भारतीय नौसेना ने हाल ही में अंडमान-निकोबार में अपना तीसरा एयरबेस आईएनएस कोहासा/कहोसा (INS Kohassa) तैयार किया है। सामरिक दृष्टि से इसने भारत की ताकत में इजाफा किया है। इसका नाम अंडमान-निकोबार में पाई जाने वाली समुद्री गरुड़ की एक प्रजाति के नाम पर रखा गया है। इसके पीछे तर्क है कि गरुड़ एक शिकारी पक्षी है और यहां पर इंडियन नेवी अपने वे विमान रखेगी जो निगरानी के लिए प्रयोग में लाये जाते हैं। संलग्न चित्र में आप आईएनएस कोहासा की भौगोलिक स्थिति देख सकते हैं, ये उत्तरी अंडमान में स्थित है।

जैसा कि हम जानते हैं, चीन हिन्द महासागर में अपनी वॉरशिप और सबमरीन्स भेजता रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इसको भारत की इस क्षेत्र में कूटनीतिक बढ़त माना जा रहा है। चीन ने म्यांमार में बहुत निवेश कर रखा है, इसकी वजह से उसे म्यांमार के कई क्षेत्रों में व्यापार के नाम पर पहुंच हो गई है। म्यांमार का ‘कोको द्वीप’ अंडमान के एकदम करीब है। विषम परिस्थितियों में या फिर युद्ध के दौरान म्यांमार के इन क्षेत्रों का इस्तेमाल अपनी सैन्य गतिविधियों के लिए भी कर सकता था इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए भारतीय नौसेना ने ये कदम उठाया है।

कोको द्वीप, म्यांमार

दरअसल, नेवल एयर स्टेशन शिबपुर उत्तरी अंडमान में निगरानी के लिए सन 2001 में बनाया गया था। चूंकि ये जगह म्यांमार के कोको द्वीप के पास है इसलिए सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। नेवल स्टेशन शिबपुर के इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी हद तक सुधार किए गए और हाल ही में इसे आईएनएस कोहासा नाम दिया गया। ये भारत का चौथा एयरबेस है और नेवी का अंडमान निकोबार क्षेत्र में तीसरा एयर बेस है। सामरिक दृष्टि से देखा जाए तो इस क्षेत्र में हर साल 60,000 से ज्यादा व्यापारी जहाज गुजरते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘उड़ान’ के तहत ये एयरबेस नागरिक उड्डयन के काम में भी लाया जाएगा और मिलिट्री के लिए भी इस्तेमाल होगा। यहां पर नेवी के हेलीकॉप्टर, डोर्नियर एयरक्राफ्ट्स सुविधा उपलब्ध होगी और ये नेवी वेसल्स की निगरानी के काम आएंगे। पहले यहां केवल 3000 फ़ीट का रनवे हुआ करता था जिसको अब बढाकर 9000 फ़ीट कर दिया है ताकि हर तरीके के जहाज यहां से उड़ान भर सकें।

चीन ने भारत के इस कदम पर बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया देकर कहा है कि अंडमान भारत का क्षेत्र है और भारत अपने क्षेत्र में कुछ भी कर सकता है। ये प्रतिक्रिया बताती है कि अब भारत सामरिक तौर पर आगे बढ़ रहा है और किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम है।