चुनाव आयोग के 72 घंटे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार (20 अप्रैल) को एक बार फिर अपने पुराने तेवर में नज़र आए। आदित्यनाथ ने अपने 36 मिनट के भाषण में पीएम मोदी और अपने द्वारा किए गये कार्यों के आधार जनता से वोट मांगा। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश में अपने विपक्षियों पर भी निशाना साधा।

दरअसल, शनिवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के गृह जिले इटावा के रामलीला मैदान में सीएम योगी की जनसभा थी। इस सभा में उन्होंने अखिलेश यादव और मायावती पर तंज कसते हुए कहा कि एक दूसरे के जानी दुश्मन आज गले मिल रहे हैं। उन्होंने अपने भाषण में आगे कहा कि मायावती ने कहा था कि बाबा साहब का संविधान ना होता तो आज अखिलेश यादव अपने गांव में गाय-भैंस चरा रहेे होते।

ध्यान देने की बात है कि आदित्यनाथ ने मायावती के बयान का हवाला दिया था, लेकिन बीजेपी के खिलाफ नफरत दिखाने के लिए जाना जाने वाला गैंग एक बार फिर उठ खड़ा हुआ और आदित्यनाथ के इस बयान को तोड़-मड़ोरकर ट्विटर पर शेयर करने लगा। एनडीटीवी की पत्रकार रोहिणी सिंह ने अपने एजेंडे को चलाने के लिए सीएम योगी के बयान को गलत तरीके से पेश किया और कहा कि सीएम ने छोटी जातियों का अपमान किया है।

वैसे रोहिणी सिंह का नाम उस गिरोह में शीर्ष पर है, जो फर्जी खबरें फैलाने और जाति धर्म देखकर आरोपियों और पीड़िताओं की आवाज उठाने के लिए जाना जाता है।

इनके अलावा द वायर के पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने भी कमोबेश यही लिखा कि सीएम योगी निचली जातियों को गाली दे रहे हैं और उनके खिलाफ अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं। अगर आप इनके ट्विटर टाइमलाइन पर जाएंगे, तो पाएंगे कि इनके अंदर हिंदूओं के प्रति इतनी नफरत भरी है कि इन्होंने साधू-संन्यासियों पर भी भद्दी टिप्पणियां की हैं।

बहरहाल, ये सभी तो पत्रकार हैं और एक पार्टी विशेष के खिलाफ अपना झंडा बुलंद करने वाले हैं। लेकिन खुद अखिलेश यादव के भतीजे और मैनपुरी के सांसद तेजप्रताप यादव ने भी इसी संबंध में अमर उजाला का एक लिंक शेयर करते हुए सीएम योगी पर निशाना साधा। मतलब आदित्यनाथ का विरोध करने के चक्कर में ये महाशय इतने अंधे हो गए कि उस लिंक को खोलकर पढ़ना तक मुनासिब नहीं समझा।

आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर जो टिप्पणी की, वो उन्होंने उन्हीं के गठबंधन की साथी मायावती के 2014 के उस बयान को क्वोट करते हुए कहा था, जिसमें मायावती ने कहा था कि अगर बाबा साहब का संविधान ना होता, तो मुलायम सिंह और अखिलेश यादव आज अपने गांव मेेंं गाय-भैंस चरा रहे होते।

लेकिन मोदी विरोध में अंधों को ये सब कहां दिखता।
पत्रकारों का धर्म है कि वो खबरों की हर सच्चाई को जनता के सामने रखें, लेकिन जब ऐसे लोग पत्रकारिता करने लगें, जिन्हें बस एक परिवार और पार्टी की गुलामी करने में ही आनंद आता है, तो उनसे सच्चाई की उम्मीद करना मूर्खता है।