अमेठी में शनिवार रात (27 जुलाई) को सेना के एक पूर्व अफसर की कुछ अज्ञात हमलावरों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। खबरो के मुताबिक जिले के कमरौली थाने के पुरवा गांव में कुछ अज्ञात हमलावरों ने अमानुल्लाह के घर में घुसकर उन पर हमला कर दिया। जिससे उनकी वहीं मौके पर ही मौत हो गई। दरबारी पत्रकारों और लेफ्ट लिबरल गिरोह के Hate Mongers सदस्यों ने इस घटना को अल्पसंख्यको के खिलाफ कथित Mob Lynching से पेश करने की नाकाम कोशिश की गई।

सबसे पहले इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के जीजा (रॉबर्ट वाड्रा) के जीजा यानी तहसीन पूनावाला सामने आए। तहसीन पूनावाला ने ट्वीट किया कि उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त सेना अधिकारी अमानुल्लाह खान भी Mob Lynching का शिकार हुए हैं। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिग को रोकने का एकमात्र उपाय “रासुका या मानव सुरक्षा कानून” को लाना है।

इसके बाद पत्रकार प्रशान्त कनौजिया (यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले) ने इस घटना को साम्प्रदायिक रंग देने के साथ मॉब लिचिंग के साथ भी जोड़ा। कनौजिया ने लिखा, “उत्तर प्रदेश के अमेठी में सेना से रिटायर्ड कैप्टेन अमानुल्लाह का मॉब लिंचिंग हो गया। अब सेना से प्यार नहीं है, बस मुसलमानों से नफ़रत है। शुरुआत एहसान जाफरी से हुई, अंत अब तुम्हारे घर होगा अगर अब आवाज़ न उठाई।”

कांग्रेसी ट्रोल अशोक स्वैन ने दो कदम और आगे बढ़कर इस घटना को Mob Lynching बताते हुए इसे स्मृति ईरानी इफेक्ट बताया। हालांकि उनकी स्मृति ईरानी से नफरत बहुत पुरानी हैं, जिसे वह गाहे बगाहे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शित करते बाज नही आते। स्मृति ईरानी ने जब से राहुल गांधी को लोकसभा चुनावों में हराया हैं तबसे उनकी यह नफरत और ज्यादा बढ़ गयी हैं।

जनता के बीच अपनी विश्वासनीयता खो चुके कॉमरेड सीताराम येचुरी भी इस घटना को साम्प्रदायिक रंग देने से बाज नही आये, उन्होने इस घटना को बीजेपी की विचारधारा से जोड़ते हुए अल्पसंख्यक समुदाय पर अत्याचार के रूप में पेश किया।

इस्लामिक कट्टरपंथियों समेत कुछ और Hate Mongers ने इस घटना को साम्प्रदायिकता का रंग दिया, लेकिन उनका जिक्र इसलिए बेमानी हैं कि वह तो माने हुए कट्टरपंथी इस्लामिक ट्रोल हैं। जब खुद को सेकुकर कहने वाले ऐसे सेलेब्रेटी स्टेटस वाले नफरत का कारोबार कर रहे हैं तो उन लोगो की क्या गिनती?

अब जानिए सच्चाई क्या है?

यह मामला कमरौली थाना क्षेत्र का है। यहां लखनऊ सुल्तानपुर हाईवे के किनारे स्थित सेना से सेवानिवृत कैप्टन अमानुल्लाह अपने परिवार के साथ रहते हैं। बताया गया कि अमानुल्लाह अपनी पत्नी अमीना के साथ मकान के बरामदे में सो रहे थे। तभी रात करीब दो बजे बदमाशों ने धावा बोल दिया। उन्हें बंधक बनाकर पहले घर में लूटपाट की। विरोध पर सेवानिवृत कैप्टन को लाठी-डंडों से पीटा। अमानुल्लाह के पुत्र ने बताया कि हमले के समय घर पर उसके पिता व मां ही मौजूद थे। हमले में सिर पर गंभीर चोटें आने से पिता की मौके पर ही मौत हो गई। एएसपी दयाराम के अनुसार, घटना के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

अमेठी के पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने कहा कि मृतक और उसकी पत्नी अपने नव-निर्मित घर के बरामदे में सो रहे थे। तभी कुछ चोरों ने घर के बाहर एक खाली पड़े इलाके में ठेकेदार की सड़क निर्माण सामग्री चोरी करने की कोशिश की और जैसे ही अमानुल्लाह ने शोर माचाया, चोरों ने उन्हें मार डाला।

ये सारी बातें सामने आ जाने के बाद भी तहसीन पूनावाला इस घटना को मॉब लीचिंग कहने से बाज नहीं आ रहे हैं। बहरहाल उन्हें और उनके साथियों को मानना भी नही हैं, क्योकि ऐसी ही घटनाओं के सहारे तो उनकी Hate Mongering की दुकान चलती है। अगर सच का सामना कर लिया तो उनकी दुकान नही बन्द हो जाएगी!!