कांग्रेस (congress) और लालू प्रसाद यादव की राजद (RJD) ने गंगा जी की पुरानी तस्वीरें पोस्ट करते हुए यह बताने की कोशिश की गंगा नदी की सफाई का दावा झूठा है, नमामि गंगे परियोजना फेल है और गंगा जी अभी भी साफ नही हुई है। तस्वीरों में गंगा नदी के तट पर ढेर सारी गंदगी और कचरा दिखाई दे रहा है। यहाँ तक की इसके साथ उन्होंने पाकिस्तान की कई इलाकों को गंगा नदी का बताते हुए भी तस्वीर पोस्ट की। ऐसा लगता हैं, जैसे कांग्रेस और राजद आज भी सत्तर के दशक में जी रही हैं। तभी वह लोग समय-समय पर फेक न्यूज़ और फेक फोटो पोस्ट करते रहते हैं।

इनको यह भी नहीं पता कि एक स्कूली बच्चा भी गूगल की सहायता से पांच मिनट में पता कर लेगा कि यह फोटो कब की हैं और कहाँ की हैं। लोक सभा के चुनाव पास हैं और कांग्रेस वही सत्तर और अस्सी के दशक वाले हथकंडे अपना रहें हैं। इसी चक्कर में बार बार मुँह की खाते हैं, लेकिन बाज़ नहीं आते।

अब ये दोनों पार्टियां नमामि गंगे के पीछे पड़ी हैं। गुजरात कांग्रेस और राजद का यह कहना है कि नमामि गंगे परियोजना पर कोई प्रगति नहीं हुई हैं। इन दोनो पार्टियों ने 2015 की गंगा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी ये कहते हुए कि गंगा अभी भी कितनी मैली हैं। राजद के तेजस्वी यादव ने तो पाकिस्तान की एक गंदे इलाके की तस्वीरें लगा कर उसको हिंदुस्तान की बता दी। यह सब उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किया। कई ट्विटर यूजर्स ने भी इस पोस्ट को बिना सोचे-समझे शेयर किया है। राष्ट्रीय जनता दल की पोस्ट पर हजार से ज्यादा लाइक्स है और इसे 1900 से ज्यादा बार रीट्वीट किया गया है।

2014 में लोक सभा चुनाव के समय अरविन्द केजरीवाल की पार्टी AAP भी नरेंद्र मोदी के खिलाफ यही हथकंडे अपनाती थी और कुछ ही देर में पकड़ी जाती ही, लेकिन आत्मसम्मान और तथ्य दो अलग अलग चीजे हैं, इन पार्टियों के लिए।

गूगल रिवर्स सर्च करने पर पता चला कि, गंगा जी की पहली फोटो 20 फ़रवरी, 2015 की हैं। तीसरी फोटो भी जुलाई 2015 की हैं। तब नमामि गंगे अपने शुरुआती दौर में था। चौथी फोटो करांची के एक गंदे रेलवे प्लेटफार्म की हैं।

जबकि गुजरात कांग्रेस दावा कर रही है कि 20,000 करोड़ खर्च करने के बाद भी गंगा जी निर्मल नहीं हुई हैं। इन लोगों ने 2015 का एक पुराना वीडियो भी डाला हैं।

जिसमे यह दिखाया गया हैं की गंगा जी अभी भी मैली की मैली ही हैं। हालांकि तब तक नमामि गंगे शुरू हुए अभी एक साल भी नहीं हुए थे। कांग्रेस ने तो दो कदम आगे जा कर 2012 का एक वीडियो पोस्ट कर डाला और लोगो को बताया की गंगा जी की सफाई का कार्य पूरी तरह से नाकाम रहा हैं। जबकि 2012 में खुद कांग्रेस की ही सरकार थी।

हालांकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा गंगा जी की बोट यात्रा पर थी, उनके साथ पत्रकारों की लंबी चौड़ी फ़ौज थी। अगर गंगा नदी गन्दी होती तो उन्हें दो-चार ताजी तस्वीरे पोस्ट करना था। यहाँ तक कि उन्होंने गंगा जल से आचमन करते हुए उसे ग्रहण भी किया। अब अगर गंगा जी गन्दी थी तो वह गंगा जल क्यों ग्रहण करती?

सच्चाई यह है की 20 हजार करोड़ नमामि गंगे का कुल बजट हैं। जो कि अभी खर्च भी नहीं हुआ हैं। सेंट्रल पोलुशन बोर्ड ने पहले ही लोक सभा को रिपोर्ट दिया हैं, की गंगा जी कई जगहों पर निर्मल और शुद्ध हो चुकी हैं। सत्यपाल सिंह जो कि केंद्र में जल संसाधन मंत्री हैं, उन्होंने बताया हैं की गंगा जी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा 33 जगहों पर बढ़ी हैं। ये जगहे हैं, ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज संगम, कानपुर, वाराणसी अस्सी घाट, पटना, और पश्चिम बंगाल में भी चार जगहे हैं, डायमंड हार्बर , गार्डन रीच , बेहरामपुर और हौराह शिबपुर।

कहने का मतलब यह है की, कुम्भ में हजार लाख ने नहीं बल्कि करोड़ो लोगो ने गंगा जी की शुद्ध, निर्मल धारा को देखा, इसके बावजूद कांग्रेस और आरजेडी अगर सोचते हैं कि जनता की आँख में धूल झोंक सकते हैं, तो उनकी बुद्धि पर तरस की खाया जा सकता हैं और कुछ नहीं किया जा सकता।

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