दिल्ली: मोदी सरकार अब तक 312 अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट पर भेज चुकी है। ये जानकारी केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में दी। उन्होंने बताया कि अक्षमता और भ्रष्टाचार में लिप्त होने की वजह से इन्हें रिटायरमेंट दिया गया। इन अधिकारियों के खिलाफ ये कार्रवाई ग्रुप ए और ग्रुप बी स्तरों पर 1.2 लाख अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा के बाद की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में मंत्री जितेंद्र सिंह ने ये बयान डीएमके के सांसद ए राजा के सवाल के जवाब में दिया।

डीएमके सांसद ए राजा ने लोकसभा में सवाल पूछा कि सरकार ने कितने अधिकारियों को जबरन रिटायर किया और इन पर किस आधार पर एक्शन लिया गया। जितेंद्र सिंह ने ए राजा के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि लागू अनुशासनात्मक नियमों के अंतर्गत सरकार के पास उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ आगे कार्रवाई का अधिकार है। सरकार को ये अधिकार प्राप्त है कि सार्वजनिक हितों को देखते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त होने और उनकी अक्षमता के आधार पर उन्हें जबरन रिटायरमेंट पर भेज दिया जाए। उन्होंने इसे सतत प्रक्रिया बताते हुए कहा कि नियम सरकारी कर्मचारियों के लिए समीक्षा करने और उन्हें रिटायरमेंट से पहले भेजने की नीति बनाते हैं।

सिंह ने अपने जवाब में कहा कि जुलाई 2014 से मई 2019 की अवधि में ग्रुप के 36,756 और ग्रुप बी के 82,654 अधिकारियों की समीक्षा की गई। इसके बाद प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत ग्रुप के 125 और ग्रुप बी के 187 अफसरों के खिलाफ सिफारिश की गई। मोदी सरकार के सत्ता में लौटने के बाद कई अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया गया है। इसके बाद कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट पर जाने के लिए कहा गया है। भ्रष्टाचार और अक्षमता के अलावा कुछ अधिकारियों को यौन उत्पीड़न के आरोपों पर रिटायरमेंट दिया गया है। हटाए गए कुछ अधिकारियों का कहना है कि वो इस मामले को अदालत में ले जाएंगे।