बरखा दत्त जैसी वरिष्ठ पत्रकार अर्णब गोस्वामी के खिलाफ शशि थरूर द्वारा कार्रवाई करने से काफी उत्साहित हैं। बरखा ने अपनी ट्वीट के माध्यम से अर्नब पर पत्रकारों की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया है। बरखा ने कहा कि गोस्वामी को गिरफ्तार करके उन पर केस चलाया जाए। बरखा दत्त ने एक प्रकार से अर्णब गोस्वामी के खिलाफ शशि थरूर की कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने लिखा है कि इस प्रकार के खतरनाक, सांप्रदायिक तथा नीच रिपोर्टिंग करने वाले अर्णब गोस्वामी को आपराधिक मामला सामना करना ही चाहिए।

ज्ञात हो कि ‘रिपब्लिक टीवी’ के संपादक अर्णब गोस्वामी को दिल्ली की एक अदालत ने बड़ा झटका दिया है। पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को अर्नब गोस्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता शशि थरूर के निजी ईमेल को हैक करने और दस्तावेजों को चोरी करने के आरोप में पुलिस को यह निर्देश दिया है।

सिर्फ बरखा दत्त ही नहीं राजदीप और प्रणय राय जैसे बड़े पत्रकार भी गोस्वामी के खिलाफ हैं। इसका सबूत स्वयं राजदीप सरदेसाई की पत्नी और पत्रकार सागरिका घोष ने अपने ट्वीट के माध्यम से दे दिया है। उन्होंने ज्योति मल्होत्रा के एक ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा है कि अर्णब गोस्वामी ने पूरी टीवी न्यूज को बर्बाद कर के रख दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि अर्णब गोस्वामी ने राजदीप सरदेसाई तथा प्रणय राय से ईर्ष्या करने की वजह से पूरी टीवी न्यूज को ही बर्बाद कर दिया है।

ध्यान रहे कि शशि थरूर ने दस्तावेज चुराने की शिकायत कर रिपब्लिक टीवी या अर्णब गोस्वामी पर नहीं बल्कि पूरी पत्रकारिता पर चोरी की तोहमत लगाने का दुस्साहस किया है। बरखा दत्त ने अगर सही में पत्रकारिता की होती तो आज शशि थरूर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आवाज उठाती। बहस इस पर होनी चाहिए थी कि शशि थरूर क्यों मीडिया को डराना चाहते हैं? लेकिन बहस अर्नब पर हो रही हैं ताकि शशि थरूर को बचाया जा सके। जबकि ऐसे ही एक मामले में जब अमित शाह के बेटे जय शाह के खिलाफ फर्जी न्यूज़ छापने के मामले में ‘द वायर’ पर डिफेमेशन केस हुआ तो यही लोग इसे प्रेस की स्वतन्त्रता का हनन, पत्रकारों को डराने की साजिश बता रहे थे। ना जाने इतना डबल स्टैंडर्ड ये लोग कहाँ से लाते हैं।

बरखा, गोस्वामी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चलने से खुश होकर उन पर सांप्रदायिक पत्रकारिता करने का आरोप लगा रही हैं। लेकिन इससे पहले बरखा को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। बरखा दत्त दूसरों को तो पत्रकारिता सिखा रही हैं लेकिन क्या वो खुद एक पत्रकार हैं?

क्या देश की सेना को संकट में डालकर अपने पड़ोसी दुश्मन देश पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को मदद पहुंचाना पत्रकारिता है? कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुए अन्याय की खबर को दबा देना पत्रकारिता है? कठुआ कांड के तहत देश और हिंदुओं को बदनाम करने के लिए साजिश के तहत अभियान चलाना पत्रकारिता है? ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ के नारे लगाने वाले का इंटरव्यू के लिए बेसब्री से इंतजार करना पत्रकारिता है? दुनिया के कुख्यात आतंकवादी द्वारा तारीफ पाना पत्रकारिता है? एक आतंकवादी को शहीद का दर्जा देना क्या पत्रकारिता है?

वैसे बरखा की अर्णब गोस्वामी के प्रति नफरत काफी पुरानी है।

अर्णब गोस्वामी ने 2017 में एक कार्यक्रम में कहा कि ”जब लोग खुलेआम भारत का विरोध और पाकिस्‍तान व आतंकवादियों के लिए समर्थन जाहिर करते हैं तो ऐसे लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए?” अरनब ने कहा कि वे ऐसे लोगों को स्‍यूडो लिबरल्‍स (छद्म उदारवादी) कहते हैं। ऐसे लोगों का ट्रायल होना चाहिए। अरनब ने यह भी कहा कि मीडिया में कुछ खास लोग बुरहान वाणी के लिए हमदर्दी दिखाते हैं। यह वही ग्रुप है जो अफजल गुरु के लिए काम करता है और उसकी फांसी को साजिश बताता है। अरनब ने अपने शो में बिना किसी का नाम लिए कहा था कि भारत के ऐसे पत्रकारों पर सख्त कार्रवाई होना चाहिए जो यहां बैठकर पाकिस्तान की बात करते हैं। ऐसे पत्रकार राष्ट्रविरोधी हैं।

जिसके बाद बरखा दत्त ने फेसबुक पर लिखा – टाइम्स नाउ मीडिया अन्य पत्रकारों पर रोक लगाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने और सजा दिलाने की वकालत कर रहा है। क्या अर्णब पत्रकार हैं? मुझे शर्म आती है कि मैं उसी पेशे से हूं जिससे वे जुड़े हैं।

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