दिल्ली की अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद एक भी नई बस नहीं खरीदी गई, यह खुलासा एक आरटीआई रिपोर्ट से हुआ है। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) से पूछे गए सवाल में यह जानकारी निकल कर सामने आई कि फरवरी 2015 से लेकर अप्रैल 2019 के बीच केजरीवाल सरकार एक भी नई बस नही खरीद पाई है।

इससे पता चलता है की सार्वजनिक परिवहन सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए केजरीवाल सरकार कितनी गम्भीर है। आपको बता दे की दिल्ली परिवहन निगम के बेड़े में छह साल में एक भी नई बस शामिल नहीं हुई, जबकि 2 हजार से ज्यादा बसें कबाड़ में जरूर तब्दील हो गयी। आम आदमी पार्टी ने दिल्लीवासियों को विश्वस्तरीय परिवहन सुविधा देने का वादा किया था, मगर बसों को कम करने का जो सिलसिला कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुआ था वह आज भी जारी है।

आलम ये है कि कुछ रूटों से डीटीसी बसें पूरी तरह गायब हैं। इस कारण यात्रियों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई रूटों पर रात 8 बजे के बाद बस स्टॉप पर यात्री बस का इंतजार ही करते रह जाते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक डीटीसी के बेड़े में 31 मार्च 2011 को 6197 बसें थीं। अब डीटीसी के पास 3700 बसें हैं। इनमें 2455 नॉन एसी एवं 1245 एसी बसें हैं। ये बसें इसलिए कम हुई हैं कि सरकार ने धीरे धीरे बिना दरवाजों की स्टेंडर्ड बसों को सड़कों से हटा लिया है। फिलहाल जो डीटीसी की बसें हैं उनमें से भी सड़कों पर 3689 बसें चल रही हैं, बाकी 11 बसें चलने की हालत में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ डीटीसी के घाटे में भी लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है।

दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को सुलभ बनाने के लिए कुल 11000 बसों की जरूरत है। इसमें 5500 बसें डीटीसी की और 5500 बसें क्लस्टर स्कीम के तहत सड़कों पर आनी थीं। मगर डीटीसी ने 2011-12 के बाद से एक भी नई बस नहीं खरीदी है। वर्तमान में डीटीसी के बेड़े में 3700 बसें है। इसी तरह क्लस्टर स्कीम के तहत भी महज 1648 बसें सड़क पर है।

ऐसे में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2020 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए दिल्ली में मेट्रो और डीटीसी की बसों में महिलाओं के फ्री सर्विस की घोषणा की है। दिल्ली सरकार का यह फैसला अगले कुछ महीनों में लागू होगा। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि केजरीवाल सरकार अपना यह महत्त्वकांक्षी वादा कैसे पूरा कर पायेगी, क्योकि इससे तो डीटीसी बसों पर और ज्यादा बोझ बढ़ेगा।

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