विपक्षीय मामला बताते हुए तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप स्वीकार करने से स्पष्ट मना कर दिया है।

मंगलवार को पीएम नरेंद्र मोदी की मुलाकात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से थी। पीएम मोदी के मई में दुबारा सत्ता संभालने के बाद से उनकी मुलाकात राष्ट्रपति ट्रंप से अबतक 4 बार हो चुकी है। ट्रंप ने मोदी से मुलाकात में कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि पीएम मोदी और इमरान खान इस मुद्दे को अच्छे से सुलझा लेंगे। मुझे लगता है कि दोनों नेताओं की मीटिंग से अच्छी चीजें सामने आएंगी।”

पाकिस्तानी सेना की तरफ से भारत में आतंकियों को भेजे जाने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि भारत के पास बहुत अच्छा प्रधानमंत्री है। आतंकियों कि इलाज मोदी कर देंगे। वह सारी समस्याएं खत्म कर देंगे। गौरतलब है कि कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने का पाकिस्तान के पास यह आखिरी मौका है। इससे पहले पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UHRC), संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) सहित कई मंचों पर इस मसले को उठा चुका है, लेकिन हर जगह उसे मुंह की खानी पड़ी है।