यहाँ जानिए, तय समय में परियोजनाओं के पूरा होने से देश को क्या लाभ होता है और मोदी सरकार इसमें कितनी सफल रही हैं?

New India's development projects are getting completed before time.

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जहाँ एक तरफ पूरा विश्व आने वाले वर्षों में भारत को एक बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में देख रहा है, वहीँ भारत में बैठे हुए चंद लोग इसे भारत की असफलता करार देते हुए, नरेंद्र मोदी को असफल प्रधानमंत्री बताने में लगे हुए हैं | भारत की अर्थव्यवस्था पश्चिमी देशों के मुकाबले काफी ज्यादा सुढृढ़ रही है, 1991 के बाद से ही भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार होने लगा था, लेकिन ये दौर ऐसा था जब अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ ही भारत पर विदेशी कर्ज भी बढ़ता जा रहा था और अर्थव्यवस्था में सुधार की रफ़्तार बहुत ही धीमी थी, 1991 के बाद दो मौके ही ऐसे आये जब भारत पर वर्ल्ड बैंक के ऋण में कमी आयी, एक मनमोहन सिंह जी का दौर था, जब मामूली सी कमी देखने को मिली थी और दूसरा नरेंद्र मोदी जी का दौर, जिसमे विदेशी कर्ज में भारी कमी दर्ज की गयी | नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल में देश में विकास कार्यों को रफ़्तार मिली, वो पीछे किसी भी प्रधानमंत्री के कार्यकाल में नहीं मिल पायी थी |

चूँकि भारत में एक बहुत बड़ी आबादी रहती है, इसलिए जब तक यहां पर per capita जीडीपी ग्रोथ नहीं बढ़ेगी, जमीन पर विकास कार्य नजर नहीं आएंगे | Per Capita जीडीपी ग्रोथ दर 2014 के बाद से लगातार बढ़ रही है, इसका अर्थ ये हुआ की भारत के प्रत्येक व्यक्ति के कार्य क्षमता में वृद्धि हो रही है, ये वृद्धि तभी होगी जब देश में ज्यादा लोगो को काम मिलना शुरू होगा |

भारत की जीडीपी ग्रोथ दर अगर अगले तीन दशकों तक 8 बनी रहेगी तो भारत की करीबन 50 % जनसँख्या वैश्विक मिडिल क्लास श्रेणी में आ जायेंगे, इसके लिए ये जरुरी है की प्रति व्यक्ति जीडीपी ग्रोथ रेट बढ़ती रहे | अगर भारत पर वर्ल्ड बैंक के कर्ज और उसकी उपयोगिता पर बात करेंगे तो आप ये पाएंगे, की मौजूदा भारत कर्ज लिए हर पैसे का अब सही इस्तेमाल कर पा रहा है | लेखक की दृष्टि से विश्व बैंक से लिया कर्ज हमारे लिए तब तक समस्या की बात नहीं है, जब तक भारत की ग्रोथ रेट 8 के आस पास है | जब तक कर्ज ले कर किये जा रहे विकास कार्य अपने तय समय के भीतर या उससे पहले पूरे हो रहे हैं, हम मजबूत स्तिथि में बने रहेंगे |

अगर हम नरेंद्र मोदी जी के द्वारा किये गए विकास कार्यों की बात करें तो दिल्ली में धौला कुआँ मेट्रो स्टेशन के निकट NH 8 पर 4 लेन फ्लाईओवर मात्र 136 दिनों में बन कर तैयार हुआ है, विकास कार्यों की ये दर पहले किसी भी सरकार में देखने को नहीं मिली | ये फ्लाईओवर धौला कुआँ से एयरपोर्ट कॉरिडोर को सिग्नल फ्री करने की दिशा में पहला कदम है, इससे यात्रा में कम से कम 30 मिनट की बचत होगी | वन्दे भारत ट्रेन 2 साल से भी कम समय में कमर्शियल ऑपरेशन करने लगी, मात्र 22 महीनो में ये ट्रेन हकीकत बनी, ऐसा पहले किसी दौर में नहीं हुआ | वन्दे भारत की सफलता के बाद ट्रेन 20 पर काम चालू है, जिसे 2020 में लांच करना है और ये राजधानी ट्रेनों से भी ज्यादा रफ़्तार की होंगी |
मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2022 को शुरू होनी है, जबकि जापान के इंजीनियर भी इस 508 किलोमीटर लम्बे रूट को 2023 में शुरू करने की योजना बना रहे थे | ये मात्र कुछ उदाहरण हैं, अगर इसी रफ़्तार पर भारत में विकास कार्य होते रहे तो भारत बहुत जल्दी विकसित देशों की सूचि में आ जायेगा | हालाँकि ऊपर लिखे हर प्रोजेक्ट के लिए अलग अलग संस्थाओं से ऋण लिया गया है, लेकिन अगर ये प्रोजेक्ट तय समय में या उससे पहले पूरे हो जाते हैं, तो ऐसे ऋणों को चुकाना बहुत ही आसान हो जाता है | दिल्ली मेरठ के बीच एक्सप्रेस वे की बात हो या किसी भी प्रोजेक्ट की, सभी तय समय में या उससे पहले पूरे हो रहे हैं | इससे प्रोजेक्ट की लागत नियंत्रित रहती है, इसी जिजीविषा ने बनारस की सूरत बदल दी, यही विकास की उम्मीद भारत के ट्रेन स्टेशन को एकदम आधुनिक अंतर राष्ट्रिय स्तर का स्वरुप दे रहा है |

आइये देखते हैं कि किसी भी प्रोजेक्ट के तय समय से देरी होने पर कैसे उसकी लागत बढ़ती है:

-> मान लीजिये किसी प्रोजेक्ट का बजट रूपए 100 है और इसकी समय सीमा 100 दिन की है, मतलब प्रति दिन का खर्च रूपए 1 है, अगर ये प्रोजेक्ट 100 दिनों की जगह 50% देरी से 150 दिनों में पूरा होता है, तो सीधे इसकी लागत रूपए 150 हो गयी | इस पर लिए गए कर्ज में 50 दिनों का ब्याज और इन 50 दिनों में सामान की जो वैल्यू बढ़ी उसे भी जोड़िये, मतलब इसकी लागत रूपए 150 से भी ज्यादा हुई |
-> फेस वैल्यू, जब किसी देश में कर्ज लेकर किये जा रहे विकास कार्य तय समय में पूरे नहीं पते हैं तो उस देश कि रेटिंग में गिरावट दर्ज होती है, जिससे आगे कर्ज लेने में कठिनाई आती है और देश कि फाइनेंसियल रेटिंग कम हो जाती है |

वैश्विक स्तर पर भारत कि तस्वीर बदलने का एक मुख्य कारण ये भी है मौजूदा सरकार अपने प्रोजेक्ट तय समय से पहले पूरा कर रही है |

जय हिन्द !

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