पाकिस्तान में अगवा हुई हिन्दू लड़कियों के लिए न्याय मांगने के एक सवाल पर नोबल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने ट्विटर यूजर को ब्लॉक कर दिया।

मलाला युसुफ़ज़ई नारी शक्ति का प्रतीक हैं, 17 वर्ष की आयु में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली मलाला दुनिया की सबसे कम उम्र वाली नोबेल विजेती बन गयी। अक्टूबर 2012 में, मात्र 14 वर्ष की आयु में अपने उदारवादी प्रयासों के कारण वे आतंकवादियों के हमले का शिकार बनी, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गई और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गई। मलाला ने ब्लॉग और मीडिया में तालिबान की ज्यादतियों के बारे में जब से लिखना शुरू किया तब से उसे कई बार धमकियां मिलीं।

मलाला ने तालिबान के कट्टर फरमानों से जुड़ी दर्दनाक दास्तानों को महज 11 साल की उम्र में अपनी कलम के जरिए लोगों के सामने लाने का काम किया था। मलाला उन पीड़ित लड़कियों में से है जो तालिबान के फरमान के कारण लंबे समय तक स्कूल जाने से वंचित रहीं। अक्टूबर 2012 में, स्‍कूल से लौटते वक्‍त उस पर आतंकियों ने हमला किया जिसमें वे बुरी तरह घायल हो गई। इस हमले की जिम्‍मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने ली। बाद में इलाज के लिए उन्हें ब्रिटेन ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बाद उन्हें बचा लिया गया।

अब इतनी दमदार व्यक्तित्व की धनी बालिका के अपने देश पाकिस्तान में जब दो किशोरी बच्चियों रीना और रवीना का होली की संध्या पर अपहरण कर लिया गया तो लोग उनकी तरफ आशा भरी नज़रों से देखने लगे कि वह इस अन्यायपूर्ण कृत्य का पुरजोर तरीके से विरोध करेंगी। आख़िर नारी शक्ति का प्रतीक जो ठहरी ! काफी देर तक जब उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी तो एक ट्विटर यूजर ने उनको टैग करके सवाल पूछा और घटना की निंदा करने को कहा।

लेकिन आश्चर्य की बात यह थी, कि निंदा करना तो दूर, उन्होंने, सवाल पूछने वाले ट्विटर हैंडल को ही ब्लॉक कर दिया।

अब यह समझ से परे हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। उन्होंने अपना जीवन ही नारी सशक्तिकरण को समर्पित कर दिया हैं, उनकी यह चुप्पी बड़ी रहस्यमय लगती हैं। अपने ही देश में दो बच्चियों की दिनदहाड़े उठा लिया जाता हैं, उनका जबरन धर्मान्तरण करवाया जाता हैं, और अपने से बड़े उम्र के आदमियों से शादी करवा दी जाती हैं और करोड़ों युवाओं की प्रेरणा मलाला युसुफ़ज़ई के मुँह में दही जम जाती हैं। क्यों? अपनी किताबें बेच कर, व्याख्यान देकर करोड़पति बन गयीं मलाला युसुफ़ज़ई अब ब्रिटेन में रहती हैं, जहां उनको तालिबान का डर नहीं हैं। स्वाट घाटी में तालिबान से लोहा लेनी वाली मलाला को किस बात का डर हैं? पत्रकार आरती टिक्कू सिंह ने भी ट्वीट करके उनसे अपना मुँह खोलने को कहा हैं।

काम से काम उन्होंने आरती टिक्कू सिंह पर इतना एहसान किया हैं कि उनको ब्लॉक नहीं किया। लेकिन सवाल फिर भी रह जाता हैं। आखिर उनकी चुप्पी का रहस्य क्या हैं। रवीना के बुजुर्ग पिता जी पुलिस स्टेशन के सामने धरना दिए बैठे हैं। कितना करूँण क्रंदन हैं उनका। एक सामान्य इंसान का कलेजा फट जाये। खबर यह भी आ रही हैं कि उनकी पत्नी भी चल बसी क्योकि वह यह सदमा नहीं झेल सकी। लेकिन मलाला हैं की मुँह ही नहीं खोलती। लाख टके का सवाल हैं, आखिर क्यों।