मैं इंदौर में रहता हूँ और मैंने इंदौर को देश का सबसे साफ शहर बनते देखा हैं। वही इंदौर जिसे “मिनी मुम्बई” कहा जाता हैं, और पोहा हमारा सिग्नेचर फूड हैं।

इंदौर कभी बहुत स्वच्छ शहर नहीं था लेकिन 2014 में, इसे भारत के शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में 149 वें स्थान पर रखा गया था। यह उपलब्धि एमपी सरकार, इंदौर नगर निगम और शहर के निवासियों के प्रयासों के साथ हासिल हुई और इंदौर 2017 में प्रथमस्थान पर आया।

स्वच्छतम शहर के इस टैग को प्राप्त करने कई कारण हैं , जिन्हें दूसरे शहरों में लागू करके उन्हें भी इंदौर के बराबर लाया जा सकता हैं।

● इस राष्ट्रीय आंदोलन ( Swachh Bharat mission ) से पहले, इंदौर नगरपालिका के कड़े कदम उठाने से पहले उनके श्रमिक कोई अच्छा सफाई का काम नही करते थे ना ही इसे जरूरी समझते थे , लेकिन नगर पालिका ने जब कार्यवाही करते हुए ना ठीक से काम करने वाले करीब 500 कर्मियों को निकाल दिया तो दूसरो ने अपने आप सक्रिय रूप से काम करना शुरू कर दिया।

● शहर को खुले शौचालय मुक्त करने के लिए एक वर्ष की अवधि के भीतर, नगर निगम ने शहर में व्यापक स्वच्छता कवरेज प्रदान करने के लिए 12,549 व्यक्तिगत शौचालय, 200 Urinals और 190 सार्वजनिक शौचालय बनाए। नगर पालिका के प्रयास के परिणामस्वरूप इंदौर की स्वच्छता की स्थिति में सुधार हुआ और इसे प्रधान मंत्री कार्यालय द्वारा जनवरी 2017 में खुली शौचालय मुक्त घोषित कर दिया गया।

● इंदौर में नगर पालिका तीन डिब्बे प्रारूप में अपशिष्ट एकत्र कर रही हैं – गीले अपशिष्ट, सूखे अपशिष्ट और घरेलू खतरनाक अपशिष्ट जिसमें चिकित्सा अपशिष्ट, स्वच्छता / डायपर अपशिष्ट शामिल हैं। अपशिष्ट का संग्रह दैनिक आधार पर घरों से किया जाता है और यह उसी दिन प्रभावी ढंग से इलाज किया जाता है। हमारे पास शहर में दो केंद्रीकृत वसूली केंद्र हैं जहां हमारे पास 500 से अधिक रैगिकर्स हैं, जो सूखे अपशिष्ट का इलाज करने में हमारी सहायता करते हैं। दूसरी ओर, गीले अपशिष्ट और कई विकेन्द्रीकृत चैनलों के इलाज के लिए हमारे पास एक केंद्रीकृत इकाई है। उदाहरण के लिए, हमारे पास 274 क्षेत्र हैं जिनमें शीर्ष अस्पतालों, भोज हॉल, होटल और स्कूल शामिल हैं, जिनमें उनके क्षेत्र के भीतर कंपोस्टिंग इकाइयां हैं और वे अपने गीले अपशिष्ट का इलाज कर रहे हैं। इसके अलावा, हमारे शहरों में 636 बाग हैं जहां हम खाद के माध्यम से अपशिष्ट का इलाज करते हैं।

कचरे से बन रही बॉयो CNG

शहर में फल और सब्जी मंडी है, उससे निकलने वाले कचरे को CNG में बदलने की एक प्रणाली लागू की है – दैनिक आधार पर 20 मीट्रिक टन कचरा 1000 किलोग्राम सीएनजी गैस में परिवर्तित हो जाता है। वर्ष के अंत तक, इंदौर 4,000 किलोग्राम सीएनजी गैस का उत्पादन करने में सक्षम होंगे जो इंदौर की सभी सिटी बसों को चलाने में मदद करेगा, शहर हर दिन 50,000 किलोग्राम नगर पालिका का उत्पादन करता है, जिसमें से 13,000 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा है। इंदौर की अपशिष्ट समस्या से निपटने के लिए इंदौर नगर निगम (आईएमसी) ने प्लास्टिक संग्रह केंद्र स्थापित किया।

नीति आयोग के सीईओ ने इंदौर को बधाई देते हुए ट्विटर पर लिखा

इंदौर ने आज ये साबित किया है कि जनता और सरकार जब साथ आये तो कुछ भी हो सकता है, अभी भी इंदौर को एक लंबा रास्ता तय करना है बाकी है, लेकिन इस शहर ने तमाम नकारात्मक खबरों के बीच एक सकारात्मक पहल की शुरुआत कर दी हैं।