वंदे मातरम मित्रों! मिलिट्री एंड इंटेलिजेंस सीरीज को आगे बढाते हुए आज हम बात करेंगे भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन जिंजर‘ के बारे में, ये अभियान भारतीय सेना ने पाकिस्तान की उस कायराना हरकत का बदला लेने के लिए चलाया था जिसमें पाकिस्तानी BAT के जवानों ने LOC पार करके भारतीय सीमा में गश्त कर रहे हमारे दो जवानों के सर काट लिए थे और अपने साथ पाकिस्तान ले गए थे। उस समय भारत में UPA की सरकार थी जो तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मन मोहन सिंह को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नबाज शरीफ द्वारा देहाती औरत कहने पर भी प्रतिक्रिया देना नहीं जानती थी। भारतीय सेना को ये मालूम था कि यदि इस ऑपरेशन की सूचना यदि सरकार तक पहुंचेगी तो इसे कभी अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सकेगा इसलिए इस अभियान को प्लान करते समय इसके बारे में न तो सरकार को मालूम था न ही सेना की सभी अधिकारियों को, ऑपरेशन खुफिया तरीके से अंजाम दिया गया और इसके बाद इसकी खबर ‘द हिन्दू’ ने प्रकाशित की थी।

मित्रों! ‘द हिन्दू’ अखबार के पास इसके आधिकारिक दस्ताबेज उपलब्ध हैं एवं एक वीडियो भी है जिसमें पाकिस्तानी सैनिक भारतीय जवानों के कटे हुए सरों के साथ फोटो खिंचवाकर जश्न मनाते हुए नजर आ रहे हैं। इस मिशन की जानकारी ‘द हिन्दू’ के अलावा ‘द डिप्लोमेट’ ने भी छाप रखी है।

Operation Ginger

 

घटनाक्रम :
पाकिस्तानी हमलावरों (पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम – BAT) ने 30 जुलाई, 2011 की दोपहर को कुपवाड़ा के गुगलधर रिज में एक दूरस्थ सेना की चौकी पर हमला किया था। इस चौकी पर राजपूत रेजिमेंट और कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिक तैनात रहते थे। जिस समय पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) ने हमला किया, उस समय 19 कुमाऊं रेजिमेंट द्वारा 20 राजपूत बटालियन को प्रतिस्थापित किया जाना था। हमलावर पाकिस्तान सैनिकों ने 20 कुमाऊं रेजिमेंट के हवलदार जयपाल सिंह अधिकारी और लांस नायक देवेंद्र सिंह के सिर काट लिए। हमले की सूचना देने वाले 19 राजपूत रेजिमेंट के एक सैनिक की बाद में अस्पताल में मौत हो गई। कुछ दिन बाद, भारतीय सेना के साथ हुई मुठभेड़ में एक पाकिस्तानी आतंकी मारा गया और उसके फ़ोन से एक वीडियो क्लिप बरामद हुआ जिसको देखकर भारतीय सैनिकों की आंखों में खून उतर आया, ये वही वीडियो क्लिप था जिसमें भारतीय सैनिकों के कटे हुए कई सरों के साथ पाकिस्तानी जश्न मना रहे थे।

पाकिस्तान की इस कायराना हरकत का बदला लेने के लिए, भारतीय सेना ने “ऑपरेशन जिंजर” की योजना बनाई, जो भारतीय सेना द्वारा अब किए गए सबसे घातक सीमा पार ऑपरेशन्स में से एक होता। कम से कम सात टोही अभियान संभावित लक्ष्यों की पहचान करने के लिए चलाए गए और तीन पाकिस्तानी सेना पोस्टों को चिन्हित किया गया था: पुलिस चौकी, जोर, हिफाज़त और लश्दत लॉजिंग पॉइंट के पास एक पाकिस्तानी सेना पोस्ट। मिशन के लिए पुलिस चौकी पर एक घात लगाना था ताकि अधिकतम सैनिक इससे हताहत हो सके। इसमें सैनिकों की अलग अलग टीम बनाई गईं जिसमें एक टीम का काम घात लगाकर बैठना था, दूसरी टीम हमला करती और तीसरी टीम उसको कवर करती। ये सभी भारतीय सेना द्वारा की गई उस सर्जिकल स्ट्राइक का हिस्सा थी जिसमें LOC पार करके अंजाम दिया जाने वाला था।

दो महीने से अधिक समय तक मिशन की रिहर्सल किये जाने के बाद, भारतीय सेना ने मंगलवार, 30 अगस्त को ऑपरेशन जिंजर लॉन्च किया। चूंकि सन 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान मंगलवार को भारत ने जीत का स्वाद चखा था इसलिए इसी दिन इस ऑपरेशन की योजना बनाई गई, ये दिन ईद से ठीक एक दिन पहले था, इसी वजह से भारतीय सेना को पाकिस्तानियों के बेखबर होने की उम्मीद कर रखी थी।

सर्जिकल स्ट्राइक के लिए, लगभग 25 सैनिक, मुख्य रूप से पैरा कमांडो, 29 अगस्त को सुबह 3 बजे अपने लॉन्च-पैड पर पहुँचे और रात 10 बजे तक वहाँ छिपे रहे। फिर उन्होंने पुलिस चौकी के करीब पहुंचने के लिए नियंत्रण रेखा को पार किया। हमले के लिए पूर्वनियोजित दिन 30 अगस्त की सुबह 4 बजे, घात लगाकर बैठे दुश्मन के इलाके में घुसकर, घात लगाकर हमला करने की योजना थी। अगले घंटे, क्ले मोर माइंस को क्षेत्र के चारों ओर रखा और घात लगाकर कमांडोज में अपनी अपनी पोजिशन ले ली। 30 अगस्त की सुबह 7 बजे, सैनिकों ने चार पाकिस्तानी सैनिकों को देखा, जो एक जूनियर कमीशंड अधिकारी के नेतृत्व में पोस्ट की तरफ आ रहे थे। वे तब तक इंतजार करते रहे जब तक कि पाकिस्तानी उस साइट पर नहीं पहुंच गए और जैसे ही वे पहुंचे पहले से बिछी हुई माइंस में जोरदार विस्फोट हुआ।

विस्फोट में सभी चार घायल हो गए थे। फिर इंडियन कमांडोज ने ग्रेनेड फेंके और उन पर गोलीबारी की। पाकिस्तानी सैनिकों में से एक नीचे बह रही धारा में गिर गया। भारतीय सैनिकों ने अन्य तीन मृत सैनिकों के सिर काट लिए। उन्होंने उनके रैंक के प्रतीक चिन्ह, हथियार और अन्य व्यक्तिगत सामान भी छीन लिए। इसके बाद कमांडोज ने पाकिस्तानी सैनिक के एक शव के नीचे प्रेशर IED रख दी ताकि जब कोई शव को उठाने का प्रयास करे तो उसमें विस्फोट हो जाए। विस्फोटों को सुनकर, दो पाकिस्तानी सैनिक चौकी से भागे लेकिन पहले से घात लगाए बैठी दूसरी भारतीय कमांडो टीम ने उन्हें मार गिराया। हालांकि पाकिस्तानी सेना के दो अन्य लोगों ने दूसरी टीम पर हमले की कोशिश की थी लेकिन पीछे से उन्हें कवर करने वाली तीसरी टीम ने दोनों को खत्म कर दिया। जब भारतीय सैनिक वापस आ रहे थे तभी उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों के एक अन्य दल को पुलिस चौकी से घटनास्थल की ओर जाते हुए देखा। जल्द ही उन्होंने जोर से विस्फोट को सुना जो IEDs के ट्रिगर होने का संकेत था। सेना के आकलन के अनुसार, उस विस्फोट में कम से कम दो से तीन और पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे।

ये ऑपरेशन 45 मिनट तक चला था, और भारतीय टीम एलओसी के पार वापस जाने के लिए सुबह 7.45 बजे तक इलाका छोड़कर चुकी थी। पहली टीम दोपहर 12 बजे और आखिरी दोपहर 2.30 बजे तक भारतीय सेना की चौकी पर पहुंची थी। भारतीय कमांडोज लगभग 48 घंटे तक दुश्मन के इलाके में रहे थे। इस कार्रवाई में कम से कम आठ पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे और एक और दो या तीन और पाकिस्तानी सैनिक मोटे तौर पर घायल हो गए होंगे। तीन पाकिस्तानी प्रमुख – सूबेदार परवेज, हवलदार आफताब और नाइक इमरान – तीन एके 47 राइफलें और अन्य हथियार भारतीय सैनिकों द्वारा लायी गई चीजों में से एक थे।

तत्कालीन मेजर जनरल एस के चक्रबर्ती के नेतृत्व में इस ऑपरेशन की योजना बनी और अंजाम दिया गया। वे तब कुपवाड़ा के 28 डिवीजन के मुख्य के तौर पर तैनात थे। मित्रों! कई बार जानवरों को सबक सिखाने के लिए उनके जैसा ही बनना पड़ता है, पाकिस्तानी BAT ने जो अमानवीय कृत्य किया था उसका बदला ईंट का जबाब पत्थर से ही दिया जा सकता था और इसी क्रम में भारतीय सेना ने भी उसी अंदाज में उनके घर में घुसकर बदला भी लिया। किंतु हम पाकिस्तानियों जैसे अमानवीय नहीं हैं, जब जब पाकिस्तान ने युध्द के बाद अपने सैनिकों के शवों को लेने से मना किया है, भारतीय सेना ने उनके अंतिम संस्कार उनके धर्म के अनुसार ही किये हैं। इसी क्रम में पाकिस्तानी सैनिकों के कटे हुए सरों का भी अंतिम संस्कार करके दफनाया गया, लेकिन बाद में बरिष्ट आर्मी जनरल के आदेश पर उन सरों को जला दिया गया और राख किशनगंगा नदी में बहा दी गई ताकि कहीं से कोई डीएनए ट्रेस न रह पाए।

मित्रों! अहिंसा और कायरता में बहुत फर्क है, अहिंसा तब तक ही अच्छी लगती है जब सामने वाला भी मानवीय संवेदनाओं को समझ रहा हो लेकिन जब मानवीय सम्वेदनाएँ ताक पर रखकर कुकृत्य किये जाते हैं तो उसका जबाब भी मुंहतोड़ और हिंसा से ही दिया जाता है। इंडियन आर्मी अगर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लोगों की जान बचा सकती है तो राक्षसों को मौत के घाट भी उतार सकती है। उम्मीद करता हूँ आप लोगों को ये श्रृंखला पसन्द आ रही होगी। मिलते अगली कड़ी में फिर से एक नई साहसिक दास्तान के साथ, जय हिंद ????

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