भारत में सबसे ज्यादा छेड़छाड़ की गई तो वह हमारा इतिहास है। गौरतलब है कि किसी भी समाज के भविष्य की नींव भूतकाल में तय होती है। यह इतिहास ही हमें वर्तमान की समझ प्रदान करता है। यह इतिहास पीछे जो गलतियाँ हुई हैं उनसे सबक लेते हुए अपने आने वाले नए भविष्य के निर्माण में सहायक होता है। हमारी कोशिस होती है हम अपने पाठकों को हमेशा सही ऐतिहासिक तथ्य बताये। इसी कड़ी में आज हम आपको मेवाड़ के राजा बप्पा रावल के बारे में बताएंगे।

ऐतिहासिक साक्ष्यों के मुताबिक पहाड़ों, घने जंगलों और रेगिस्तानी वीराने में बसे मेवाड़ राज्य की स्थापना 568 ईस्वी में गुहिल द्वारा की गई थी। समय के साथ यही ‘गुहिल वंश’ पहले ‘गहलौत वंश’ और फिर ‘सिसोदिया वंश’ बन गया। हालांकि बृहत मेवाड़ राज्य की स्थापना 8वीं शताब्दी में बप्पा रावल से मानी जाती है। बता दें, बप्पा रावल का असली नाम काल भोज था। इनका अपनी प्रजा के साथ गहरा प्रेम था। यही कारण है कि इन्हें प्यार से पूरा मेवाड़ बप्पा के नाम से पुकारता था।

रावलपिंडी में था सैन्य ठिकाना

कहा जाता है कि बप्पा रावल ने 734 ई. में मौर्य शासक मान मोरी से चित्तौड़ के किले को जीता था। जो यहां की भव्यता को आज भी उसी स्वरूप में दर्शाता है। वहीं, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि अरब आक्रमणकारियों ने चित्तौड़ के शासकों को युद्ध में हरा दिया था। इसके बाद बाप्पा रावल ने अरबों को पछाड़ते हुए चित्तौड़ पर अपना नियंत्रण स्थापित किया।

चित्तौड़ जीतने के बाद बप्पा ने नागदा से हटाकर इसे अपनी राजधानी बना लिया। उन्होंने जैसलमेर व जोधपुर के राजाओं को साथ लेकर अरबों को वापस अफगानिस्तान की सीमा से बाहर खदेड़ दिया।

बप्पा रावल की सेना उस समय काफी मजबूत मानी जाती थी। उन्होंने साहस का परिचय देते हुए वर्तमान पाकिस्तान के रावलपिंडी में अरब लुटेरों पर निगरानी रखने के लिए एक सैन्य चौकी बनाई। पहले इस जगह को गजनी कहा जाता था। उस समय तक इस जगह पर आराम से आवाजाही थी। ऐसे में समझा जा सकता है कि मेवाड़ साम्राज्य का शासन आधुनिक अफगानिस्तान तक था।

मेवाड़ का साम्राज्य

वहीं, कई इतिहासकार मानते हैं कि अपने साम्राज्यों को अरब आक्रमणकारियों से सुरक्षित करने के लिए बप्पा रावल ने गजनी प्रदेश में सैन्य चौकी बनाई थीं। यहां से उनके सैनिक अरब लुटेरों पर नजर रखते थे। ऐसे में इस बात में कोई शक नहीं कि जिस जगह पर ये सैन्य चौकियां स्थापित की गई थीं, उनका नाम बदलकर बप्पा रावल के नाम पर रावलपिंडी कर दिया गया।

माना जाता है कि बप्पा रावल ने अन्य राजाओं के साथ मिलकर 16 साल अरब लुटेरों से लड़ाई लड़ी और उन्हें हिंदुस्तान की मुख्य भूमि से दूर रखा। इसी लड़ाई में फिर एक समय ऐसा भी आया, जब बप्पा रावल ने सिंध से अरबों को पूरी तरह से खदेड़ कर उनका प्रभाव हमेशा के लिए समाप्त कर दिया।

मोहम्मद बिन कासिम को हराया

भारत पर सबसे पहला अरब आक्रमण अल हज्जाज के भतीजे और दामाद मुहम्मद बिन कासिम ने 712 ई. में खलीफा की मदद से हिंदुस्तान की उत्तर पश्चिमी सीमा से सिंध पर किया था। उस समय दाहरसेन वहां के राजा थे। सिंध की सीमा यूपी के कन्नौज, अफगानिस्तान में कंधार से लेकर कश्मीर और रेगिस्तान को पार कर नमक की दलदली भूमि गुजरात के कच्छ तक थी।

मोहम्मद बिन कासिम ने उनके किले पर कई बार हमला किया, लेकिन दाहरसेन की सेना से उसे हार ही मिली। फिर एक रोज कासिम ने धोखे से दाहरसेन की सेना में अपने सिपाहियों को महिला वस्त्र पहनाकर भेज दिया। आखिरकार, राज्य की रक्षा के लिए दुश्मनों से लड़ते हुए दाहरसेन ने अपने प्राणों की आहूति दे दी। इस प्रकार, अरबों ने सिंध को जीतकर उसके बड़े भू-भाग पर कब्जा कर लिया।

इसके बाद रास्ते में आने वाले सभी साम्राज्य अरबों के आगे कमजोर पड़ते जा रहे थे। कोई भी शक्ति अरब आक्रमणकारियों का मुकाबला करने में सक्षम नहीं थी। वह वर्तमान अफगानिस्तान, सिंध को जीत चुका था, और रेगिस्तान से होते हुए मेवाड़ की ओर बढ़ रहा था। देखते ही देखते कुछ ही सालों में अरब आक्रांताओं ने चावड़ों, मौर्यों, सैंधवों, कच्छेल्लों को हरा दिया।

इस दौरान मोहम्मद बिन कासिम सिर्फ धन ही नही लुटता था। वह व्यापक जनसंहार करता था, उसके रास्ते मे आने वाले नगर गांव तबाह हो जाते थे। ऐसे समय में नागादित्य के पुत्र और मेवाड़ के महाराजा बप्पा रावल ने युद्ध की बागडोर अपने हाथों में ली।

उन्होंने अपनी विशाल सेना को एकत्र किया और हार चुके राज्यों को जीत का आश्वासन देकर अपने पक्ष में किया। बप्पा रावल ने सबसे पहले मेवाड़ के पास स्थित महत्वपूर्ण चित्तौड़ किले पर अधिकार जमाया और 734 ई. में मेवाड़ में गहलौत वंश की स्थापना की। उन्होंने न केवल अरब लुटेरों को खदेड़ा, बल्कि उनके द्वारा कब्जाए गए इलाकों पर पुन: अधिकार कर उन्हें मेवाड़ में भी मिला लिया।

गजनी के शासक ने की अपनी बेटी की शादी

इसके बाद बप्पा रावल ने बप्पा सौराष्ट्र की सहायता से बिन कासिम को एक बड़े युद्ध मे बुरी तरह हराया और उसे वापस सिंधु के पश्चिमी तट पर (वर्तमान में बलुचिस्तान) धकेल दिया। बप्पा रावल यही तक नही रुके उन्होंने गजनी (अफगानिस्तान) की ओर कूच किया और वहां के शासक सलीम को हराया। कर्नल टॉड के मुताबिक सलीम ने अपनी लड़की की शादी बप्पा ने करके जीवन दान मांगा।

35 मुस्लिम राजकुमारियों से किया था विवाह

गजनी जीतने के बाद बप्पा ने वहां अपना एक प्रतिनिधि नियुक्त किया। सिर्फ यही नही बप्पा रावल ने कंधार समेत पश्चिम के कंधार, खुरासान, तुरान, इस्पाहन, ईरानी साम्राज्यों को जीतकर उन्हें अपने साम्राज्य में मिला लिया था। इन सभी राज्यो के मुस्लिम शासकों ने अपनी बेटियों की शादी बप्पा रावल से की, कहते है कि उन्होंने 35 मुस्लिम राजकुमारियों से विवाह किया था।

लगभग 20 वर्ष तक शासन करने के बाद उन्होंने वैराग्य ले लिया और अपने पुत्र को राज्य देकर शिव की उपासना में लग गये। महाराणा संग्राम सिंह (राणा सांगा), उदय सिंह और महाराणा प्रताप जैसे श्रेष्ठ और वीर शासक उनके ही वंश में उत्पन्न हुए थे। उन्होंने अरब की हमलावर सेनाओं को कई बार ऐसी करारी हार दी कि अगले 400 वर्षों तक किसी भी मुस्लिम शासक की हिम्मत भारत की ओर आंख उठाकर देखने की नहीं हुई। बहुत बाद में महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण करने की हिम्मत की थी और कई बार पराजित हुआ था।

वामपन्थी इतिहासकारों की कुटिल नीति

वामपन्थी इतिहाकारो का खेल समझिए, वर्ष 712 में मुहम्मद बिन कासिम ने राजा दाहिर को पराजित किया। परंतु उसके बाद सीधे बारहवीं शताब्दी में मुहम्मद गोरी का आक्रमण मिलता है। आठवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक क्या अरब आक्रमणकारी उस एक जीत का जश्न मना रहे थे? वास्तव में इस पूरे काल में अरब आक्रमणकारियों को भारतीय योद्धा खदेड़े हुए थे। उस कालखंड में अरबों को पराजित करने वाला एक महानायक योद्धा था बप्पा रावल।

अरब की आंधी का सीधा सामना उस समय मेवाड़ के सैनिकों और शासकों ने देश का सीमारक्षक बनकर निभाई और भारतवर्ष के सम्मान की रक्षा की, अन्यथा देश इस्लाम की आंधी में नेस्तनाबूत हो जाता और सनातन धर्म जिसे आज हिन्दू कहा जाता है, वह अपने अस्तित्व को बचाने के लिए पारसियों और यहूदियों की भांति मातृभूमि से पृथक हो चुका होता। यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि भला हो मेवाड़ के गहलोत और भीनमाल के प्रतिहारों का, जिनके कारण आज भारतवर्ष में हिन्दू स्वयं को हिन्दू कहने का अधिकार रखता है।