चुनाव जीतकर सरकार बनाते ही कांग्रेस अपनी पुरानी साम्प्रदायिक तुष्टिकरण की नीति पर उतर आई हैं। कांग्रेस मुस्लिमों को खुश करने के लिए एक बार फिर से वहशी दरिंदे अकबर को महान और छोटी टुकड़ी के सहारे मुगलों को धूल चटाने वाले महाराणा प्रताप को कायर बताने वाली है। जी हां, राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा ने अपरोक्ष तौर पर तो नहीं, लेकिन इशारों इशारों में यह जरूर बता दिया है कि विद्यालयों में अब अकबर को महान बताया जाएगा।

इतना ही नही कांग्रेस की सरकार के बनने के बाद ये कयास लगने शुरू हो गए थे कि अब सूर्य नमस्कार को हटाया जाएगा। अब डोटासरा के बयान के बाद लगभग यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस अपने पुरानी तुष्टिकरण की राह पर चल पड़ी है। डोटासरा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्कूली पाठ्यक्रमों की समीक्षा करने के बाद उसमे आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या बच्चों को महाराणा प्रताप की महानता ही पढाई जाएगी या अकबर महान महान? इस पर डोटासरा गोलमाल जवाब देते नजर आए। उन्होंने कहा कि कौन महान है या कौन नहीं, ये निर्णय करना मेरा काम नहीं है। यह पूछे जाने पर कि व्यक्तिगत तौर पर वे किसे महान मानते हैं- महाराणा प्रताप या अकबर? इसपर भी मंत्री जी गोल कर गए।

मतलब स्पष्ट है कि जिस तरह कांग्रेस ने शुरू से ही असली इतिहास को दफन करने का कुत्सित प्रयास किया है, वो फिर से करने वाली है। अब राजस्थान के स्कूलों में अकबर महान पढाया जाएगा।

अब सवाल यह है कि हजारों हिंदूओं की हत्या करके, बलात्कार करके, धर्मांतरण करवाकर अकबर महान हो गया और हजारों हिंदूओं की जानें बचाकर, धर्म की रक्षा करके महाराणा प्रताप महान क्यों नहीं हुए?

कौन थे महाराणा प्रताप और क्या है उनकी महानता?

9 मई, 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ के राजपूताना राजघराने में जन्मे महाराणा प्रताप के पिता का नाम महाराणा उदयवीर सिंह तथा माता का नाम श्रीमती राणी जीवत कंवर जी था। जब पूरे भारत में मुगलकाल अपने चरम पर था और पूरा भारत मुगलों के गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब एक ही व्यक्ति था जो मुगलों की आंखों में आंख डालकर बात कर सकता था, वो थे- महाराणा प्रताप। 80-80 किलो के भाले और कवच के साथ लड़ने वाले प्रताप एक ऐसे शासक थे, जिन्हें मुगलों की गुलामी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं थी।

क्या है महानता का पैमाना?

महानता राज्य की विशाल सीमा, सेना और राजकोष से तय नही होती, बल्कि शासक को उसकी करुणा, प्रजा वत्सलता महान बनाती हैं। महाराणा को हम उनकी प्रजा के प्रति स्नेह, युद्धभूमि में भी धर्म के अनुसार आचरण के लिए याद रखते हैं। महाराणा के जीवन के ये कुछ उदाहरण हैं जो उनकी महानता साबित करेंगे।

स्त्रियों के प्रति सम्मान

कहा जाता है कि जब मुगल हिंदू राजाओं को परास्त करते थे, तो उनके महलों की स्त्रियों को अपनी हवस का गुलाम बना लेते थे। अकबर इन महिलाओ को पकड़कर दिल्ली में ‘मीना बाजार’ लगवाता था। ठीक वैसे ही जैसे आज ISIS कुर्द महिलाओ की नीलामी का बाजार लगवाता हैं। राजमहलों की औरते यौन दासी बनाई जाती थीं।

महाराणा तथा उनके पुत्र अमर सिंह इससे भली भांति अवगत थे। एक बार अमर सिंह ने मुगलों की एक बड़ी फौज़ को परास्त करके उनके सेनापति अब्दुल रहीम खानखाना की स्त्री समेत पूरे जनानखाना को महाराणा के सामने पकड़कर लाए। अपने पुत्र के इस कृत्य से प्रताप अत्यंत क्रोधित हो उठे और स्वयं मुगलों के जनानखाने के पास गए और अपने पुत्र के कृत्य के लिए माफी मांगी और उन्हें ससम्मान वापस भिजवाया। महिलाओ को यौन गुलाम बनाने वाले अकबर या उसकी सेना से ऐसी उम्मीद कर सकते हैं?

महाराणा की सोशल इंजीनियरिंग

राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिए जाति-धर्म के आधार पर लोगो को लड़ाने वाले नेताओं को महाराणा प्रताप के जीवन से सबक लेना चाहिए। महाराणा आज से साढ़े चार सौ साल पहले भील-क्षत्रिय एकता के सिद्धांत के शिल्पकार थे, प्रताप का घोष था ‘भीली जायो-राणी जायो भाई-भाई!’ जिसका मतलब हैं भीलों और राजपूतो के पुत्र आपस में भाई-भाई हैं। यह सोच थी एक राजपूत राजा की थी। यहाँ तक की वह अपने फैसले भी भीलों के बीच बैठकर लिया करते थे।

भीलों के साथ प्रताप के साथ जैसा रहा, वैसा अन्य किसी शासक का नहीं रहा। महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा की फौज के लिए तलवारें बनाई। इसी समाज को आज गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाढ़िया लोहार कहा जाता है। सोचिये जिस राजा के पास राज नही धन नही यहाँ तक की भोजन नही उसके बावजूद इन छोटी जातियों ने उनका साथ नही छोड़ा भूखे पेट उनके लिए हथियार बनाये, उनके साथ युद्ध लड़े। कुछ तो बात रही होगी ना महाराणा। अकबर से हारा इलाका उन्होंने इन्ही भीलों और लोहारो की सेना बनाकर वापस दुबारा जीत लिया था।

युद्ध भूमि में धर्मराज की भूमिका

प्रताप की पहली गुरु मां जयवंता बाई ही थी। प्रताप एक बार अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे। वे एक निहत्थे साथी पर प्रहार किए जा रहे थे। मां ने प्रताप को बुलाया और समझाया-बेटा, शूरवीर जीवन में कभी निहत्थे पर वार नहीं करते। तुम शूरवीर हो। अगर दुश्मन की तलवार टूट भी गई हो तो उसे अपनी तलवार दे दो और युद्ध करो। अवाक प्रताप ने पूछा-मां, मैं अपनी तलवार दे दूंगा तो लड़ूंगा कैसे? इस पर मां बोली-तुम दो तलवार रखना। और इसके बाद प्रताप ने आजीवन दो तलवारें रखीं। ऐसे कई मौके आए, जब शत्रु को अपनी तलवार उन्होंने दी। हल्दीघाटी युद्ध से ठीक पहले जब मानसिंह ने मेवाड़ पर आक्रमण के लिए पूरी सेना के साथ डेरा डाल दिया था तो युद्ध की पहली शाम मानसिंह शिकार के लिए गया। प्रताप को अपने सेना नायकों से सूचना मिली कि क्यों मान सिंह को अभी गिरफ्तार कर लें या फिर आज ही मौत की नींद सुला दें। प्रताप ने साफ मना कर दिया और कहा : उससे तो युद्ध में ही सामना करेंगे।

क्या आप ऐसे कार्य की उम्मीद मुगल सेना और अकबर के लिए सोच सकते हैं? युद्धकलाये सीख कर सर्वश्रेष्ठ योद्धा तो कोई भी बन सकता हैं पर एक बेहतर इंसान आदमी खुद ही बनता हैं।

चित्तौड़गढ़ जितने पर क्या किया अकबर ने?

यह भी जान लीजिए कि चित्तौड़गढ़ जितने पर अकबर ने क्या किया। अजमेर की चिश्ती दरगाह पर उसने ‘फतहनामा-ए-चित्तौड़’ जारी किया था। उसे पढ़िये, उस के हर वाक्य से जिहादी जुनून टपकता है। उस युद्ध में 8 हजार राजपूत स्त्रियों ने जौहर कर प्राण त्याग दिए और अकबर ने राजपूत सैनिकों के अलावा 30 हजार सामान्य नागरिकों का भी कत्ल किया। सभी मृत पुरुषों के जनेऊ जमा कर तौला गया, जो साढ़े चौहत्तर मन था। यह केवल एक बार में, एक स्थान पर! आज भी राजस्थान में ‘74½’ का तिलक-नुमा चिन्ह किसी वचन पर पवित्र मुहर जैसा इस्तेमाल होता है, कि जो इस वचन को तोड़ेगा उसे बड़ा पाप लगेगा!

अब सवाल ये है कि महाराणा के द्वारा धर्म तथा स्त्रियों के प्रति किए गए इतने महान कार्य इस देश के इतिहासकारों को क्यों नहीं दिखा? क्यों उन्होनें हजारों मंदिर तोड़ने वाले, लाखों हिंदूओं का नरसंहार, बलात्कार और धर्मांतरण करवाने वाले इस्लामी आक्रांताओं को महान बना दिया? इस देश के बहुसंख्यक हिंदूओं को ये बताया गया कि इस्लामी आक्रांता महान थे और जो असल में महान था, उनका इतिहास ही गायब कर दिया गया। इसका सिर्फ एक ही जवाब हैं वोटबैंक की राजनीति और आज कांग्रेस वही कर रही हैं।

Report By: @ShivangTiwari_