भारत में बनी बुलेटप्रूफ जैकेट और हेल्मेट पूरी दुनि‍या में तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं। इस समय 100 से ज्‍यादा देशों की 230 सेनाओं को भारत की बनी बुलेटप्रूफ जैकेट एक्‍सपोर्ट हो रहे हैं। जि‍न देशों में इनका इस्तेमाल हो रहा है, उनमें अमेरि‍का, ब्रि‍टेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे विकसित देश भी शामि‍ल हैं। बुलेटप्रूफ जैकेट के उत्‍पादन में प्राइवेट सेक्‍टर का दबदबा है और फरीदबाद इसका मैन्‍युफैक्‍चरिंग हब बन गया है।

खास बात यह है कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने बुलेटप्रूफ जैकेट का मानक तैयार कर लिया है। जो घातक हथियार एके 47 की गोलियों से बचाव करने में सक्षम है। खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी देते हुए बताया कि बुलेटप्रुफ जैकेट के लिए जो अंतरराष्ट्रीय मानक है उससे उच्च गुणवत्ता का मानक तैयार किया गया है।

बुलेटप्रूफ जैकेट की सबसे अच्छी टेक्नोलॉजी 

गौरतलब है कि एक ही झटके में सामने वाले का काम तमाम करने वाली घातक बंदूकें बनाने का हुनर दुनिया के मुट्ठी भर देशों के पास है। लेकिन आपको शायद ही पता हो कि ऐसी घातक बंदूकों ने निकलने वाली गोलियों से किसी की जान बचाने की सबसे बेहतरीन बुलेटप्रूफ जैकेट की टेक्‍नोलॉजी सिर्फ भारतीयों के पास है। भारतीय बुलेटप्रूफ जैकेट को सबसे खास बनाती है इसकी बेहद कम कीमत और दुनिया की सभी बुलेटप्रूफ जैकेट से कम वजन।

हलके वजन की सबसे सस्ती बुलेटप्रूफ जैकेट

इस जैकेट में बोरोन कार्बाइड के प्लेट लगाए गए हैं, जिसके कारण इसका वजन साढ़े सात से आठ किलोग्राम है। पहले बुलेटप्रूफ जैकेट दस से साढ़े दस किलो वजन का होता था। देश की सुरक्षा एजेंसियां करीब एक लाख 86 हजार ऐसे जैकेट खरीद रही हैं। पहले विदेश से बुलेटप्रूफ जैकेट की खरीद की जा रही थी, जिसका मूल्य एक लाख रुपये से अधिक हुआ करता था। अब सुरक्षा एजेंसियां एक जैकेट 35000 रुपये की दर से खरीद रही हैं।

पीएम मोदी के प्रयासों का नतीजा

दरअसल केंद्र की मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में अर्धसैनिक बलों, आर्मी और राज्य की पुलिस के लिए मुहैया कराई जाने वाली बुलेट प्रूफ जैकेट को लेकर एक बड़ा कदम उठाया था। यह कदम था इंडियन स्टैंडर्ड के आधार पर बुलेटप्रूफ जैकेट तैयार करना, जो भारत में पहली बार था।

इसके तहत 6 लेवल की बुलेटप्रूफ जैकेट को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स यानी बीआईएस (BIS) के मानक के तहत तैयार करने का प्रावधान किया गया था। यह बुलेटप्रूफ जैकेट खतरनाक स्टील बुलेट को भी झेल पाने में सक्षम है। भारत में इससे पहले बुलेटप्रूफ जैकेट नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जस्टिस (NIS) अमेरिका के स्टैंडर्ड पर तैयार होती थी।

कैसे बनती है बुलेटप्रूफ

सबसे पहले केवलर नाम के फाइबर की रसायनों के एक घोल में कताई होती है और उसकी मदद से धागे की बड़ी-सी रील तैयार की जाती है। फिर उस धागे से बैलिस्टिक शीट (चादर) की कई परत तैयार की जाती है, जिनको आपस में मजबूती से सिलकर कई पैनल या प्लेट बनाए जाते हैं। फिर उन पैनलों को एक जैकेट में फिट किया जाता है। जैकेट में बैलिस्टिक पैनलों को फिट करने के लिए जेबें होती हैं।

कैसे काम करती है बुलेटप्रूफ जैकेट?

कोई जब सामने से गोली मारता है तो गोली पहले बैलिस्टिक पैनलों से टकराती है। इससे उसकी रफ्तार कम हो जाती है और वह छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर जाती है। फिर गोलियों की भेदने की क्षमता कम हो जाती है और जैकेट पहने हुए इंसान के शरीर के संपर्क में नहीं आ पाती। गोली के टुकड़ों में बिखरने के बाद उससे बड़ी मात्रा में निकलने वाली ऊर्जा को बैलिस्टिक प्लेट की दूसरी परत सोख लेती है। इससे बुलेटप्रूफ पहने इंसान को कम नुकसान पहुंचता है।

फरीदाबाद बन गया है हब

बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने के मामले में प्राइवेट सेक्‍टर का दबदबा है। दिल्‍ली से सटा शहर फरीदाबाद बुलेटप्रूफ जैकेट निर्माण का बड़ा हब बन गया है। यहां की कुछ कंपनियां कई दशक से इसका निर्माण कर रही हैं। यहां की स्‍टार वायर कंपनी को गृह मंत्रालय की ओर से बड़ा ऑर्डर भी मिल चुका है। अन्‍य कंपनियों में इंडियन आर्मर सिस्‍टम हर माह लगभग 10,000 जैकेट बनाती है। कंपनी का सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रुपए के करीब है। यहां से बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदने वालों में यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) और घाना आर्म्‍ड फोर्सेज भी शामिल हैं।