Fact Check: क्या Parle G वाकई है मंदी का शिकार, या फिर रची जा रही है कोई साजिश, जानिए यहाँ

- Advertisement -

पिछले दो दिनों से देश की सबसे बड़ी बिस्किट निर्माता कंपनी पार्ले प्रोडक्ट्स (Parle Products) से 8 से 10 हजार कर्मचारियों की छंटनी की खबरें सुर्खिया बनी है। कंपनी के प्रबन्धको ने इसके पीछे दो कारण बताए। पहला बिस्कुट की मांग में मंदी है और दूसरा GST की दरें ज्यादा है। मगर क्या वाकई पारले जी मंदी की शिकार हो रही है या फिर यह कोई साजिश है। यहाँ हम इसी का पड़ताल करेंगे।

जब हमने इस मामले की पड़ताल शुरू की तो हमारे हाथ बेहद चौकाने वाले तथ्य हाथ लगे। सबसे पहले हमारे हाथ The Hindu की सहयोगी बिजनेस वेबसाइट की आंकड़े लगे है। जिसके मुताबिक पारले एग्रो ने नेट 21 फीसदी का मुनाफा कमाया।

- Advertisement -

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कम्पनी के रेवन्यू में 2018-19 के वित्तीय वर्ष में नेट 7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह वृद्धि 10 फीसदी थी। फिर भी कम्पनी ने शुद्ध 356 करोड़ रुपये का मुनाफा मार्च 2019 में कमाया।

इन आंकड़ों की पुष्टि कम्पनी की MD चौहान बहनो ने मार्च 2019 में दिए एक इंटरव्यू के दौरान भी किया जिसे आप यहाँ देख सकते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि 300 करोड़ की कम्पनी को 5 साल में 5 हजार करोड़ की कम्पनी बनाने वाली ये बहने सिर्फ 5 महीने में घाटे में कैसे चली गयी? यह कोई साजिश है या फिर वाकई 5 महीने में देश डूब गया। आगे इसके कारणों की उदाहरण के साथ पड़ताल करते है।

ब्रिटानिया को 10 साल में 2,200% रिटर्न

प्रतिद्वंद्वी कम्पनी ब्रिटानिया की बात करें तो उसने पिछले पांच साल में 775 फीसदी और दस साल में 2,192 फीसदी की छलांग लगाई है। इस दौरान अगस्त 2008 से अगस्त 2018 के दौरान कंपनी का मार्केटकैप 3,200 करोड़ रुपये से उछल कर 76,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गया है।

इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक पिछले एक दशक में कंपनी का रेवेन्यू और मुनाफा, दोनों ही दोहरे अंकों में बढ़े हैं। वित्त वर्ष 08 से वित्त वर्ष 18 के दौरान, इस बिस्कुट की दिग्गज कंपनी की बिक्री और मुनाफा क्रमश: 14 फीसदी और 19 फीसदी की दर से बढ़ा है। जानकारों के अनुसार, कंपनी को जीएसटी से काफी लाभ हुआ है।

इतना ही नहीं, कंपनी के आंकड़े और रिटर्न चकित करने वाले हैं। पिछले एक साल में शेयर ने 54 फीसदी और 3 साल में 101 फीसदी का रिटर्न दिया है। इस दौरान सेंसेक्स क्रमश: 17 फीसदी और 33 फीसदी चढ़ा है।

यह सारे आंकड़े कम्पनी के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा दिये गए है। एकतरफ ये कहते है कि GST से इन्हें बहुत फायदा हुआ जो इनकी बैलेन्स शीट में भी दिख रहा है। दूसरी तरफ ये सरकार पर GST की दरें कम करने का दबाव बना रहे है।

फायदे के बाद भी इनके रोने का कारण क्या है?

दरअसल यह स्थापित सत्य है कि मीडिया में वर्तमान मोदी सरकार विरोधी पत्रकारों का बोलबाला है। ये लोग पिछले 5 साल से यह साबित करने का प्रयास कर रहे है कि जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से देश की अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़ी है और देश आर्थिक मंदी के चपेट में है।

ये कम्पनियां एक चतुर बनिये की तरह इस माहौल का लाभ लेकर सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही है कि इन्हें सरकार एक आर्थिक पैकेज दे। GST के रेट कम करें ताकि ये ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमा सके। ये इतने चालाक है कि मुनाफा हुआ तो अपना और नुकसान हुआ तो सार्वजनिक जिम्मेदारी पर डालना चाहते है।

पहले भी कर चुके है ऐसी हरकत

पारले जी की बात करे तो इसके पहले जब नोटबन्दी हुई तो उस समय भी इन्होंने सरकार पर दबाव बनाने कोशिश की थी। तब इन्होंने कहा था कि नोटबन्दी की वजह से बिस्कुट की बिक्री घट गई है।

पारले जी वाले कितने चतुर है इसका एक और उदाहरण, GST 1 जुलाई 2017 को लागू हुई थी और GST लागू होने के 6 महीने के अंदर इनके CEO ने बताया कि इनका रेवन्यू 66% से गिरकर 33% हो गया। इतनी बड़ी गिरावट दुनिया के किसी कम्पनी में इतने कम अंतराल पर नही देखा होगा।

दरअसल पारले जी कम्पनी मुनाफा बाँटने में यकीन नही रखती, इसके चलते कम्पनी मजदूरों का शोषण करने से भी बाज नहीं आती। 16 जून 2019 को छत्तीसगढ़ रायपुर की फैक्ट्री में छापा पड़ा और 27 बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया जो बिना किसी पेपर के कम वेतन पर काम करते थे।

ऐसा ही हाल पारले जी की उत्तराखंड की सितारगंज की फैक्टी है जहां मजदूर 30 जुलाई से बेहतर वेतन और सुविधाओं को लेकर धरने पर बैठे है। एक अन्य जानकारी के मुताबिक इनके अधिकतर कर्मचारी आउटसोर्स पर है जिन्हें बेहद कम वेतन पर अस्थायी नौकरी पर रखा गया है। सरकार को इनके इन मामलों की जांच करानी चाहिए।

पारले ने अपने प्रोडक्ट अपग्रेड नही किये

यहाँ एक तथ्य और हम पाठकों के सामने रखना चाहेंगे की, पारले की बिस्कुट मार्केट की मांग के हिसाब से अपग्रेड नही हो रहे है और ना ही पिछले कई सालों में उन्होंने बिस्कुट का कोई प्रतिस्पर्धी ब्रांड मार्केट में उतारा है। ग्लूकोज बिस्कुट आजकल कौन खाना पसंद करता है? जब उसी कीमत में उससे बेहतर बिस्कुट बाजार में उपलब्ध हो। ब्रिटानिया के गुड डे और न्यूट्रीचॉइस जैसे बड़े ब्रैंड्स के बिस्कुट के सामने पारले जी का कोई भी ब्रांड नही ठहरता।

यही वजह है कि दशकों से बिस्कुट बाजार में एकछत्र राज करने वाली कम्पनी पारले को ब्रिटानिया ने काफी पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही बाजार में बिस्कुट की नई कम्पनियां भी लांच हुई उन्होंने उपभोक्ता को उनकी सेहत और स्वाद के आधार पर एक बड़ी रेंज दी। यह भी वजह है पारले के पिछड़ने का, वह अपनी नीतियों के चलते बाजार से अधिपत्य खो रही है। जनरल मोटर्स तो किस्सा सबको मालूम होगा अम्बेसडर कार बनाने वाली भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कम्पनी सिर्फ इसलिए बन्द हो गयी कि उसने मार्केट और उपभोक्ता की जरूरतों को हिसाब से खुद को अपग्रेड नही किया। बाजार बहुत निर्मम है यहाँ टिकता वही है जो बाजार के हिसाब से चले।

मंदी शब्द का इस्तेमाल अकारण 

मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने हीरो माइंडमाइन समिट 2019 को संबोधित करते हुए कहा कि थोड़ी बहुत सुस्ती के बावजूद दुनियाभर में भारत अभी भी एक चमकता सितारा है, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था महज 2-2.5 फीसदी की दर से आगे बढ़ रही है।

समिट के पैनल में शामिल सभी लोगों ने इस बात से सहमति जताई कि लोग इन दिनों अकारण ही ‘मंदी’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि वैश्विक हालात अभी भी नियंत्रण में नहीं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि राजकोषीय हालात पर विचार करने के बाद ही घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए किसी भी स्टिम्युलस के बारे में बात की जानी चाहिए।

New Update : पारले प्रॉडक्ट के सीनियर कटेगरी हेड ने कहा कि सिर्फ 5 रुपये के पैक (100 रुपये किलोग्राम) में बिकने वाले बिस्कुट की सेल 7-8% गिरी है। कम्पनी प्रॉफिट में है और किसी की भी नौकरी नही जा रही है। पूरा इंटव्यू यहां देखे।

- Advertisement -
Awantika Singhhttp://epostmortem.org
Social media enthusiast , blogger, avid reader, nationalist , Right wing. Loves to write on topics of social and national interest.
error: Content is protected !!