हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसको लेकर कहा जा रहा है कि उन्होंने कश्मीर से बहू लाने की बात कही है। बता दें कि इस फर्जी खबर को कई न्यूज चैनलों ने दिखाया है। लेकिन मनोहर लाल के उस वीडियो के देखकर आप भी समझ जाएंगे कि मामला कुछ और ही है।

जानिए क्या है सच

मुख्यमंत्री मनोहर लाल हरियाणा के लिंग अनुपात पर एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा है कि, “मोदी सरकार द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चलाया गया, लिंग अनुपात में हमारे हरियाणा का नाम बदनाम था। हरियाणा में लड़के-लड़कियों की संख्या 1000-850 थी, अब अनुपात 1000 लड़कों के पीछे लड़कियों की संख्या 933 हो गई है। ये बहुत बड़ा काम है, ये समाज परिवर्तन का काम है।”

इसके आगे उन्होंने कहा कि, “कोई भी व्यक्ति इस बात को समझेगा कि आने वाले समय में अगर लड़कियां कम हो और लड़के ज्यादा हो जाएं तो हमारे धनखड़ जी ने कहा कि बिहार से लड़कियां लानी पड़ेंगी, अब कुछ लोग कह रहे हैं कि कश्मीर खुल गया है वहां से ले आएंगे…मजाक की बातें अलग हैं लेकिन समाज में अनुपात ठीक होगा तो संतुलन बनेगा।”

वीडियो से साफ है कि CM मनोहर लाल ने खुद नहीं कहा, बल्कि लोगों के बयान को बताया है कि लोग अब ऐसी बातें कर रहे हैं। और उसके आगे उन्होंने ये भी कहा है कि “मजाक की बात अलग है”, जिसका साफ मतलब होता है कि उन्होंने भी इस बात को इतनी गंभीरता से नहीं लिया।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के इस बयान को मीडिया गिरोह अपनी तरफ से तोड़ मरोड़ कर दिखाने लगा। शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ की कॉरेस्पोंडेंट ज्योति यादव ने हरियाणा की लिंगानुपात को लेकर पूरे हरियाणा को ही निशाने पर लिया और वहाँ के लोगों को भला-बुरा कहा।

The Hindu ने भी अपने पोर्टल पर इस खबर को लेकर मनोहर लाल के इस बयान को विवादित बताया है। खबर में साफ कहा गया है कि “मनोहर लाल ने कहा कि अब कश्मीर से बहू ला सकते हैं।” लेकिन अगर आप मुख्यमंत्री मनोहर लाल का वो वीडियो देखेंगे तो आपको खुद पता चलेगा कि उन्होंने खुद से ऐसा कुछ कहा ही नही हैं।

कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने सीएम खट्टर को ‘घिनौनी और विकृत मानसिकता वाला व्यक्ति’ बता दिया। बिना जांच पड़ताल के ऐसे बयान देने की वजह से ही आज कांग्रेस का बंटाधार हो गया है। गांधी परिवार का रिश्तेदार होने के घमंड में एक मुख्यमंत्री को उस बयान के लिए अपशब्द कहे, जो बयान उन्होंने दिया ही नहीं था।

देशविरोधी नारो के चलते देशद्रोह के मुकदमा झेल रहे JNU के छात्र नेता उमर खालिद ने लिखा कि खट्टर जैसे मुख्यमंत्री के रहते हमें ट्रॉल्स की कोई ज़रूरत ही नहीं है। ये वही हैं जो ‘हर घर से अफजल’ निकालने की योजना चला रहे थे। इनका दर्द आप समझ सकते हैं।

प्रोपोगंडा वेबसाइट स्क्रॉल जो भारत से ज्यादा पाकिस्तान में पढ़ी जाती हैं उसने भी खट्टर के इस बयान को ग़लत तरीके से पेश किया, जिसे कुख्यात कांग्रेसी ट्रोल अशोक स्वेन ने शेयर करते हुए आरोप लगाया कि आरएसएस के लोग कश्मीरी लड़कियों को ‘सेक्स स्लेव’ बनाना चाहते हैं। स्क्रॉल की इस ख़बर को उनके पाकिस्तानी समर्थक और प्रशंसक हामिद मीर और अरशद शरीफ जैसे पाकिस्तानी पत्रकारों ने भी शेयर किया।

इसके अलावा और भी मीडिया संस्थानों ने इस फेक खबर को बिना जांच पड़ताल के शेयर किया। अब सवाल आता है कि जब खुद CM मनोहर लाल ने ही लोगों के ऐसे बयान को गंभीरता से नहीं लिया तो खबरों में उनके इस बयान को विवादित कैसे बताया जा रहा है? क्या खबरों की पड़ताल और उसकी गंभीरता पर ध्यान देना, पत्रकारिता के धर्म का हिस्सा अब नहीं रहा?