हमनें आपको 3 फरवरी को बताया था कि ट्विटर इंडिया के विरोध में राइट विंग के लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था।राजनीतिक भेदभव करने के आरोप ट्विटर पर पहले भी लगते रहे हैं। ट्विटर पर आरोप लगाए थे कि यह दक्षिणपंथी विचारों के खिलाफ एक्शन लेता है और जानबूझकर एक विचार धारा वाले लोगों के अकाउंट ब्लॉक कर रहा है, जो भाजपा या राइट विंग से जुड़े हैं। ट्विटर इंडिया के ऑफिस के सामने भी ‘यूथ फॉर सोशल मीडिया डेमोक्रेसी’ संगठन के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया था।

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने 1 फरवरी को एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से टि्वटर को समन जारी किया था। पहले इस संसदीय समिति की बैठक 7 फरवरी को होनी थी, जिसकी तारीख को बढ़ाकर 11 फरवरी कर दिया ताकि टि्वटर के सीईओ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी को उपस्थित होने के लिए ज्यादा समय मिल सके। यह समन सुरक्षा चिंताओं को लेकर जारी किया गया था। समन जारी होने के बावजूद टि्वटर प्रमुख और अधिकारियों ने संसदीय समिति के समक्ष पेश होने से इंकार कर दिया था।

सोमवार को बैठक में शामिल होने के लिए ट्विटर की टीम पहुंची लेकिन इस टीम में CEO शामिल नहीं थे। ऐसे में संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर साफ तौर पर कह दिया कि जब तक ट्विटर के CEO भारत नहीं आएंगे तब तक वह किसी भी अधिकारी से मुलाकात नहीं करेंगे। संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है कि वे ट्विटर के किसी भी अधिकारी से तब तक नहीं मिलेंगे जब तक कि समिति के समक्ष वरिष्ठ सदस्य या ट्विटर ग्लोबल टीम के सीईओ पेश न हो। इसके लिए ट्विटर को 15 दिन का समय दिया गया है।

अब कहीं ऐसा तो नहीं इसी बात से नाराज होकर ट्विटर इंडिया जान बूझकर आज राइट विंग/भाजपा के लोगों के रिट्वीट और लाइक्स की संख्या को कम करके दिखा रहा है? वैसे ऐसा सिर्फ गैर-वामपन्थी ट्विटर हैंडल्स के साथ हो रहा है या वामपन्थ समर्थक ट्विटर हैंडल्स के साथ भी हो रहा हैं इस बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नही है। लेकिन RT और लाइक कम होने की ज्यादातर शिकायत दक्षिणपंथी ट्विटर हैंडल्स की तरफ से आयी हैं।

जबकि राहुल गाँधी के एक ट्वीट को 1 सेकेंड में 37 रिट्वीट से 1798 रिट्वीट दिखा देता है।

अब यह बग है या फिर जानबूझकर किया गया है इसकी जांच होनी चाहिए, क्योकि प्रधानमंत्री मोदी के हैंडल के स्क्रीनशॉट भी उनके समर्थक ट्विटर पर शेयर कर रहे हैं जिसमे RT और LIKE कम हुए हैं ऐसा दिख रहा हैं। ट्विटर इंडिया को इस बारे में जल्दी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए क्योंकि यह बेहद गम्भीर मसला हैं।

यह ऐसा समय है जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों की डेटा प्राइवेसी की सुरक्षा और चुनाव में दुरुपयोग की आशंका को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। टि्वटर के कार्य करने के तरीके को वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा है। इस पर भी टि्वटर के अधिकारियों द्वारा भारतीय संसदीय समिति के समक्ष पेश न होना एक चिंता की बात है क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस, सिंगापुर और यूरोपीय संघ की सुनवाई के चौथे नंबर पर भारत में सुनवाई के लिए बुलाया गया है। ट्विटर इंडिया का यह रवैया ठीक नहीं है।