पिछले दिनों उड़ीसा में आए भयंकर तूफान ‘फैनी’ से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए अलग अलग राज्य सरकारें मुख्यमंत्री राहत कोष से उड़ीसा सरकार को फंड दे रही हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों ने आर्थिक मदद दे दी है। अब बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार भी चक्रवात पीड़ित लोगों की सहायता के लिए आगे आए हैं। उन्होंने अपने निजी खाते से पीड़ितों के लिए 1 करोड़ रुपए उड़ीसा सरकार को दिया है।

आपको बता दें कि पिछले दिनों उड़ीसा में 1999 के बाद सबसे बड़ा तूफान आया था, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के सतर्क होने की वजह से अभी तक 39 लोगों के मरने की खबरें ही आ रही हैं। इससे पहले 1999 में तकरीबन 15000 लोगों की मृत्यु हुई थी। हालांकि, इस तूफान से जनजीवन अस्त व्यस्त हुआ है, जिसे ठीक करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त टीमें लगी हुई हैं। इसी सिलसिले में अक्षय कुमार ने दरियादिली दिखाते हर बार की भांति इस बार भी पीड़ितों की आर्थिक मदद की है।

मालूम हो कि पिछले दिनों अक्षय कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक ग़ैर राजनीतिक इंटरव्यू लिया था, जिसमे उनके एक सवाल पर देश का लिबरल जमात बौखला गया था और हाथ पैर धोकर उनके पीछे पड़ गया। दरअसल, उस इंटरव्यू में अक्षय कुमार ने पीएम मोदी से उनके ‘आम खाने’ पर सवाल पूछे। बस फिर क्या था? अक्षय कुमार तो पहले से ही इस जमात के निशाने पर थे और अब एक मुद्दा भी मिल गया उन्हें घेरने के लिए। यह लिबरल जमात अक्षय कुमार की नागरिकता तक पहुंच गया। पहुंचे भी क्यों ना? आखिर पहली बार तो उन्हें अपनी गंदी मानसिकता से पाटने का मौका मिला है।

उनकी नागरिकता पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि वो भारतीय नहीं, बल्कि कनाडाई नागरिक हैं। फिर वो भारत में क्या कर रहे हैं? सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि 3-4 दिन तक यह तमाशा चलता रहा। आखिर में अक्षय कुमार ने 3 मई को ट्विटर पर एक बयान जारी करके पूरी स्थिति स्पष्ट की और कहा, “हां मेरे पास कनाडा का पासपोर्ट है और मैंने इसे कभी नहीं छिपाया। मैंनें पहले भी यह बात कही है। लेकिन यह भी सच है कि मैं पिछले 7 साल से कनाडा नहीं गया। मैं भारत में रहता हूँ, यहां काम करता हूं और टैक्स भरता हूं। इन वर्षों में भारत के प्रति मुझे कभी भी अपने प्यार को साबित करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। यह दुखद है कि मेरे व्यक्तिगत और कानूनी मामले को इस तरह से राजनीति में घसीटा जा रहा है।”

देश के लिए अक्षय कुमार का प्यार किसी से छिपा नहीं है। ये बात देश के लेफ्ट और राइट, सभी तरह के लोग जानते हैं। वो हमेशा सैनिकों के लिए दिल खोलकर मदद करते आए हैं। उनकी पहल पर गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों के लिए ‘भारत के वीर’ वेबसाइट लांच की, जिसके तहत आम जनता भी अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों को स्वेच्छानुसार आर्थिक मदद कर सकती है। हाल ही में 14 फरवरी 2018 को पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद सैनिकों के लिए राहत कोष में उन्होंने 5 करोड़ रुपए दिया था। वर्ष 2018 में केरल में आई भयंकर बाढ़ से लोगों की मदद के लिए भी उन्होंने हाथ बढ़ाया था। इतना ही नहीं, देश का कोई भी सैनिक शहीद होता है, तो वह तुरंत आर्थिक मदद करते हैं।

बहरहाल, अक्षय कुमार जी, यह वो जमात है, जो आतंकियों की फांसी रुकवाने के लिए उनके लिए दया याचिका पर हस्ताक्षर करता है। इतना ही नहीं, यह लिबरल जमात तो देश के मुख्य न्यायाधीश को भी नहीं छोड़ता, तो फिर आप किस खेत के मूली हैं। आप सभी को ज्ञात होगा कि इसी जमात ने वर्ष 2018 में पूर्व सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा पर दबाव बनाने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए, लेकिन जस्टिस मिश्रा अडिग रहे। अब यही लिबरल जमात वर्तमान सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई के पीछे पड़ा है।

इस लिबरल जमात में वही लोग शामिल हैं, जो गाहे बगाहे नरेंद्र मोदी या उनसे जुड़ाव रखने वाले किसी भी बड़े सेलिब्रिटी पर ऐसे हमला बोलते हैं, जैसे वो व्यक्ति उनका सबसे बड़ा दुश्मन हो। ये लोग हर उस व्यक्ति से नफरत करते हैं जो किसी भी तरह से पीएम मोदी या संघ की विचारधारा से अपनी सहमति जताते हैं।

नागरिकता को लेकर सिर्फ अक्षय कुमार ही कटघरे में क्यों?

अब सवाल यह है कि सिर्फ अक्षय कुमार को ही उनकी नागरिकता को लेकर निशाना क्यों बनाया जा रहा है? सिर्फ इसलिए, क्योंकि वह खुलकर प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करते हैं? अगर ऐसा नहीं, तो फिर आलिया भट्ट, सोनी राजदान, दीपिका पादुकोण, नरगिस फाखरी और इमरान खान भी तो भारतीय नागरिक नहीं हैं, फिर इन्हें क्यों बख्श दिया गया? आखिर क्यों एक ही वर्ग के दो व्यक्तियों को अलग अलग चश्मे से देखा जाता है? हर व्यक्ति किसी ना किसी राजनेता का समर्थन करता है, चाहे वो खुलकर करे या चुपचाप। सोनी राजदान तो खुलेआम राजनीतिक दलों की तरह मुस्लिम प्रेम दिखाकर बीजेपी के खिलाफ वोट की अपील करती हैं, लेकिन भारतीय ना होने की वजह से वोट नहीं करतीं। फिर भी लिबरल जमात की नजर में ये सच्ची भारतीय हो गयीं।

बहरहाल, आगे बढ़ते हैं। अक्षय कुमार की नागरिकता को लेकर खबरें पहले भी मीडिया रिपोर्ट्स में आती रही हैं। पहली, वर्ष 2016 में सबसे पहले खबर आई थी कि अक्षय कुमार के पास कनाडाई पासपोर्ट है, तभी अधिकांश लोगों को पता चला कि वो कनाडाई नागरिक हैं। दूसरी, फिल्म ‘रुस्तम’ की रीलिज के समय इंडिया टुडे में यह खबर प्रकाशित हुई थी कि फिल्म के किरदार कमांडर केएम नानावती की तरह अक्षय कुमार भी कनाडाई नागरिक हैं। वैसे अक्षय कुमार तो खुलकर ये कह रहे हैं कि उनके पास कनाडा का पासपोर्ट है और उन्होंने कभी भी इससे इंकार नहीं किया कि उनके पास कनाडा कि नागरिकता है। यहां तो लोग विदेशों में कंपनी भी चलाते हैं, वहां टैक्स भी भर चुके होते हैं और भारत के लोग उनकी नागरिकता पर सवाल करते हैं, तो चुप्पी साध लेते हैं। आखिर में गृह मंत्रालय को नोटिस जारी करना पड़ता है कि वो व्यक्ति अपनी नागरिकता की स्थिति स्पष्ट करे।

अक्षय कुमार तो समय समय पर शहीद सैनिकों के परिवारों की मदद करते हैं और उन्होंने उड़ीसा में 1 करोड़ रुपए भी दान किए। तो क्या अब लिबरल जमात ये बताएगा कि उनके फेवरेट भारतीय पासपोर्ट धारक एक्टर/प्रोड्यूसर कब उड़ीसा में लोगों की मदद के लिए आगे आएंगे? महेश भट्ट, जावेद अख्तर, शबाना आज़मी, शाहरुख खान, आमिर खान, सिध्दार्थ मल्होत्रा, अनुराग कश्यप, स्वरा भास्कर, हुमा कुरैशी, रिचा चड्ढा जैसे लोगों ने कितनी बार शहीद सैनिकों के परिवारों की मदद की है, सिवाय टुकड़े टुकड़े गैंग का समर्थन करने और आतंकियों के लिए दया याचिका पर हस्ताक्षर करने के?

निश्चित ही उपरोक्त सभी सवालों का जवाब अक्षय कुमार की नागरिकता की जांच करने वाले इन बुध्दिजीवियों के पास नहीं होगा।