कल हमनें आपको बताया था कि कैसे राम मंदिर मामले की सुनवाई जानबूझकर बार-बार टाली जा रही है। हमनें यह भी कहा था कि बाबरी मस्जिद के पक्षकार हार के डर से ऐसा कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा वो राम मंदिर के पक्ष में ही आएगा। ऐसा हमनें क्यों कहा था, आइए समझने का प्रयास करते हैं।

हाईकोर्ट की सुनवाई पर आधारित

– वामपंथी इतिहासकार प्रोफ़ेसर धनेश्वर मंडल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आगे कबूला था कि बाबरी ढांचे की जगह खुदाई के बारे में किताब उसने अयोध्या गए बिना लिखी। जिस पर कोर्ट में बैठे सारे लोग ठहाका लगा कर हंस पड़े थे।

– एक और वामपंथी इतिहासकार सुशील श्रीवास्तव ने क्रॉस एग्जामिनेशन में माना था कि बतौर सबूत पेश की गई उसकी किताब के रेफरेंस में जिन डॉक्यूमेंट का जिक्र है उनको उसने कभी पढ़ा ही नहीं।

– जेएनयू में हिस्ट्री डिपार्टमेंट की प्रोफेसर सुप्रिया वर्मा ने जजों के सवाल जवाब पर रोते हुए कबूला था कि खुदाई के बारे में रेडार सर्वे की रिपोर्ट को पढ़े बिना ही उसने रिपोर्ट गलत होने की गवाही दी थी।

– एएमयू की प्रोफ़ेसर जया मेनन से जज ने पूछा कि अपने अयोध्या जाने का कोई सबूत दें, तब जाकर उसने माना कि वो कभी नहीं गई और झूठी गवाही दी कि मंदिर के खंभे बाद में वहां ले जाकर रखे गए थे।

– एक्सपर्ट के तौर पर पेश की गई वामपंथी सुवीरा जायसवाल भी क्रॉस एग्जामिनेशन में पकड़ी गई। उसने कोर्ट में माना कि उसे इस केस की कोई जानकारी नहीं है जो कुछ बोल रही है वो मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।

– वामपंथी आर्कियोलॉजिस्ट शीरीन रत्नाकर ने माना था कि उसे अयोध्या मामले से जुड़ी कोई फील्ड-नॉलेज नहीं।

– मध्यकालीन इतिहास के एक्सपर्ट के तौर पर पेश किए गए सूरजभान के बारे में पता चला कि वो इतिहासकार है ही नहीं।

– बाबरी मस्जिद की जगह पर कोई मंदिर नहीं होने के बारे में सूरजभान ने डीएन झा और आरएस शर्मा के साथ मिलकर एक किताब लिखी थी। कोर्ट में उसने माना कि हम पर बहुत दबाव था इसलिए सिर्फ छह हफ्ते में ये किताब लिखी गई। इसके लिए खुदाई की रिपोर्ट भी नहीं पढ़ी।

ये कहानी है वामपंथी इतिहासकारों की जिन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने बतौर गवाह पेश किया था और एक के बाद एक उनकी पोल खुलती गई। ध्यान देने वाली बात है कि ये सभी हिंदू नाम वाले हैं। अब जिस पक्ष की बुनियाद ही झूठ पर आधारित हो तो स्वाभाविक है कि वो सुनवाई को बार-बार टलवाने का ही प्रयास करेंगें। अब समझना हमें है कि इस षडयंत्र से कैसे निकला जाए?