वंदे मातरम मित्रों! मिलिट्री एंड इंटेलिजेंस सीरीज की पिछली कड़ी यानि ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट‘ में आपने पढ़ा कि कैसे भारतीय नौसेना ने कराची हार्बर को तहस नहस कर दिया था।

ऑपरेशन ट्राइडेंट के दौरान पाकिस्तान का नुकसान तो बहुत हुआ था लेकिन कराची में तेल भंडारण सुविधाएं अभी भी चालू थी। इसका कारण था ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के दौरान दागी गई दो मिसाइलों में से केवल एक ही टैंकर पर लग पाई थी। चूंकि भारतीय नौसेना के हमले की सूचना पाकिस्तानी नौसेना मुख्यालय और वायुसेना तक पहुंच चुकी थी इसलिए इंडियन नेवी के स्ट्राइक ग्रुप को वापस आना पड़ा जिसकी वजह से पाकिस्तान की तेल भंडारण सुविधा पूरी तरीके से नहीं रुक पाई थी।

ऑपरेशन ट्राइडेंट के बाद कराची बंदरगाह पर पाकिस्तान ने हवाई निगरानी बढ़ा दी थी क्योंकि बड़े-बड़े भारतीय नौसेना के जहाजों की उपस्थिति से पाकिस्तान सशंकित था कि कहीं भारत की तरफ से एक और हमले की योजना न बनाई जा रही हो। एक और हमले से बचने के लिए पाकिस्तानी नौसैनिकों ने मर्चेंट शिपिंग के साथ मिलकर भारतीय नौसेना को धोखे में रखने का प्रयास किया। पाकिस्तान की इन चालों का मुकाबला करने के लिए भारतीय नौसेना ने “ऑपरेशन पाइथन” की योजना बनाई। इसे 8 और 9 दिसंबर, 1971 की रात को अंजाम दिया जाना था।

8 दिसंबर 1971 की रात, पाकिस्तानी समय के 10:00 बजे, इंडियन नेवी का स्ट्राइक ग्रुप कराची के दक्षिण में स्थित प्रायद्वीप मनोरा के पास पहुंचा। इस स्ट्राइक ग्रुप में 4 स्टिक्स मिसाइलों से लैस आईएनएस विनाश, दो फ्रिगेट्स आईएनएस तलवार और आईएनएस त्रिशूल शामिल थे। जब ये ग्रुप कराची की तरफ बढ़ रहा था तब एक पाकिस्तानी गश्ती पोत से इसका सामना हुआ और भारतीय नेवी के इस स्ट्राइक ग्रुप ने उसको नष्ट करके डूबा दिया। भारतीय नौसेना के आधिकारिक इतिहासकार, वाइस एडमिरल हीरानंदानी ने अपनी पुस्तक ‘ट्रांज़िशन टू ट्रायम्फ‘ में उल्लेख किया कि जब ये स्ट्राइक ग्रुप कराची के पास पहुंचा था तो इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के दौरान पाकिस्तानी रडार ने इसकी उपस्थिति को पकड़ लिया था।

आईएनएस विनाश

 

आईएनएस तलवार

 

आईएनएस त्रिशूल

लगभग 11.00 बजे, स्ट्राइक ग्रुप को 12 एनएम (22 किमी; 14 मील) की दूरी पर कुछ जहाजों की उपस्थिति का पता चला। आईएनएस विनाश से चार मिसाइलें दागीं गईं। जिनमें से पहली केमरी ऑयल फार्म में ईंधन टैंक में लगी और जोरदार विस्फोट हो गया। दूसरी मिसाइल पनामियन ईंधन टैंकर एसएस गल्फ स्टार पर लगी और ये नष्ट होकर डूब गया। तीसरी और चौथी मिसाइलें क्रमशः पाकिस्तानी नौसेना बेड़े के टैंकर PNS डक्का और ब्रिटिश व्यापारी पोत एसएस हरमाटन पर जाकर लगीं। PNS डक्का पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था जबकि हरमाटन नष्ट होकर डूब गया। आईएनएस विनाश ने अपने नाम के अनुरूप ही पाकिस्तानी पोतों का विनाश कर दिया था और इसके बाद ये स्ट्राइक ग्रुप वापस भारत में अपने बंदरगाह वापस आ गया।

PNS डक्का

 

एसएस हरमाटन

इधर एक तरफ नौसेना ने “ऑपरेशन ट्राइडेंट” और “ऑपरेशन पायथन” चलाया वहीं भारतीय वायु सेना ने भी कराची के ईंधन और गोला-बारूद डिपो पर हमला कर किया। भारतीय सेनाओं के हमले में कराची ज़ोन की कुल ईंधन क्षमता का पचास प्रतिशत से अधिक तो नष्ट ही हो गया था। नतीजतन पाकिस्तान को गहरा आर्थिक झटका लगा और भारत को मिली एक सामरिक जीत। पाकिस्तान के नुकसान का अनुमान 3 अरब डॉलर आंका गया जिसमें उसके अधिकांश तेल एवं गोला-बारूद के भंडार और कार्यशालाएं नष्ट हो गईं थीं। आलम ये था कि पाकिस्तानी वायु सेना के लिए भी ईंधन की समस्या आ खड़ी हो गई थी। 1971 के इस युध्द में पाकिस्तान को बड़ा आर्थिक नुकसान करवाकर भारत ने अपनी जीत की नींव तो पहले ही डाल ली थी जिसे बाद में भारत ने जीत में तब्दील कर लिया था और बांग्लादेश पाकिस्तान से आजाद होकर एक नया देश बनकर उभरा था।

भारत की ओर से कोई हताहत नहीं होने के कारण इस मिशन को भी भारतीय नौसेना के बेहतरीन मिशनों में से एक माना जाता है। आईएनएस विनाश के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर विजई जेरथ को इस ऑपरेशन के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया ।

पाकिस्तान में भारतीय नौसेना की ऐसी दहशत थी कि सरकार की तरफ से आदेश दिये गए कि नौसेना का कोई भी पोत रात के समय गश्ती करने समुद्र में न जाये एवं यदि आवश्यक हो तो इसका बकायदा आदेश लेकर जाए। हमले की स्थिति में पोत अपने बारूद को कम कर दें जिससे कि विनाश को कम किया जा सके। ऐसे आदेशों ने पाकिस्तानी नौसेना के मनोबल की कमर तोड़कर रख दी थी। धीरे धीरे दूसरे देशों के व्यापारिक जहाजों ने भी कराची हार्बर पर जाना बंद कर दिया था और यही सही मायने में भारत की पाकिस्तान पर सामरिक जीत थी।

मित्रों! उम्मीद करता हूँ कि ये सीरीज आपको पंसद आ रही होगी। पढिये और शेयर करते रहिए। जय हिंद, वंदे मातरम, भारत माता की जय ??????

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