वंदे मातरम! मित्रों! आपने बहुत लोगों से सुना होगा भारत पाकिस्तान के बीच होने वाले व्यापार के बारे में, बहुत ही भ्रामक जानकारियां भी सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं। लोग नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप भी लगाते हैं कि हमने पाकिस्तान को MFN (Most Favoured Nation) का दर्जा दे रखा है और पाकिस्तान से व्यापार मोदी सरकार के दौरान बढ़ा है इत्यादि। आज हम इन्हीं पहलुओं पर विस्तार से और तथ्यों के साथ विश्लेषण करेंगे।

हाल ही में विश्वबैंक ने दक्षिणी एशिया क्षेत्र के देशों के बीच होने वाली व्यापारिक संभावनाओं पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की है।

रिपोर्ट का नाम है : A Glass Half Full : The Promise of Regional Trade in South Asia इसे आप डाऊनलोड भी कर सकते हैं। लिंक है : यहाँ क्लिक कीजिए

मैं सभी पाठकों से निवेदन करूँगा कि कृपया मेरे द्वारा दी गई जानकारी को स्वयं सत्यापित करें ताकि आप अपने आसपास के पथभ्रमित लोगों को स्वयं ही तथ्यों के साथ उचित जबाब देने में सक्षम हों।

रिपोर्ट के बारे में बात करने से पहले हम जरा भारत पाकिस्तान के बीच व्यापार के मुख्य बिंदुओं पर नजर डालते हैं:

  1. भारत पाकिस्तान को मांस, रसायन, कलाकृतियां, दवाइयां और कृषि उत्पाद निर्यात करता है। चिकित्सा सम्बन्धी आवश्यताओं में पाकिस्तान भारत पर बहुत हद तक निर्भर है। पाकिस्तानियों को हमने ट्विटर पर वीसा के लिए सुषमा स्वराज जी से विनती करते हुए भी देखा है।

  2. पिछले एक साल से, पाकिस्तान में भारतीय कपास, चीनी और डेयरी उत्पादों की भारी मांग बढ़ी है।

  3. भारत पाकिस्तान से अखरोट, चर्म उत्पाद, सीमेंट, चुनिंदा रसायन और दुर्लभ खनिज आयात करता है। पिछले एक वर्ष से भारत ने पाकिस्तान से सीमेंट आयात किया है जिसकी वजह से भारतीय सीमेंट व्यापारियों ने हड़ताल भी की थी।

  4. भारत-पाक के बीच व्यापार कराची-मुम्बई के समुद्री रास्ते और बाघा-बॉर्डर से जमीनी रास्ते से होता है। इसके अलावा पूंछ और उड़ी से भी व्यापार करने की संभावना है लेकिन फिलहाल इनका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर और पाक-अधिकृत कश्मीर के बीच व्यापार होने में होता है।

  5. हाल ही में पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त अजय विसरिया ने दौनों देशों के बीच $30 विलयन तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की है।

  6. तमाम राजनैतिक गतिरोधों के वावजूद भारत ने पाकिस्तान को MFN का दर्जा दे रखा है।

यहां तक वो बातें थी जिनकी जानकारी होना बहुत ज़रूरी था। अब आते हैं रिपोर्ट पर :

रिपोर्ट में ये निष्कर्ष निकाला गया है कि भारत पाकिस्तान के बीच व्यापार $2 बिलियन से बढ़कर तकरीबन $37 बिलियन होने की संभावना है।

लेकिन जिन लोगों को समाचार संक्षिप्त में पढ़ने की आदत है उनके लिए ये निष्कर्ष भ्रामक है। दरअसल, रिपोर्ट के पृष्ठ 49 पर ये सारणी प्रकाशित की गई है :

इसमें अगर आप पाकिस्तान और भारत के बीच हुए व्यापार को सन 2000 से 2015 के बीच देखें तो पाएंगे कि NDA सरकार के समय व्यापार कितना कम था और ये 2008 आते आते कितना बढ़ गया। 26/11 के मुम्बई हमले के बाद अगले साल यानि 2009 में थोड़ा कम हुआ लेकिन 2015 तक लगभग एक समान रहा। उम्मीद है, आंकड़ों के हिसाब से आपको अंदाजा हो गया होगा कि भारत पाकिस्तान के बीच किस सरकार के दौरान व्यापार बढ़ा। हाल में लगभग भारत-पाकिस्तान मात्र $2 बिलियन का व्यापार करते हैं। अगर आप गणित में ज़रा से भी अच्छे हैं तो ये आंकड़े आपको हक़ीक़त से वाकिफ करा सकते हैं।

इसके बाद उपर्युक्त ग्राफ़ में दिखाया गया है कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में 2014 से 2017 के बीच दुनियाँ के बाकी क्षेत्रों के अपेक्षाकृत कितना व्यापार हुआ है। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि इस क्षेत्र में व्यापार की अच्छी तरक्की हुई है लेकिन यहाँ पूरे क्षेत्र की बात हो रही है इसमें भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार का बहुत ही कम भाग है।

ये क्षेत्र लगातार तरक्की कर रहा है। इसी के आधार पर ये संभावना जताई गई है कि यहां पर व्यापार और बढ़ेगा। अगर इसी अनुपात में हर देश के बीच के व्यापार को देखा जाए तब जाकर भारत पाकिस्तान के बीच व्यापार की संभावना लगभग $37(36.915) बिलियन आंकी गई है जबकि वास्तव में अभी ये बेहद कम यानी मात्र $2 बिलियन है। रिपोर्ट के पृष्ठ 37 पर
आप स्वयं ये अंतर इस सारणी में देख सकते हैं :

अब आपको स्वयं पता चल गया होगा कि वास्तविक और आंके गए व्यापार में सबसे ज्यादा अंतर भारत-पाक के बीच होने वाले व्यापार के लिए ही है। इसका सीधा सा मतलब है, कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए व्यापार पर क्षेत्रीय परिस्थियां लागू नहीं होती। भारत पाकिस्तान के राजनैतिक और आर्थिक हालात एक दूसरे से काफी भिन्न हैं इसलिए ये आंकलन गलत होने की प्रबल संभावना है इसका कारण भी रिपोर्ट में ही पृष्ठ 90 पर आप स्वयं पढ़ सकते हैं :

सबसे बड़ी बात यही है कि पाकिस्तान भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर भारी-भरकम आयात शुल्क लगाता है जो बाकी करों के अलावा होता है जिसकी वजह से भारतीय उत्पाद वहां पर बहुत महंगे हो जाते हैं। इसके विपरीत भारत ने कभी ज़रूरत से ज्यादा कर पाकिस्तान पर नहीं लगाए, जिसकी जिम्मेदारी पूर्ववर्ती सरकार को लेकर ऐसा न करने का कारण बताना चाहिए। मोदी सरकार में पाकिस्तान पर सीधे तौर पर कभी कड़े फैसले नहीं लिए गए जोकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख को नुकसान पहुंचाते बल्कि इस सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग थलग किया। पाकिस्तान SAARC का सदस्य था तो भारत इससे तटस्थ हो गया और अपना पूरा ध्यान BIMSTEC पर लगा दिया। जिससे पाकिस्तान का महत्व दक्षिण एशिया में बेहद कम हो गया।

अब बात करते हैं पाकिस्तान को MFN का दर्जा देने की तो जब मनमोहन सिंह की सरकार थी और 26/11 हमले के 4 साल बाद सितंबर 2012 में भारत सरकार ने पाकिस्तान से व्यापारिक सम्बन्ध मजबूत बनाने के लिए बाघा बॉर्डर से सारे गतिरोध हटा दिए थे और पाकिस्तान को दिसम्बर 2012 में MFN का दर्जा दिया था। ये बात तो थी किस पार्टी की सरकार के समय पाकिस्तान को MFN का दर्जा दिया था। अब बात करते हैं कि मौजूदा सरकार MFN का दर्जा हटा क्यों नहीं सकती? इसका कारण है The South Asia Free Trade Area (SAFTA), जो 2004 में SAARC के इस्लामाबाद सम्मेलन से लागू हुआ था।

अब अगर बात की जाए पाकिस्तान की तो इसकी क्षमता दक्षिण एशिया के बाकि देशों के साथ $39.4 बिलियन का व्यापार करने की है लेकिन ये केवल $5.1 बिलियन का व्यापार करता है। इसका कारण है, निम्न स्तर की सुरक्षा, बाकी देशों के साथ वायुमार्ग सम्पर्क अच्छा नहीं हैं जबकि बाकी देशों के आपस में बहुत अच्छी व्यापारिक सुविधाएं हैं। चूंकि पाकिस्तान न आतंकियों पर लगाम कसना चाहता है न ही भारत के व्यापारियों के लिए सुरक्षा मुहैया करवा सकता है, न ही कनेक्टिविटी सुधारना चाहता है इसलिए मौजूदा भारत सरकार ने कोई भी पुराने समझौते न तोड़ते हुए पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मंचों से तटस्थ करने की नीति चुनी।

जो लोग ये अफवाहें फैलाते हैं कि मौजूदा भारत सरकार पाकिस्तान के साथ व्यापार करना चाह रही है, उन्हें एक आंकड़ों और तथ्यों पर एक बार नजर डालनी चाहिये।