आजादी की लड़ाई में मुसलमानों के योगदान का जिक्र करते हुए पिछले दिनों मुंबई की एक रैली में एआईएमआईएम पार्टी (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक दावा किया। ओवैसी का कहना है कि इंडिया गेट पर 95300 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे हैं जिनमें 61945 मुसलमान हैं।

ओवैसी ने मुंबई के चांदीवली इलाक़े में 13 जुलाई 2019 को यह भाषण दिया था जिसके कुछ हिस्से अब सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं।

अपने इस भाषण में ओवैसी ने दावा किया था, “जब मैं इंडिया गेट गया तो मैंने वहाँ उन नामों की फ़ेहरिस्त को देखा जिन्होंने हिन्दुस्तान की आज़ादी के लिए अपनी जान गंवा दी। उस इंडिया गेट पर 95,300 लोगों के नाम लिखे हुए हैं। आपको ये जानकर ख़ुशी होगी कि उनमें से 61,945 सिर्फ़ मुसलमानों के नाम हैं,यानी 65 फ़ीसदी सिर्फ़ मुसलमानों के नाम हैं।”

इसके बाद ओवैसी ने सभा में मौजूद लोगों से कहा कि बीजेपी, आरएसएस और शिवसेना का कोई आदमी अगर उनसे कहे कि वो देशभक्त नहीं हैं, तो वो उसे इंडिया गेट देखकर आने को कहें। फेसबुक और ट्विटर पर भी यही दावा किया गया है।

जानिए क्या है ओवैसी के दावे की सच्चाई

ओवैसी का यह दावा पूरी तरह से फर्जी है। पहली बात इंडिया गेट पर जिन सैनिकों के नाम लिखे है उन लोगो ने भारत की आजादी की लड़ाई में हिस्सा ही नही लिया। दरअसल वह अंग्रेज सरकार के सैनिक थे और उन्होंने विश्व युद्ध मे अपनी शहादत दी थी।

सोशल मीडिया पर वायरल

फेसबुक पर इस दावे के साथ ये वीडियो वायरल है, कई यूजर्स जैसे “I Support Aimim Party” और रेणु आनंद  ने दावे के साथ लिखा  ‘क्रांतिकारी जय भीम

दिल्ली के इंडिया गेट पर कुल 95,300 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम हैं….

जिनमें मुसलमान -61395

सिक्ख – 8050

पिछड़े वर्ग के – 14480

दलित -10777

सवर्ण – 598 संघी मतलब आरएसएस वाले – 00

मतलब फिर भी कुछ बेशर्म भगवाधारी लोग मुसलमानों को गद्दार और दलितों को देशद्रोही बोलते हैं जबकि खुद उनके बाप दादाओं की जिंदगी अंग्रेजों की दलाली, मुखबिरी और चड्डी धोने में बीत गई और उनके बनावटी देशभक्त हमलोगों को देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटते हैं और अपने दोगले इतिहास कि झूठी शान बघारते है।”

दावे का फैक्ट चेक 

दिल्ली पर्यटन विभाग के मुताबिक इंडिया गेट की नींव ड्यूक ऑफ कनॉट ने 1921 में रखी गई, इसका डिजाइन इडविन लुटियन ने किया था और 10 साल बाद वायसराय लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया।

विश्व युद्ध के दौरान हजारों भारतीयों ने ब्रिटिश फौज की ओर से जंग लड़ी। इंडिया गेट एक युद्ध स्मारक है जो विश्व युद्ध के दौरान मारे गए सैनिकों की याद में बना है। इंडिया गेट के टॉप पर ‘INDIA’ शब्द खुदा है। उसके दोनों तरफ रोमन में तारीखें लिखीं हैं (1914) और (1919) on the right साथ ही ये भी लिखा है।

कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन की ऑफिसियल वेबसाइट के मुताबिक इंडिया गेट पर 13220 भारतीयों के नाम दर्ज हैं। इनमें 1919 के अफ़गान युद्ध में मारे गए भारतीय सैनिकों के नाम भी शामिल हैं। कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन ये एक ऐसी संस्था है जो दुनिया भर में युद्ध शहीदों का रिकॉर्ड रखती है।

फैक्ट चेक का निष्कर्ष
असद्दुदीन ओवैसी और कुछ और लोगों का ये दावा गलत है कि इंडिया गेट पर आजादी के सिपाहियों के नाम खुदे हैं। इंडिया गेट पर सिपाहियों ने नाम लिखे हैं जो विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना की ओर से शहीद हुए। इनकी कुल संख्या 13220 है न कि 95300 जैसा कि दावा किया जा रहा है।