पुलवामा हमले के बाद डिजाइनर पत्रकार किसी भी तरह से देश का नैरेटिव बदलना चाहते हैं। कश्मीरियों को पीड़ित दिखाने के लिए यह लोग किसी भी हद तक गिरने को तैयार हैं। यहाँ तक कि कश्मीरियों पर हमले हो रहे हैं, कश्मीरी छात्र सुरक्षित नहीं हैं, जैसी फर्जी खबरें फैलाने से भी बाज नहीं आ रहे। ताजा मामला महाराष्ट्र के पुणे का है। आज देश के जाने माने मीडिया हाउस इंडियन एक्सप्रेस ने एक खबर छापी, जिसमें एक कश्मीरी पत्रकार पर हमले की बात कही गई। अखबार ने लिखा है कि सिर्फ कश्मीरी होने की वजह से पत्रकार जिबरान नज़ीर पर पुणे में कुछ लोगों ने हमला कर दिया।

अखबार ने नज़ीर का ट्वीट भी छापा है, जिसमे उन्होंने कहा है, “मुझ पर जो हमला हुआ, वह सुनियोजित था। मैंने आरोपियों के खिलाफ शिकायत वापस ले ली है। लेकिन जाहिर तौर पर ऐसी भीड़ पुणे के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है।” आगे उन्होंने मुंबई के पुलिस कमिश्नर को टैग करते हुए इस मामले में ध्यान देने का निवेदन किया है।

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अब आगे देखिए अखबार ने क्या लिखा है। उसमे लिखा है कि नज़ीर मोटरसाइकिल चला रहा था और तिलक रोड पर गिरिजा होटल के पास ट्रैफिक सिग्नल लाल होने की वजह से वह रुक गया। थोड़ी देर बाद वहां दो युवक आते हैं और उससे कहासुनी शुरू कर देते हैं। जब नज़ीर कहता है कि वह जम्मू कश्मीर से है, तो वे उसे वापस जाने के लिए धमकी देने लगते हैं और उस पर हमला कर देते हैं।

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थोड़ी देर बाद इंडियन एक्सप्रेस का झूठ एक पत्रकार ने ही ढेर कर दिया। आजतक के वरिष्ठ पत्रकार सचिन सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस के इस खबर को कोट करते हुए ट्वीट किया, “आपको और अधिक जिम्मेदार होने की जरूरत है। यह मामला दो वाहन चालकों के बीच आगे निकलने का है। उसपर कश्मीरी होने की वजह से हमला नहीं हुआ। उसने कोई शिकायत भी दर्ज नहीं कराई है।”

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लेकिन सचिन सिंह की बात से पहले तो नज़ीर पर भी सवाल उठता है कि जब उनपर कश्मीरी होने की वजह से हमला हुआ, तो वो मुकदमा दर्ज कराने के बाद वापस क्यों लिए? क्या उन्होंने भारत के दूसरे राज्य के लोगों और वहां की सरकारों को बदनाम करने के लिए ऐसा किया?

सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस ने ही नहीं, देश का सबसे स्वघोषित निष्पक्ष मीडिया हाउस एनडीटीवी और प्रिंट मीडिया अमर उजाला ने भी कुछ इसी तरह की हेडलाइन के साथ खबर चलाई। इन्होंने भी ये सिध्द करने की कोशिश की कि देश के दूसरे राज्यों में कश्मीरियों पर हमले हो रहे हैं। हालांकि, अभी तक पुलिस ने ऐसे किसी एक भी मामले की पुष्टि नहीं की है, जिसमे किसी कश्मीरी को सिर्फ कश्मीरी होने की वजह से पीटा गया हो।

सिर्फ कुछ पत्रकार देश के नैरेटिव बदलना चाहते हैं और इस खबर में भी ऐसा ही हो रहा था, लेकिन एक आरोपी के मुस्लिम होने की वजह से उनका एजेंडा पहले ही फ्लॉप हो गया। आपको बता दे इस मामले में अजहरूद्दीन शेख (32) और दत्तात्रेय लावते (35) आरोपी बनाए गए थे। गौरतलब है, नजीर की बाइक का रजिस्ट्रेशन नम्बर हिमांचल प्रदेश का हैं। क्या ऐसे में किसी को सपना आना था कि नजीर कश्मीरी हैं? या फिर उसने अपने माथे पर कश्मीरी होने का लेबल चिपकाया हुआ था।

हमें देश के नागरिकों के धैर्य की तारीफ करनी पड़ेगी। कश्मीरियों ने देश विरोधी नारे लगाए, देहरादून में सड़क पर जाते लोगों पर पत्थर फेंके, यहाँ तक कि जवानों की शहादत पर जश्न मनाया लेकिन फिर भी वह भड़के नहीं और ना ही कोई मामूली हिंसा की भी घटना सामने आई। उन्होंने ऐसे असामाजिक तत्वों की रिपोर्ट पुलिस तथा उनके इम्पलॉयर से करके उन्हें जेल भिजवाया और नौकरी से निकलवाया। सभी का बेहद शांति और धैर्य के साथ कानूनी तरीके से जवाब दिया। Epostmortem की पूरी टीम देश के नागरिकों के धैर्य की तारीफ करती है और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कानूनी तरीके से मोर्चा खोलने के लिए सलाम करती है।

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