सदर बाजार से आम आदमी पार्टी के विधायक (Aam Aadmi Party) सोमदत्त (MLA SOMDUTT) के लिए गुरुवार का दिन बेहद भारी साबित हुआ। अदालत ने विधायक की अपील खारिज करते हुए उन्हें साल 2015 में एक व्यक्ति को गंभीर चोटें पहुंचाने के जुर्म में छह महीने के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया।

बता दें कि यह मामला जनवरी 2015 में गुलाबी बाग में हुई मारपीट से जुड़ा हुआ है, जब सोमदत्त ने संजीव राणा की बेसबॉल के बैट से पिटाई की थी। उस समय सोमदत्त विधायक नहीं थे। विधायक सोमदत्त को इससे पहले जुलाई में भी संजीव राणा को गंभीर चोटें पहुंचाने के मामले में 6 महीने जेल की सजा सुनाई गई थी।

एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने सोमदत्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 325 (किसी को गंभीर चोट पहुंचाने), धारा 147 (दंगा) और धारा 149 (गैरकानूनी जमावड़ा) के तहत दोषी पाया था। इसी के साथ दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

संजीव राणा ने पुलिस को शिकायत देकर कहा था कि वह अपने फ्लैट में था, तभी सोमदत्त करीब 50-60 लोगों के साथ उसके दरवाजे पर चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे। राणा ने बार-बार घंटी बजाने का विरोध किया था। इस बात से नाराज होकर सोमदत्त ने बेसबॉल बैट से उसके पैर पर मारना शुरू कर दिया था।

कोर्ट के समक्ष भी राणा ने कहा था कि सोमदत्त के साथ आए लोग उसे खींचकर सड़क पर ले गए और लात-घूंसे बरसाए। इसके बाद वह बेहोश हो गया। राणा के भाई ने पुलिस बुलाई और पीसीआर वैन उसे बाड़ा हिंदूराव अस्पताल लेकर गई।

दूसरी ओर, मामले में दोषी सोमदत्त का तर्क था कि राजनीतिक दुश्मनी के कारण यह मामला दर्ज कराया गया है। संजीव राणा भाजपा का सदस्य है और वह उनका टिकट कटवाना चाहता था।

वहीं राणा का कहना था कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए नहीं हैं। एक अन्य चश्मदीद गवाह सुनील ने भी संजीव के आरोपों की अपने बयान में पुष्टि की थी। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि शिकायतकर्ता संजीव राणा की गवाही भरोसेमंद व गैरविरोधाभासी है। उनके पास सोमदत्त को फंसाने का कोई कारण नहीं है और बचाव पक्ष ने ऐसा कोई साक्ष्य भी पेश नहीं किया है।

इस मामले में आम आदमी पार्टी से विधायक रहे बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘सोमदत्त गंभीर आपराधिक मामले में दोषी सिद्ध होने वाले चौथा AAP विधायक है, केजरीवाल जिन केसों को झूठा बताते थे उनमे विधायक दोषी सिद्ध हो रहे हैं और जेल जा रहे हैं। अपराधी विधायकों को संरक्षण और आंदोलनकारियों से दुश्मनी – यही हैं केजरीवाल का सच।’